यूपी है. सबसे ज्यादा जनता है. तो नेता भी सबसे ज्यादा होंगे. नेता हैं क्योंकि चुनाव हैं. जल्द ही. अगले साल की शुरुआत में. इसलिए खूब सारी पॉलिटिक्स है आजकल. बयान भी हैं. ज्यादातर घटिया. आज तीन गोबर बयान दिए गए. तीनों पढ़ते और समझते हैं.
1. आजम ने किया बाबा साहेब का अपमान
कामों से ज्यादा बोलने के लिए मशहूर अखिलेश यादव सरकार के मंत्री. सपा का मुस्लिम चेहरा. आजम खान. सोमवार को गाजियाबाद में हज हाउस के उद्घाटन के लिए पहुंचे. साथ में सीएम भी थे. ये हाउस जिस जमीन पर बना है, उसको लेकर मुकदमेबाजी चल रही है. खैर. आजम ने यहां पर संविधान बनाने वाले बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की बेइज्जती की. वो बोले, पूरे सूबे में एक आदमी की मूर्ति लगी है. वह आगे हाथ का इशारा करके खड़े हैं. मतलब ये है कि जहां मैं खड़ा हूं, वो तो मेरी जमीन है ही, सामने का खाली पड़ा प्लॉट भी मेरा है. क्या मतलब निकालें- अंबेडकर की एक हाथ उठाए मूर्ति बनती है. क्योंकि उनका दलितों-वंचितों को संदेश था. आगे बढ़ो. अपनी गुलामी की जंजीरें तोड़ो. इसके लिए पढ़ाई करो. लड़ाई करो. अपनी दासता के खिलाफ. मगर आजम को लगता है कि वे जमीन कब्जे के लिए कह रहे थे. कब्जे से याद आया. सपा सरकार पर खुद उसके दो नेता मुलायम सिंह और शिवपाल यादव गुस्सा हैं. कहते हैं कि सरकारी नेता जमीन कब्जा रहे हैं. आजम खान बताएंगे कि इसके लिए कौन सी मूर्तियां इशारा करती हैं. अंबेडकर की मूर्तियों की भी कहानी दिलचस्प है. पहले यूपी में इतनी अंबेडकर मूर्तियां नहीं थीं. शुरुआत 1993 में मुलायम राज में हुई. प्रदेश में सपा-बसपा की संयुक्त सरकार थी. मुख्यमंत्री थे मुलायम सिंह. बसपा की तरफ से कमान संभाल रही थीं युवा महासचिव मायावती. तभी मेरठ के पास यादवों और दलितों के बीच संघर्ष हो गया. अंबेडकर की एक मूर्ति लगाने को लेकर. दलितों को पुलिस ने गिराकर मारा. उनमें आक्रोश फैल गया. बसपा ने नाराजगी जताई. और उसके बाद पूरे प्रदेश में प्रतिक्रिया, स्वाभिमान और चेतना के रूप में अंबेडकर की मूर्तियों की बाढ़ आ गई. एक वक्त तो ऐसा भी आया, जब डिमांड बहुत ज्यादा थी और सप्लाई कम. दलितों को समझ आ गया कि अंबेडकर की मूर्ति सिर्फ मूर्ति नहीं उनकी ताकत की पहली जमीनी और स्थायी निशानी है. वहीं दलितों के उभार से परेशान तबका, कभी सवर्ण, तो कभी पिछड़ी कही जाने वाली जातियां अंबेडकर की मूर्ति या उनके व्यक्तित्व का अपमान कर दलितों को चिढ़ाने की कोशिश करती हैं. आजम खान ने भी यही किया.
