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बंगाल चुनाव: 50 मतुआ परिवार BJP छोड़ TMC में शामिल, वजह SIR है

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में बड़ी संख्या में नाम काटे गए हैं. राज्य के बगदाह जिले में वोट काटे जाने से नाराज मतुआ समुदाय के लगभग 50 परिवारों ने तृणमूल कांग्रेस जॉइन कर ली है. ये सभी बीजेपी समर्थक थे. मतुआ समुदाय के बड़े हिस्से ने पिछले चुनावों में बीजेपी का समर्थन किया है.

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SIR प्रक्रिया में वोट कटने से मतुआ समुदाय में भारी नाराजगी है. (इंडिया टुडे)

पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर बवाल मचा हुआ है. 60 लाख से ज्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं. इसको लेकर तृणमूल कांग्रेस तो परेशान है ही, बीजेपी के लिए भी मुश्किलें कम नहीं हैं. वोटर लिस्ट से नाम कटने को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी मतुआ समुदाय में है. यह समुदाय पिछले एक दशक में बीजेपी के पारंपरिक वोटर के तौर पर उभरा है.

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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर 24 परगना जिले के बगदाह विधानसभा के बोयरा ग्राम पंचायत में बीजेपी समर्थित लगभग 50 परिवार तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए. इन्होंने नाराजगी का कारण वोटर लिस्ट से नाम हटाया जाना बताया है. बोयरा पंचायत के मोंडोपघाटा गांव के बूथ नंबर 127 पर पहले 47 नामों को ‘अंडर एडज्यूडिकेशन’ (विचाराधीन) के तौर पर चिह्नित किया गया था. बाद में उनका नाम लिस्ट से हटा दिया गया. 

मतुआ समुदाय के स्थानीय निवासी आशुतोष बिस्वास ने बताया, 

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मेरा नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है. मुझे वृद्धा पेंशन मिलती है. मुझे डर है कि अगर मैं रजिस्टर्ड वोटर नहीं रहा तो पेंशन भी बंद हो सकती है.

एक और स्थानीय निवासी मोती साधक ने बताया कि उनके परिवार के पांच सदस्यों का नाम पहले ही लिस्ट से हटा दिया गया था. अब उनका नाम भी कट गया है. मतुआ आबादी के प्रभाव वाले इलाकों में काफी बड़ी संख्या में वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए हैं. प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, सप्लिमेंट्री लिस्ट में बगदा विधानसभा क्षेत्र से 1,993, गाइघाटा से 2,240, बोंगांव उत्तर से 264 और बोगांव दक्षिण से 66 नाम हटाए गए हैं. इन नामों में 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग मतुआ समुदाय के शरणार्थी हैं.

इससे पहले बगदाह में फाइनल लिस्ट से 15 हजार 303 नाम हटा दिए गए थे. इनमें से 13 हजार से ज्यादा वोटर्स को विचाराधीन की कैटेगरी में रखा गया था. लेकिन अब इनमें से बड़ी संख्या में लोगों का नाम पूरी तरह से कट गया है. स्थानीय निवासी अंबिक बिस्वास ने बताया,

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मेरे माता पिता और दादी साल 2002 से वोटर करते आ रहे हैं. मेरी पढ़ाई-लिखाई भी यहीं हुई है. फिर भी हमारे नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं.

तृणमूल कांग्रेस की बगदाह यूनिट की सीनियर नेता ममताबाला ठाकुर ने दल-बदल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन लोगों के जुड़ने से इलाके में पार्टी का संगठन मजबूत हुआ है. वहीं बीजेपी के जिला संगठन के अध्यक्ष बिकाश घोष ने इस घटना पर कहा, 

कुछ लोग दबाव में आकर तृणमूल जॉइन कर लिए हैं. लेकिन फिर भी यह इलाका बीजेपी का गढ़ बना हुआ है.

बीजेपी के गढ़ पर मंडरा रहा खतरा

बंगाल के जिन 10 विधानसभा सीटों में सबसे ज्यादा लोगों के नाम काटे गए हैं, उनमें से नौ सीटें साल 2021 के चुनाव में बीजेपी ने जीती थीं. ये सीटें हैं : डाबग्राम-फुलबारी (16, 491 वोट), बागदा (15,303 वोट), शांतिपुर (8,048 वोट), बनगांव उत्तर (7,926 वोट), राणाघाट दक्षिण (7,126 वोट), राणाघाट उत्तर पूर्व (6,404 वोट), राणाघाट उत्तर पश्चिम (6,704 वोट), चकदाहा (5,864 वोट), हाबरा (5,864 वोट) और सिलीगुड़ी (5, 240 वोट)

इनमें से केवल हाबरा सीट पर तृणमूल कांग्रेस जीती थी. वहीं बाकी नौ सीटों पर जीत दर्ज कर बीजेपी ने दक्षिण बंगाल, नदिया और उत्तर 24 परगना में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई. लेकिन उपचुनाव में पार्टी बागदा और शांतिपुर की सीट हार गई. वहीं राणाघाट दक्षिण से बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले मुकुट मणि अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस जॉइन कर लिया. इन झटकों के बावजूद बीजेपी लोकसभा चुनाव 2024 में अपना किला बचाने में कामयाब रही. पार्टी को संसदीय चुनाव में इन सभी विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल हुई.

इन 10 सीटों में से 7 सीटों पर मतुआ वोटर्स निर्णायक भूमिका में हैं. ये समुदाय पिछले एक दशक में बीजेपी का सबसे भरोसेमंद वोट बैंक बनकर उभरा है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव से इस इलाके में बीजेपी का उभार मतुआ समुदाय के समर्थन से ही हुआ है. ऐसे में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर फैला रायता बीजेपी का खेल खराब कर सकता है.

कौन हैं मतुआ?

मतुआ बंगाल का प्रमुख अनुसूचित जाति समुदाय है. इस समुदाय के लोग मूल रूप से पूर्वी पाकिस्तान और बाद में बांग्लादेश से आए हुए शरणार्थी हैं. साल 1947 और 1971 में ये बड़ी संख्या में पलायन करके बंगाल के उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, नदिया और उत्तर बंगाल के कई इलाकों में बस गए. अनुमानों के मुताबिक, इनकी आबादी लगभग दो करोड़ है. मतुआ समदुया कम से कम राज्य की 30 विधानसभा सीटों और 11 लोकसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाती है. 

वीडियो: बंगाल चुनाव: मतुआ समुदाय के गढ़ ठाकुरनगर में किसका दबदबा, मोदी या ममता?

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