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अन्नामलाई बीजेपी में खुश नहीं? पीएम मोदी का वेलकम करने तक नहीं गए?

तमिलनाडु में बीजेपी के सबसे आक्रमक नेताओं में शामिल अन्नामलाई उस लिस्ट में शामिल थे, जिन्हें पीएम मोदी का स्वागत करने जाना था.

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अन्नामलाई (बायें) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करने एयरपोर्ट नहीं गए. (फोटो- India Today)

तमिलनाडु चुनावों के बीच 29 मार्च को कोयंबटूर दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करने के लिए बीजेपी और एनडीए के सारे दिग्गज नेता जुटे थे. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नयनार नागेंद्रन के साथ एल मुरुगन, वनथी श्रीनिवासन, साथी पार्टी AIADMK के नेता एसपी वेलुमणि और इंडिया जननायगा काची के प्रमुख टीआर पारिवेंधर भी एयरपोर्ट गए थे. लेकिन इस भारी-भरकम जुटान को सिर्फ एक ‘चेहरे’ के न होने ने बेहद ‘हल्का’ कर दिया था. कहते हैं न, कभी-कभी जो अनुपस्थित होता है, वही लोगों की बातों में सबसे ज्यादा उपस्थित होता है. इस अगवानी में एकदम वही हुआ. जो अनुपस्थित थे वो थे- भाजपा के अभी वाले से ठीक पहले वाले प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई. 

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टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु में बीजेपी के सबसे आक्रमक नेताओं में शामिल अन्नामलाई उस लिस्ट में शामिल थे, जिन्हें पीएम मोदी का स्वागत करने जाना था. फिर भी वो एयरपोर्ट नहीं गए. इसके बाद उन अफवाहों को और बल मिला जिनमें कहा जा रहा था कि बीजेपी के सबसे फायर ब्रांड नेता की पार्टी से बन नहीं रही है. ये घटना अन्नामलाई के उस फैसले के कुछ दिनों बाद ही हुई, जिसमें उन्होंने साफ ऐलान किया था कि वो विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. 

पार्टी के सूत्र दबी जुबान से कहते तो हैं कि काफी समय से अन्नामलाई को पार्टी दरकिनार कर रही थी, लेकिन खुलकर इस बात को कहने वाला कोई नहीं है. अन्नामलाई भी सिर्फ पद छोड़ने और चुनाव न लड़ने जैसे ‘विद्रोही’ कदम उठाने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं. 

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अनबन नई नहीं

हालांकि, बीजेपी से अन्नामलाई की ये अनबन नई नहीं है. तमिलनाडु के पुलिसिया महकमे में कभी ‘सिंघम’ कहे जाने वाले अन्नामलाई की कहानी बीजेपी में जिस धूमधाम से शुरू हुई थी, वह हमेशा उसी तरह नहीं रही. इसमें कई उतार-चढ़ाव आए. लेकिन साल 2025 में बीजेपी ने जब AIADMK से फिर से दोस्ती गांठी, तभी से अन्नामलाई के दिन ढलने शुरू हो गए.

कौन हैं अन्नामलाई?

तमिलनाडु के करूर में एक किसान परिवार में जन्मे अन्नामलाई ने कोयंबटूर के पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से पढ़ाई की. इसके बाद वो लखनऊ के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM लखनऊ) से भी पढ़े. साल 2011 में उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा पास की और भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हो गए. यहां एक दशक तक सेवा देने के बाद उन्होंने मार्च 2019 में बेंगलुरु (दक्षिणी) के पुलिस उपायुक्त पद से इस्तीफा दे दिया. कारण बताया कि परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं.

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लेकिन, प्लान तो कुछ और था. अगले ही साल यानी 2020 में वो बीजेपी में शामिल हो गए. एक साल बाद ही 2021 में लंबी छलांग लगाते हुए वह तमिलनाडु में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बना दिए गए. ये वो समय था जब अन्नामलाई अपने पॉलिटिकल करियर में सातवें आसमान पर थे. उन्होंने तमिलनाडु में बीजेपी का तेवर बदला. अपनी आक्रामक शैली और ‘अतरंगे’ विरोध प्रदर्शनों से पार्टी को लगातार चर्चा और सुर्खियों में बनाए रखा. 

