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पीएम मोदी के हिंदी भाषण में भी टेलिप्रॉम्प्टर का रहना एक अच्छी बात है

लालू प्रसाद यादव की तीखी बात के बाद भी नरेंद्र मोदी ने इसे जारी रखा. अब अखिलेश ने भी चुटकी ली है.

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मेरठ में विजय संकल्प रैली के दौरान पीएम मोदी. लाल घरे में टेलीप्रॉम्प्टर.
लोकसभा चुनाव का मैदान सज गया है. सारे राजनैतिक दल और नेता पूरी ताकत से चुनावी मैदान में उतर गए हैं. प्रचार प्रसार जोरों पर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को मेरठ में विजय संकल्प रैली को संबोधित किया. इस रैली में उन्होंने सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन को एक नया नाम दिया. सराब. स से सपा. रा से रालोद और ब से बसपा. पीएम ने कहा कि इनसे बचने की जरूरत है क्योंकि ये सेहत के लिए हानिकारक है. प्रधानमंत्री के इस टिप्पणी पर दूसरी तरफ से भी तुरंत प्रतिक्रिया आई. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जवाबी हमला किया. हथियार बनाया टेलिप्रॉम्प्टर को. कहा, आज टेलिप्रॉम्प्टर ने यह पोल खोल दी कि सराब और शराब का अंतर वह लोग नहीं जानते जो नफ़रत के नशे को बढ़ावा देते हैं. टेलिप्रॉम्प्टर क्या होता है?  आपने न्यूज पढ़ते ऐंकर्स को देखा होगा, वे सामने की तरफ देखते हुए धाराप्रवाह बोलते जाते हैं. ज्यादातर बिना किसी तथ्य की गलती किए. सामान्यत: देखने पर ऐसा लगता है कि ऐंकर बिना देखे पढ़ रहा है. जबकि ऐसा नहीं होता है. ऐंकर के सामने एक डिवाइस लगी होती है. जिसमें सारा लिखा दिखता रहता है. इसी टेक्स्ट को पढ़ते हुए ऐंकर बोलता है. इस डिवाइस को टेलिप्रॉम्प्टर कहते हैं. पहले लालू यादव भी उड़ा चुके हैं मजाक 3 मार्च 2019. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पटना में थे. वहां उन्होंने एनडीए की संकल्प रैली को संबोधित किया. इस रैली में भी प्रधानमंत्री ने टेलिप्रॉम्प्टर का इस्तेमाल किया था. जिसके बाद वह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के निशाने पर आ गए. उन्होंने इसे संभावित हार की घबहराहट बताते हुए ट्वीट किया. टेलिप्रॉम्प्टर देखकर पढ़ना अच्छा है पीएम मोदी की छवि बेहतरीन वक्ता की रही है. वे कई बार बिना देखे लंबे समय तक बोलते हैं. इंग्लिश में बोलने के लिए वह पहले भी टेलिप्रॉम्प्टर का इस्तेमाल करते देखे गए हैं. अब सवाल उठ रहे हैं कि उन्हें हिंदी का भाषण देते हुए टेलिप्रॉम्प्टर की जरूरत क्यों पड़ गई? पीएम अपनी रैलियों में कई बार तथ्यों को लेकर गलती कर चुके हैं. अगर भाषण देते समय टेलिप्रॉम्प्टर की मदद ली जाए, तो इसकी गलती की गुंजाइश एक तरह से खत्म हो जाती है. कई सारे विदेशी नेता भी बोलते समय टेलिप्रॉम्प्टर इस्तेमाल करते हैं. अगर प्रधानमंत्री भी टेलिप्रॉम्प्टर देखकर बोलते हैं, तो इसमें कोई गलत बात नजर नहीं आती क्योंकि भाषण में कोई गलती नहीं होगी. बशर्ते देख कर बोलते हुए भी कोई गलती न कर दें. देश के प्रधानमंत्री का कुछ भी गलत-सलत बोल देना अच्छा थोड़ी लगता है.
वीडियो देखें: मिशन शक्ति: नरेंद्र मोदी का नया पॉलिटिकल हथियार और राहुल गांधी का पलटवार

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