2. कटियार ने दिया प्रियंका गांधी पर सेक्सिस्ट बयान
बीजेपी के एक नेता हैं. कभी अयोध्या आंदोलन के पोस्टर बॉय हुआ करते थे. अभी साइडलाइन हो रखे हैं. विनय कटियार नाम है. बजरंग दल के संस्थापक अध्यक्ष. अयोध्या से सांसद भी रहे हैं. उन्होंने आज तक न्यूज चैनल के कानपुर में हुए एक प्रोग्राम में हल्की बात कही. उनसे एंकर ने पूछा. प्रियंका गांधी के आने से कांग्रेस कितनी मजबूत होगी, उनकी चुनौती को आप किस तरह देखते हैं. कटियार बोले. प्रियंका की तस्वीर 15 साल में बहुत बदल चुकी है. अब कोई फर्क नहीं पड़ेगा. उनसे इस बोल वचन का सबब पूछा गया, तो बोले, अब जो मतलब निकालने हैं, निकाल लें. ये बहुत आसान तरीका है. किसी भी पार्टी की महिला नेता को खारिज करने का. सिर्फ उनके लुक्स पर टिप्पणी कर दो. बीजेपी के पितृ पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी भी ऐसा करते थे. इशारों में. सोनिया उन्हें राजनीतिक चुनौती देने की कोशिश कर रही थीं. तब वाजपेयी रैली में बोलते थे, लोग मुझे सुनने आते हैं और उन्हें... मगर वाजपेयी इतने पर रुक जाते थे. कटियार नहीं रुकेंगे. रुकना भी नहीं चाहिए. पार्टी में बोलने वालों की ही सुनी जा रही है शायद. मसलन, दयाशंकर सिंह. जो आज फिर बोले.
3. मायावती का जिक्र करते हुए कुत्ते का उदाहरण
बीजेपी से निकाले गए बलिया के नेता दयाशंकर सिंह आजकल जमानत पर हैं. अपनी पत्नी स्वाति सिंह के साथ घूम-घूम सभा कर रहे हैं. क्षत्रियों के तमाम बैनरों के तले. ऐसा ही एक प्रोग्राम मैनपुरी में था. वहां दयाशंकर बोले. ‘मायावती एक डरपोक, धोखेबाज और लालची औरत है. मायावती उस कुत्ते जैसी है, जो गली में जब कोई गाड़ी जाती है, तो उसके पीछे दौड़ने लगते हैं. और जैसे ही गाड़ी में ब्रेक लगता है. वो कुत्ते गाड़ी से पीछे भाग जाते हैं.’ कमाल देखिए. दयाशंकर के साथ मंच पर पत्नी स्वाति सिंह थीं. जो प्रदेश में अपनी बेइज्जती की दुहाई देते हुए मायावती और बसपा को धिक्कार रही हैं. स्वाति का धिक्कार जायज है. दयाशंकर के खिलाफ रैली में बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके समर्थकों ने बेहूदा बात की थी. बहन बेटी को पेश करने की बात. उन्हें ये शर्म न आई कि बहन मायावती के अपमान का बदला लेने की कोशिश में वो किसी और की बहन बेटी का अपमान कर रहे हैं. सपा ने दयाशंकर पर मुकदमा ठांस दिया. गिरफ्तार भी कर लिया. नसीमुद्दीन के खिलाफ अखिलेश ने कार्रवाई नहीं की. दयाशंकर स्वाति सिंह को आगे कर सिंपैथी बटोरने लगे. मगर आज फिर उन्होंने बता दिया. उस दिन जबान नहीं फिसली थी. सोच ही ऐसी है. सबकी. इस हमाम में सब कपड़े उतार पहुंचे हैं. हर दिन एक पार्टी दूसरी पार्टी को बेहूदा बातें करने में पीछे छोड़ रही है. यूपी को क्या चाहिए. बयान. जुमले. नहीं यूपी को ये चाहिए -
1. इनवर्टर से मुक्ति. बिजली कट से मुक्ति. बढ़े हुए बिलों से मुक्ति. यानी 24 घंटे बिजली 2. गुंडाराज से मुक्ति. कोई किसी के प्लॉट पर पार्टी की धौंस दे कब्जा न करे. थाने में सुनवाई हो. रोड पर रेप न हों. 3. सड़कों की शुद्धि. अभी सड़क बनती है और पहली धुलाई में ही साफ हो जाती है. पुलिया नियम से धसकती है. मौरंग से भरे ट्रक सड़कों में रेल की पटरी बिछा देते हैं. 4. दलालों से मुक्ति. कहते हैं कि यूपी में हर चीज का रेट फिक्स है. मास्टर से लेकर दरोगा तक का. हर तरह की भर्ती में धांधली की शिकायत आती है. कभी जांच बैठती है तो कभी कोर्ट दखल देता है.
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