दिसंबर 2024 में अन्ना विश्वविद्यालय में एक छात्रा के साथ रेप हुआ था. अन्नामलाई इस घटना को लेकर DMK सरकार के खिलाफ विरोध करने उतर गए. इस दौरान विरोध के तौर पर पब्लिक के सामने उन्होंने अपने आपको 6 बार कोड़े मारे. DMK सरकार के खिलाफ उनकी भड़ास इस दौरान काफी तीखे तरीके से निकलती थी. फरवरी 2025 में उन्होंने DMK के दफ्तर अन्ना अरिवलयम की ईंट-ईंट गिराने की धमकी दी. उन्होंने एमके स्टालिन सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए DMK फाइल्स भी जारी कीं. 

तमिलनाडु में उनकी एग्रेसिव पॉलिटिक्स का स्टाइल किसी को पसंद हो या न हो लेकिन राज्य के कई हिस्सों में उन्होंने बीजेपी का जनाधार मजबूत करने का काम तो किया, ये बात सब मानते हैं. तमिलनाडु में जहां बीजेपी का नाम क्षेत्रीय सहयोगियों के बिना कोई नहीं लेता था, वहां अन्नामलाई के प्रदेश अध्यक्ष रहते बीजीपी स्वतंत्र तौर पर खबरों में छाई रही.

DMK ही नहीं, भाजपा की सहयोगी पार्टी अन्नाद्रमुक को भी अन्नामलाई ने नहीं छोड़ा. उन्होंने AIADMK के कई पूर्व नेताओं पर ऐसी तीखी टिप्पणियां कीं कि बीजेपी की ‘दोस्त पार्टी’ असहज हो गई. अन्नामलाई ने सितंबर 2023 में मदुरै में एक कार्यक्रम में कहा कि ‘पूर्व सीएम अन्नादुराई ने 1956 में मदुरै में एक कार्यक्रम में हिंदू धर्म का अपमान किया था. इसके बाद स्वतंत्रता सेनानी पसुम्पोन मुथुरामलिंगा थेवर ने इसका कड़ा विरोध किया और बाद में विरोध बढ़ने पर अन्नादुरै को माफी मांगनी पड़ी और मदुरै से भागना पड़ा.'

अन्नामलाई ने अपने राजनीतिक करियर में कई विवादास्पद बयान दिए लेकिन इस बयान ने उनके राजनीतिक जीवन के हालात और जज्बात दोनों बदलकर रख दिए. एआईएडीएम अपने ‘आदर्श और देवतुल्य’ नेताओं के कथित अपमान को बर्दाश्त नहीं कर पाई. उसने पार्टी की मीटिंग में एक प्रस्ताव लाकर भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया. वजह बताई कि बीजेपी का प्रदेश नेतृत्व लगातार उनके दिवंगत नेताओं पर विवादित टिप्पणियां कर रहा है. 

AIADMK से टूटी दोस्ती

तमिलनाडु के अपने सबसे खास ‘दोस्त’ से रिश्ता टूटने के बाद बीजेपी का आलाकमान एक्टिव हुआ. फिर से दिल मिलाने की कोशिश शुरू हुई. अमित शाह की पार्टी नेताओं से बातचीत शुरू हुई. अन्नामलाई को पहली बार तभी आभास हो गया होगा कि चीजें हाथ से निकलने वाली हैं. तभी तो 18 मार्च 2023 को तत्कालीन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में अन्नामलाई ने कहा कि अगर बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनावों में अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन जारी रखती है तो वह अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देंगे. ये बयान तब दिया गया था जब पार्टी का आलाकमान, खासकर अमित शाह AIADMK से बातचीत कर रहे थे. इसकी शिकायत ऊपर तक गई. 

इसके बाद आता है अप्रैल 2025. बीजेपी और AIADMK का फिर से गठबंधन हो गया लेकिन इस बार पार्टी के प्रमुख पलानीस्वामी ने बीजेपी से एक ‘बलिदान’ मांगा था. ये बलिदान अन्नामलाई का था. कहते हैं कि बीजेपी से वापस गठबंधन इसी शर्त पर हुआ कि वो प्रदेश की कमान अन्नामलाई से छीन लेगी. हुआ भी यही. बीजेपी ने अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया. उनकी जगह नयनार नागेंद्रन प्रदेश प्रमुख बनाए गए. 

