The Lallantop

तेजस्वी-तेज प्रताप के झगड़े में सलाह देने आए 'बड़े भाई'

क्या इस झगड़े की वजह से बिहार में आरजेडी को नुकसान होगा?

Advertisement
post-main-image
तेजस्वी की गैरमौजूदगी में तेज प्रताप पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच नज़र आए थे.
अब ये तो तय है कि लालू यादव के दोनों बेटों तेजस्वी और तेज प्रताप के बीच सबकुछ ठीक नहीं है. यही वजह है कि तेज प्रताप ने तेजस्वी से बगावत करके एक नए मोर्चे का ऐलान कर दिया है और उसका नाम रखा है लालू-राबड़ी मोर्चा. तेज प्रताप का दावा है कि वो इस मोर्चे के बैनर तले बिहार में 20 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. लेकिन अब इन दोनों भाइयों की लड़ाई के बीच एक तीसरे भाई भी आ गए हैं. और ये तीसरे भाई हैं लोक जनशक्ति पार्टी के मुखिया राम विलास पासवान के बेटे चिराग पासवान.
लोजपा सांसद चिराग पासवान का कहना है कि तेज प्रताप और तेजस्वी उनके छोटे भाई जैसे हैं.
लोजपा सांसद चिराग पासवान का कहना है कि तेज प्रताप और तेजस्वी उनके छोटे भाई जैसे हैं.

चिराग पासवान का कहना है कि तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच की लड़ाई इस बात की है कि पार्टी की बागडोर कौन संभालेगा, पार्टी में वर्चस्व किसका होगा? चिराग ने कहा है कि वो तेज प्रताप और तेजस्वी दोनों को अपना छोटा भाई मानते हैं और इसी वजह से दोनों की लड़ाई को लेकर वो परेशान हैं. चिराग ने कहा है कि अगर एक ही परिवार के दो सदस्य अलग-अलग राह चुन लेंगे तो पार्टी का नुकसान तय है. इसलिए पारिवारिक मतभेद को राजनीतिक मतभेद की वजह नहीं बनने देना चाहिए.
चिराग ने भी झेले हैं पारिवारिक मतभेद
चिराग पासवान और रामविलास पासवान के खिलाफ कभी-कभी आवाज उठाती रहती हैं आशा पासवान.
चिराग पासवान और रामविलास पासवान के खिलाफ कभी-कभी आवाज उठाती रहती हैं आशा पासवान.

राम विलास पासवान ने दो शादियां की हैं. उनकी पहली शादी 1960 में राजकुमारी देवी से हुई थी. दोनों की दो बेटियां हैं जिनका नाम है आशा पासवान और ऊषा पासवान. बाद में राम विलास अपनी पहली पत्नी से अलग हो गए. 1983 में उन्होंने दूसरी शादी रीना से की. इन दोनों के ही बेटे हैं चिराग पासवान. उन्हें राम विलास पासवान का उत्तराधिकारी माना जा रहा है. हालांकि वक्त-वक्त पर आशा पासवान अपने पिता और भाई को चुनौती देती रहती हैं. लेकिन राम विलास पासवान चिराग के साथ लगातार खड़े हैं. ऐसे में चिराग को घर से किसी तरह के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा था.
तेजस्वी और तेज प्रताप में शुरू से ही रहा छत्तीस का आंकड़ा!
साल 2015 में तेज प्रताप और तेजस्वी दोनों ने एक साथ पलिटिकल करियर शुरू किया था.
साल 2015 में तेज प्रताप और तेजस्वी दोनों ने एक साथ पलिटिकल करियर शुरू किया था.

लालू यादव के बाद उनकी पत्नी राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री बनीं. लालू ने अपनी बेटी मीसा भारती को भी लोकसभा चुनाव में उतारा, लेकिन मीसा हार गईं. उन्हें राज्यसभा में भेज दिया गया. मीसा के बाद लालू यादव ने अपने दोनों बेटों को भी पॉलिटिक्स में लॉन्च किया. लालू के दो बेटे हैं. तेज प्रताप बड़े हैं और तेजस्वी छोटे. तेज प्रताप धर्म-कर्म और अध्यात्म में रमे रहते थे तो तेजस्वी क्रिकेट में. लेकिन दोनों का पलिटिकल करियर एक साथ शुरू हुआ. पिता लालू प्रसाद यादव ने दोनों को 2015 के विधानसभा चुनाव में एक साथ लॉन्च किया था. तब लालू और नीतीश कुमार एक साथ थे और विधानसभा का चुनाव लड़ रहे थे. नतीजे आए थे तो तेज प्रताप और तेजस्वी दोनों ही जीत गए थे, लेकिन तेज प्रताप की जीत का अंतर तेजस्वी से ज्यादा था. चुनाव में आरजेडी को 80, जेडीयू को 71 और कांग्रेस को 21 सीटें मिली थीं. तय हुआ था कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनेंगे. लालू यादव के कोटे से कुल 12 लोग मंत्री बनेंगे.
तेज प्रताप बने मंत्री, तेजस्वी बने उपमुख्यमंत्री
चुनाव जीतने के बाद तेज प्रताप मंत्री बने, जबकि तेजस्वी सीधे उपमुख्यमंत्री बने.
चुनाव जीतने के बाद तेज प्रताप मंत्री बने, जबकि तेजस्वी सीधे उपमुख्यमंत्री बने.

