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ना फ्री बिजली, ना फ्री पानी, ना हनुमान चालीसा, 2020 से कितना अलग दिल्ली का ये चुनाव?

Delhi Election 2025: Election Commission ने विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है. दिल्ली वही है, पार्टियां वहीं हैं, नेता वही हैं, मगर इस बार मुद्दे कुछ बदले-बदले से नज़र आ रहे हैं. जिन मुद्दों का शोर 2020 में था वो अब नेपथ्य में नज़र आ रहे हैं. क्या बदला इस बार और क्या हैं इस बार के मुद्दे समझने की कोशिश करते हैं.

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8 फरवरी, 2024 को दिल्ली चुनाव के नतीज़ घोषित हो जाएंगे.

दिल्ली चुनाव की तारीखों का एलान भले आज 7 जनवरी को हुआ हो, पर इसकी सरगर्मी साल बदलने से पहले ही शुरू हो गई थी. जेल से निकलने से बाद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बजाए, लोगों के बीच जाना ज्यादा मुनासिब समझा. प्रधानमंत्री मोदी भी चुनावी मैदान में उतर गए हैं. उन्होंने आम आदमी पार्टी को 'आपदा' की संज्ञा दी है. पिछले चुनाव में अपना सबसे खराब प्रदर्शन देख चुकी कांग्रेस भी इस बार चुनाव 'लड़ने' के मूड में नजर आ रही है. उसने अपने कई कद्दावर नेता इस बार मैदान में उतार दिए हैं.

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दिल्ली वही है, पार्टियां वही हैं, नेता वही हैं, मगर इस बार मुद्दे कुछ बदले-बदले से नज़र आ रहे हैं. जिन मुद्दों का शोर 2020 में था वो अब नेपथ्य में नज़र आ रहे हैं. क्या बदला इस बार और क्या हैं इस बार के मुद्दे समझने की कोशिश करते हैं.

2020 से कितना अलग है ये चुनाव?

1.सॉफ्ट हिंदुत्व
2020 का दिल्ली चुनाव अगर आप याद करें तो यह नागरिकता संशोधन कानून (CAA) बनने कुछ महीने पहले ही पास हुआ था. जिसके शाहीन बाग में महीनों लंबा धरना प्रदर्शन चला. जिसको लेकर दिल्ली में हिंदू-मुस्लिम की राजनीति देखने को मिली. बीजेपी की तरफ से कई नेताओं ने ध्रुविकरण को बढ़ावा देने वाले बयान दिए थे. जिनपर चुनाव आयोग को कार्रवाई भी करनी पड़ी थी. बीजेपी के हार्ड हिंदुत्व को काउंटर करने के लिए केजरीवाल की पार्टी को भी तिकड़म भिड़ाना पड़ा था. AAP ने हनुमान चालीसा का आयोजन कराया. केजरीवाल ने एक टीवी चैनल पर हनुमान चालीसा का पाठ भी किया. कनॉट प्लेस के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में केजरीवाल ने पूजा की. जिसका लाइव टेलिकास्ट भी हुआ.

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मगर 2025 के दिल्ली चुनाव में वैसा ध्रुवीकरण वाला चुनावी प्रचार अबतक तो सामने नहीं आया है. हालांकि, बीजेपी को काबू करने के लिए आम आदमी पार्टी सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड चलती नज़र आ रही है. केजरीवाल दिल्ली में पुजारियों और सिख ग्रंथियों के लिए हर महीने 18 हजार रुपये देने का वादा कर चुके हैं. इसके जरिए AAP खुद को हिंदुओं का हितैशी दिखाने और इमामों को सैलरी देने के बीजेपी के आरोपों से बचने की कोशिश कर रही है. दूसरी तरफ बीजेपी अवैध बांग्लादेशियों का मुद्दा उठा रही है.

2. फ्री बिजली-पानी इस बार मुद्दा नहीं
2015 चुनाव और 2020 चुनाव में आम आदमी पार्टी के पास सबसे ताकतवर हथियार था फ्री बिजली पानी का. लेकिन इस बार फ्रीबीज़ का मुद्दा गायब है. हालांकि, ये कहना गलत नहीं होगा कि फ्री-बिजली पानी को AAP कब तक घिसती, नए मुद्दे आना लाज़मी है. साथ ही केजरीवाल सक्षम लोगों से सब्सिडी छोड़ने की गुजारिश भी कर चुके हैं. इसलिए फ्रीबीज़ की जगह 'सम्मान' और 'पेंशन योजनाओं' ने ली है. केजरीवाल और कांग्रेस दोनों ने महिलाओं को सम्मान राशि देने का वादा किया है. AAP ने बुजुर्गों के लिए भी पेंशन का वादा किया है. साथ ही संजीवनी योजना के तहत केजरीवाल बुजुर्गों के लिए मुफ्त इलाज का वादा भी कर चुके हैं. पुजारियों और ग्रंथियों को सैलरी देने की बात हम ऊपर कर ही चुके हैं.माना जा रहा है कि बीजेपी भी महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं के लिए कुछ बड़े एलान कर सकती है. हाल ही में बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा था कि वह आप के वादे से 5 गुना ज्यादा दिल्लीवासियों को देने के लिए तैयार हैं.  

