
केरल विधानसभा चुनाव 2021 एग्जिट पोल
लगभग सभी एग्जिट पोल (Exit Polls) में CPM के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को बढ़त दिख रही है. वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) दूसरे स्थान पर है. इसके साथ ही बीजेपी के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) को कुछ खास मिलता नजर नहीं आ रहा है.
इंडिया टुडे माई एक्सिस पोल ने LDF को 104 से 120, UDF को 20 से 36 और NDA को 0 से 2 सीट मिलने का अनुमान लगाया है. अगर इंडिया टुडे माई एक्सिस का पोल सही साबित हो जाता है, तो यह केरल विधानसभा के इतिहास में पहली बार होगा कि कोई पार्टी 100 सीटों का आंकड़ा पार कर जाए.
केरल विधानसभा में कुल 140 सीटें हैं. बहुमत के लिए 71 सीटों के जादुई आंकड़े की जरूरत है. 6 अप्रैल को राज्य में मतदान हुआ था. चुनाव आयोग के मुताबिक राज्य के 74.57 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाला.
गठबंधनों की अगर बात करें तो LDF यानी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट में CPM, CPI, केरल कांग्रेस(M), जनता दल (सेक्युलर), NCP, LJD, इंडियन नेशनल लीग, कांग्रेस (सेक्युलर), केरल कांग्रेस (B) और JKP जैसी कुल दस पार्टियां शामिल हैं.
वहीं UDF यानी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट में कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस, रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, नेशनलिस्ट कांग्रेस केरल, केरल कांग्रेस (J), कम्युनिस्ट मार्क्सिस्ट पार्टी और रिवॉल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया जैसे छोटे-बड़े दल शामिल हैं. नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस यानी NDA में BJP, भारत धर्म जन सेना, AIADMK, केरल कामराज कांग्रेस, JRS और डेमोक्रेटिक सोशल जस्टिस पार्टी शामिल है.
लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की ओर से राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री पिनारई विजयन को ही इस पद का चेहरा बनाया गया है. UDF और NDA की तरफ से सीएम पद के लिए किसी चेहरे की घोषणा अभी तक नहीं हुई है. हालांकि, UDF की तरफ से राज्य में मुख्य विपक्षी नेता रमेश चेन्नीथाला और NDA की ओर से केरल बीजेपी अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने चुनाव प्रचार को लीड किया. विधानसभा चुनाव 2016 और 2011 के नतीजे क्या थे? साल 2016 में LDF ने 91, UDF ने 47 और NDA ने मात्र एक सीट जीती थी. वहीं एक सीट अन्य के खाते में गई थी. LDF की तरफ से सबसे ज्यादा 58 सीटें CPM ने जीती थीं. CPI ने 19 और IND ने पांच सीटों पर बाजी मारी थी. दूसरी तरफ UDF की तरफ से कांग्रेस ने 22, IUML ने 18 और केरल कांग्रेस (M) ने 6 सीटों पर जीत हासिल की थी. NDA में मात्र बीजेपी को ही एक सीट पर जीत मिली थी.
वहीं अगर 2011 के चुनावों की बात करें तो यह केरल विधानसभा के अब तक के सबसे कांटे के टक्कर मुकाबलों में से एक रहा. 2011 में UDF ने मात्र चार सीटों से बाजी मारी थी. UDF को 72 सीटों पर जीत मिली थी, वहीं LDF ने 68 सीटों पर जीत हासिल की थी. NDA का तो नामोनिशान तक नहीं था. इस चुनाव में भी CPM सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. LDF की तरफ से CPM ने 45 और CPI ने 13 सीटों पर जीत हासिल की थी. वहीं UDF की ओर से कांग्रेस ने 38 और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने 20 सीटों पर बाजी मारी थी. पिछले लोकसभा चुनावों की स्थिति 2019 के लोकसभा चुनाव में UDF को केरल में बंपर जीत हासिल हुई. UDF ने 20 में से 19 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी. UDF की तरफ से सबसे ज्यादा 15 सीटें कांग्रेस ने जीती थीं. वहीं इंडिनय यूनाइटेड मुस्लिम लीग को दो सीटें मिलीं. LDF की तरफ से केवल CPM की एक सीट जीत पाई थी.
अगर एग्जिट पोल के अनुमान रिजल्ट में बदल जाते हैं तो यह केरल के लिए ऐतिहासिक होगा. पिछले चार दशकों में केरल में ऐसा कभी नहीं हुआ, जब सत्ताधारी पार्टी या गठबंधन अगले चुनाव में फिर से जीत गया हो.

















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