कोई अगर अपनी खरीदी जमीन पर मस्जिद बना रहा है, तो क्या राज्य सरकार उसे ये कहकर सील कर सकती है कि उसे बनाने के लिए पहले से परमिशन नहीं ली गई थी? इलाहाबाद हाई कोर्ट में ऐसा ही एक मामला पहुंचा है. मुजफ्फरनगर के रहने वाले अहसान अली ने एक रिट दाखिल की है. अपनी जमीन पर वो एक मस्जिद बना रहे थे, जिसे प्रशासन ने ये कहते हुए सील कर दिया कि इसे बनाने की परमिशन नहीं ली गई थी. अली का आरोप है कि प्रॉपर्टी सील करने से पहले प्रशासन ने न तो उन्हें कोई नोटिस दिया और न ही उनका पक्ष सुना.
'अपनी जमीन पर मस्जिद बनाना गैर-कानूनी कैसे?' HC ने यूपी सरकार से मांगा जवाब
अहसान अली ने कोर्ट से मांग की है कि उनकी सील की संपत्ति को खोला जाए और उस पर नमाज अदा करने की इजाजत दी जाए.


लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने इसी मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से ये साफ करने को कहा कि किस कानूनी अधिकार के तहत उसने एक पूजा करने वाली जगह को सील किया है? बेंच ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से तीन सवाल किए हैं.
– पहला ये कि किस कानून के हिसाब से किसी पूजा करने वाली जगह को सील किया जा सकता है?
– दूसरा, अगर कोई अपनी जमीन पर पूूजा-पाठ या इबादत की जगह बना रहा है तो क्या इसके लिए शासन से इजाजत लेना जरूरी है?
– तीसरा, क्या बिना नोटिस के या अपनी बात रखने का मौका दिए बगैर किसी बन रहे धार्मिक स्थल को सील करने का कोई कानूनी आधार है?
बेंच ने कहा कि इन तीनों सवालों का जवाब योगी सरकार शपथ पत्र के साथ कोर्ट में पेश करे.
TOI की रिपोर्ट के अनुसार, एहसान अली ने बताया कि वो मुजफ्फरनगर के भोपा गांव में एक जमीन के मालिक हैं. उन्होंने यह जमीन 2019 में प्रवीण कुमार जैन नाम के एक स्थानीय निवासी से खरीदी थी. खरीद की सारी कानूनी कवायद भी उन्होंने पूरी की. वह उस पर एक मस्जिद बना रहे थे, जिसके लिए पैसा जुटाने का काम चल रहा था. उनका आरोप है कि जब उन्होंने अपने प्लॉट के चारों ओर दीवार खड़ी करना शुरू किया तो अधिकारियों ने उनकी जमीन को सील कर दिया. अधिकारियों ने इसकी वजह बताई कि ये निर्माण गैर-कानूनी है. इसे बनाने के लिए पहले से कोई परमिशन नहीं ली गई थी.
एहसान अली के वकील ने कोर्ट को बताया कि प्रॉपर्टी को सील करने से पहले उनके क्लाइंट को न तो कोई नोटिस दिया और न सुनवाई का ही मौका दिया गया. उन्होंने कोर्ट से मांग की कि सील की गई प्रॉपर्टी को खोला जाए. वहां मस्जिद बनाने की परमिशन दी जाए. साथ ही वहां पर नमाज अदा करने की इजाजत भी दी जाए.
हाई कोर्ट अब इस मामले को 31 मार्च को सुनेगा.
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