कुछ देसी मुहावरे हैं जैसे 'पीठ में छुरा भोंकना', 'जिसकी थाली में खाया उसमें छेद करना' और ज़्यादा फ़िल्मी बोले तो 'मेरी कश्ती तो वहां डूबी, जहां पानी बहुत कम था'. इन सब मुहावरों का एक ही मतलब निकलता है 'धोखा'. या तो आदमी देता है, या खाता है.
जनरल वी के सिंह ने कहा, मेरे सहयोगी ने मेरे नाम से पैसे खा लिए
अपने करीबी के इस विश्वासघात पर जनरल सोच रहे होंगे- यू टू ब्रूटस, मने तुम भी?

अब जनरल वी के सिंह कौन सा वाला मन में भुनभुना रहे होंगे ऊपरवाला जाने? होना भी चाहिए, क्योंकि इस बार जनरल साहब शिकार हो गए हैं धोखे और जालसाजी के. कोई और होता तो उतना बुरा लगता भी नहीं, उसके लिए पुलिस कानून संविधान सब हैं. लेकिन अगर अपनावाला ही डॉज दे जाए तो कोई क्या ही कर लेगा. ऐसा ही हाल है जनरल वी के सिंह का आजकल.

हाथ में बेंत बंदूक सब कुछ धरे आदमी से कोई क्यों ही जालसाजी करेगा भई
क्या है पूरा मामला:-
इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार गाज़ियाबाद के कवि नगर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है. जनरल वी के सिंह के निजी सचिव सुरजीत सिंह ने एसएसपी गाज़ियाबाद को लेटर लिख कर जालसाजी के बारे में बताया है. शिकायत है जनरल वी के सिंह के पूर्व सहायक और राजनैतिक सलाहकार डॉ. शम्भू प्रसाद के खिलाफ़. जनरल वी के सिंह के सेक्रेटरी सुरजीत सिंह की तरफ़ से प्रसाद पर कई आरोप लगाए गए हैं.
सुरजीत सिंह ने गाज़ियाबाद एसएसपी को लिखे अपने पत्र में कहा है कि, 'डॉक्टर शम्भू प्रसाद ने फर्जी तरीके से जनरल वी के सिंह के लेटरपैड का इस्तेमाल किया. कुछ फर्जी आर्थिक लेन-देन भी किया.
कौन हैं डॉक्टर शम्भू प्रसाद:-शम्भू प्रसाद पूर्व डिफेन्स कॉन्ट्रैक्टर हैं. 2014 में जब जनरल वी के सिंह लोकसभा में चुने गए तब उन्होंने प्रसाद को नियुक्त किया था. तब शम्भू प्रसाद जनरल सिंह के लोकसभा क्षेत्र से जुड़े काम देखते थे.
अब आगे क्या हो रहा है:-
आईपीसी की धारा 420 के तहत शम्भू प्रसाद पर जालसाजी के लिए पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है. कवि नगर पुलिस स्टेशन में जांच जारी है.
तो बंधु लोगों इसीलिए कहा जाता है कि मित्रता करो तो सोच समझ के तोल-मोल के.
और जाते-जाते सुनते जाइए रहीमदास का मित्रता पर कहा गया ये दोहा:-
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