अखिलेश यादव और अक्षय यादव.
मैंने अपने गांव में कई लड़ाई-झगड़े देखे हैं. घरेलू भी देखे हैं, जिनमें बर्तन अलग किए जाते हैं. और सामान को लेकर झगड़ते हुए भी देखा है. देखा ये भी है कि जबरदस्ती निकाल कर ताला लगा दिया जाता है और सामान उठाकर फ़ेंक दिया जाता है. हो सकता है ऐसा झगड़ा आपने भी देखा हो, न देखा हो तो एकता कपूर के ड्रामे में तो देखा ही होगा. लेकिन मैं हमेशा ये ही सोचता रहा हूं कि नेता या एक्टर के घर में ऐसे झगड़े नहीं होते होंगे. उनके झगड़े तो बड़े ही वीआईपी टाइप होते होंगे. मगर मेरे इस भ्रम को एक चिट्ठी ने तोड़ दिया. इस चिट्ठी को लिखा है रामगोपाल के बेटे अक्षय यादव ने. इस चिट्ठी का सच तो वो ही जानें. मगर आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि समाजवादी कुनबे में तल्खी किस कदर बढ़ गई है कि सामान फ़ेंक देने के किस्से सरे आम होने लगे. जब बंटवारा होता है तो कहा जाता है कि मेरा कैलेंडर रह गया. मेरी बाल्टी रह गई. मेरी खाट दो. मेरा चूल्हा दो. और जिसके हिस्से में वो सामान होता है, उनमें से कुछ लोग ऐसे होते हैं कि वो उठाकर नहीं देते, बल्कि फ़ेंक देते हैं. ऐसा ही हुआ है मुलायम सिंह के कुनबे में. रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव फिरोजाबाद से लोकसभा सांसद हैं. उन्होंने एक चिट्ठी लिखी. जिसमें लिखा कि किस तरह शिवपाल सिंह ने अखिलेश यादव का सामान एक कमरे से उठाकर फ़ेंक दिया था. उन्होंने लिखा कि जब अखिलेश यादव अपने नए मकान में शिफ्ट हुए तो उनके साथ इतना बुरा बर्ताव किया गया कि उनका कुछ सामान पुराने घर में रह गया था, तब उनका सामान कमरे से निकलवाकर फिकवा दिया और कमरे का ताला लगाकर वो (शिवपाल) विदेश चले गए.

अक्षय यादव ने शिवपाल पर इल्जाम लगाया, 'वो हमेशा अखिलेश यादव के खिलाफ रहे और उनके खिलाफ साजिश करते रहे. वो खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे. मेरे पास इस बात के सबूत हैं कि मुझे हरवाने की कोशिश की गई. और जब मैं जीत गया तो मेरे इलाके में शिवपाल सिंह ने काम नहीं होने दिया. वो तो अखिलेश यादव ने खुद घोषणा की तब काम हो सके.'
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