पार्टी ने इसका कारण बताया कि गठबंधन के जातिगत समीकरण की वजह से नागेंद्रन को लाया गया है. अन्नामलाई को सजा नहीं दी गई है. कहा गया कि अगर दोनों पार्टियां 2026 का चुनाव साथ लड़ती हैं तो बीजेपी नहीं चाहती कि दोनों पार्टियों का प्रमुख चेहरा गौंडर समुदाय से हो. अन्नामलाई की तरह AIADMK प्रमुख एडप्पाडी के पलानीस्वामी भी शक्तिशाली पिछड़े समुदाय से आते हैं. हालांकि, लोग यही मानते रहे कि AIADMK के अन्नामलाई को प्रदेश प्रमुख से हटाने की मांग पर अड़ जाने की वजह से उनकी इस पद से विदाई हुई.

राज्य की दोनों द्रविड़ पार्टियों से सीधे टक्कर लेने वाले अन्नामलाई AIADMK को लेकर बीजेपी नेतृत्व की नरमी से पिनके रहे. इसी बीच विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने उन्हें 6 विधानसभाओं का चुनाव प्रभार सौंपा था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद 3 फरवरी 2026 को उन्होंने ये जिम्मेदारी छोड़ दी. उन्होंने अपने पिता की खराब सेहत का हवाला दिया और कहा कि वो ज्यादा यात्रा नहीं कर सकते. इसलिए ये जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा पाएंगे. 

अन्नामलाई के इस्तीफे से लोग चौंक गए. ये बातें चलने लगीं कि पूर्व बीजेपी प्रमुख को सिर्फ 6 विधानसभा सीटों तक सीमित कर दिए जाने से अन्नामलाई पार्टी से खफा थे. डेक्कन हेराल्ड से बातचीत में एक बीजेपी नेता ने कहा भी कि सिर्फ 6 विधानसभा सीटों पर चुनाव की देखरेख का जिम्मा उन्हें सौंपना उचित नहीं था. उनका इस्तेमाल पूरे राज्य में व्यापक रूप से किया जाना चाहिए था. 

इसी बीच अन्नामलाई की नाराजगी में आग में घी काम काम किया एनडीए के सीट बंटवारे ने. 

इसमें AIADMK को 234 सीटों में से 169 सीटें दी गईं और बीजेपी को मिलीं 27 सीटें. गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों में पीएमके को 18 और एएमएमके को 11 सीटें मिलीं. अन्नामलाई इस सीट बंटवारे से एकदम बिफर गए. नाराजगी इतनी तगड़ी थी कि उन्होंने पार्टी आलाकमान को पत्र लिखा. कहा कि सीट बंटवारे में बीजेपी को जो हिस्सा मिला है, वो काफी टेंशन वाली बात है. अन्नामलाई इस बात से ज्यादा खफा थे कि जिन सीटों पर बीजेपी के जीतने के आसार थे, वो उसे नहीं मिले.    

द फेडरल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अन्नामलाई के करीबी सूत्रों ने बताया कि कोयंबटूर दक्षिण सीट से अन्नामलाई के कट्टर प्रतिद्वंद्वी सेंथिल बालाजी DMK के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले हैं. इस सीट पर अन्नामलाई के चुनाव लड़ने की चर्चा चल रही थी. इससे दोनों के बीच एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले का सीन होने वाला था. लेकिन इसी बीच अन्नामलाई ने 27 मार्च 2026 को ऐलान कर दिया कि वो चुनाव ही नहीं लड़ेंगे. ऊपर से पीएम मोदी की अगवानी करने के लिए लिस्ट में नाम होने के बावजूद वो नहीं गए. ऐसे में इस सीट पर उनके उतरने की संभावना और क्षीण हो गई है. 

हालांकि, बीजेपी के लोग अन्नामलाई के नाराज होने के दावे को खारिज कर रहे हैं. पार्टी की नेता वनथी श्रीनिवासन का कहना है कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है. वो सब लोग अन्नामलाई के साथ हैं. वो उनके 'प्रिय भाई' हैं.

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