जब मंत्री बनने की बारी आई तो लालू यादव ने तेजस्वी और तेज प्रताप दोनों को मंत्री बनवाया. तेज प्रताप तो स्वास्थ्य और पर्यावरण मंत्री ही बने, लेकिन तेजस्वी को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया गया. ये पहला वाकया था, जब तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच की दूरियां बढ़ती दिखीं. इसके करीब 20 महीने बाद नीतीश कुमार ने 26 जुलाई, 2017 को गठनबंधन से अलग होने का ऐलान किया और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. सरकार गिर गई. बीजेपी के सहयोग से नीतीश तो एक बार फिर से मुख्यमंत्री बन गए, लेकिन तेजस्वी और तेज प्रताप सत्ता से बाहर हो गए. अब जब नेता प्रतिपक्ष चुनने की बारी आई तो पार्टी ने तेज प्रताप की जगह तेजस्वी को नेता प्रतिपक्ष चुना. तेज प्रताप यादव के लिए ये दूसरा झटका था.
तेज प्रताप ने की शादी और बढ़ गई दरार
तेज प्रताप की शादी के बाद चीजें और ज्यादा खराब हो गईं.
तेज प्रताप की शादी के बाद चीजें और ज्यादा खराब हो गईं.

12 मई, 2018 को तेज प्रताप और ऐश्वर्या की शादी हुई. ऐश्वर्या राष्ट्रीय जनता दल के नेता चंद्रिका राय की बेटी हैं और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे दरोगा राय की बेटी हैं. खुद लालू दरोगा राय को अपना गुरु मानते रहे हैं. तेज प्रताप की शादी छह महीने तक तो ठीक चली, लेकिन इसके बाद नवंबर में तेज प्रताप ने कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी. उन्होंने पत्नी ऐश्वर्या पर आरोप लगाए कि वो दोनों भाइयों के बीच दरार डालना चाहती हैं और अब मैं ऐश्वर्या के साथ नहीं रह सकता हूं. जब परिवार की ओर से तेज प्रताप को समझाने की कोशिश की गई तो वो भड़क गए और बोले कि अब मेरे परिवार के लोग भी ऐश्वर्या का ही साथ दे रहे हैं. इन परिवारवालों में एक नाम तेज प्रताप के छोटे भाई तेजस्वी का भी था. ये तीसरा मौका था, जब तेजस्वी तेज प्रताप पर भारी पड़ रहे थे.
टिकट बंटवारे में नहीं चली तो बना ली नई पार्टी
तेज प्रताप की नाराजगी तब और बढ़ गई, जब आरजेडी ने उनके ससुर चंद्रिका राय को सारण से उम्मीदवार बना दिया.
तेज प्रताप की नाराजगी तब और बढ़ गई, जब आरजेडी ने उनके ससुर चंद्रिका राय को सारण से उम्मीदवार बना दिया.

2019 का लोकसभा चुनाव तेजप्रताप यादव के गुस्से का चरम बना. तेज प्रताप चाहते थे कि बिहार की 40 में से दो सीटों पर उनके कार्यकर्ता उतरें. ये दो सीटें थीं जहानाबाद और शिवहर. तेज प्रताप ने तेजस्वी के अलावा लालू यादव से भी बात की थी. तेजस्वी ने उन्हें वादा भी किया था. लेकिन तेजस्वी ने वादा नहीं निभाया. उन्होंने जहानाबाद और शिवहर में तेज प्रताप के नहीं, अपने कैंडिडेट उतार दिए. इससे तेज प्रताप नाराज हो गए. रही सही कसर सारण की सीट ने पूरी कर दी, जिससे कभी लालू यादव सांसद हुआ करते थे. तेजस्वी ने सारण की ये सीट तेज प्रताप के ससुर चंद्रिका राय को दे दी और यहीं से तेज प्रताप भड़क गए. पहले तो उन्हें जहानाबाद और शिवहर ही चाहिए था, लेकिन जब सारण की सीट से चंद्रिका राय के नाम का ऐलान हो गया तो तेज प्रताप ने अलग मोर्चा बना लिया. उन्होंने साफ कर दिया कि अब सारण सीट से या तो उनकी मां राबड़ी देवी लड़ेंगी या फिर वो खुद निर्दलीय लड़ेंगे और जीतेंगे.
लालू के दोनों ही बेटों ने एक साथ अपना पलिटिकल करियर शुरू किया. छोटे बेटे के हाथ में पार्टी की इतनी ताकत है कि वो गठबंधन से लेकर उम्मीदवारों तक के नाम का ऐलान कर रहा है. वहीं बड़े बेटे के पास इतनी भी ताकत नहीं है कि वो अपने कार्यकर्ताओं को महज दो सीटें दिला सके. और इसका बड़ा खामियाजा पार्टी को चुनाव में उठाना पड़ सकता है.

लालू और तेजस्वी से नाराज तेजप्रताप ने लालू-राबड़ी मोर्चा बनाया है

Advertisement

Advertisement
Advertisement