3. महिलाएं
दिल्ली के इस चुनाव में महिलाओं की भूमिका भी अहम हो गई है. सभी पार्टियां महिलाओं के लिए योजना का एलान कर रही है. AAP ने हर महीने 2100 रुपये तो कांग्रेस ने 2500 रुपये देने का वादा किया है. बीजेपी ने अभी तक ऐसा कोई एलान नहीं किया है, लेकिन संभावना पूरी है. सभी पार्टियों महिलाओं को लेकर ऐसे सफल प्रयोग कई राज्यों में कर चुकी हैं.

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दूसरी तरफ बीजेपी उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी ने अपने बयानों से बेवजह पार्टी को सिरदर्द और विरोधियों को मौका दे दिया है. बिधूड़ी ने पहले कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और फिर सीएम आतिशी पर आपत्तिजनक बयान दिया. बदले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बिधूड़ी के आवास के गेट पर महिला विरोधी लिख दिया और नेम प्लेट पर कालिख पोत दी. 

4. भ्रष्टाचार 
अब तक केजरीवाल जिस कटघरे में दूसरों को खड़ा करते रहे हैं, इस बार वो खुद उसी कटघरे में हैं. चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री आवास के रेनोवेशन यानी नवीकरण के खर्च पर आई CAG रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. लाखों के पर्दे, सोफे, टाइल्स, टॉयलेट, टीवी ने आम आदमी वाली छवी पर दाग लगाने का काम किया है. गृह मंत्री अमित शाह ने भी अरविंद केजरीवाल पर उनके मुख्यमंत्री रहते हुए CM आवास को 'शीशमहल' बनाने का आरोप लगाया है. इससे पहले बीजेपी नई आबकारी नीति पर AAP को घेरती रही है. इसी मामले में सीएम पद पर रहते केजरीवाल, डिप्टी सीएम पद पर रहते सिसोदिया जेल जा चुके हैं.

5. वोटर लिस्ट का मुद्दा
इस चुनाव में आम आदमी पार्टी बीजेपी पर लगातार आरोप लगा रही है कि वोटर लिस्ट में फेरबदल की जा रही है. राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी का ही नाम काट दिया गया है. केजरीवाल अपनी सीट नई दिल्ली में वोटर लिस्ट से छेड़छाड़ का आरोप लगा चुके है. केजरीवाल ने दावा किया कि बीजेपी ने अकेले एक निर्वाचन क्षेत्र में 11,000 मतदाता नाम हटाने के आवेदन दाखिल किए थे, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त के हस्तक्षेप के बाद इसे रोक दिया गया. हालांकि, वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ के आरोपों को निर्वाचन आयोग सिरे से नकार चुका है.

6. एंटी इन्कंबेन्सी 
सत्ता में रहते हुए AAP को 10 साल हो चुके हैं. उन्हीं के ही नए नवेले नेता अवध ओझा की भाषा में कहें तो पिछला चुनाव AAP ने ‘राजा’ की तरह लड़ा और ‘राजा’ की तरह जीता भी. मगर जो सवाल अब तक AAP दूसरी पार्टियों से पूछती थी, उनके जवाब उसे खुद देने होंगे. इस बार एंटी इन्कंबेंसी से पार पाना होगा. इसीलिए अच्छी स्थिति में होने के बावजूद आम आदमी पार्टी चुनाव में पूरी ताकत झोंकती नज़र आ रही है. साथ ही विधायकों के टिकट भी कटे हैं और सीटें भी बदलीं गईं. यहां तक कि डिप्टी सीएम रहे सिसोदिया की सीट बदल दी गई.

7. कांग्रेस 
इस चुनाव में कांग्रेस अपने आप में एक मुद्दा है. मई 2024 में 'हम साथ-साथ हैं' कहने वाले AAP और कांग्रेस, दिल्ली में अब एक दूसरे को 'फूंटी आंख नहीं सुहा रहे'. केजरीवाल जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं कि चुनावी नैरेटिव AAP और BJP के बीच ही रहे. कांग्रेस अगर चुनाव में बड़ा प्लेयर बनी और मुकाबला त्रिकोणीय होता दिखा तो AAP को मुश्किल हो सकती है. कांग्रेस अगर दलित और मुस्लिम वोट अपनी ओर खींचने में कामयाब हुई, जिन पर अब तक AAP की सीधी पकड़ रही है तो AAP को नुकसान हो सकता है. पिछले दो विधानसभा चुनाव में दिल्ली की सभी 12 आरक्षित सीटें आम आदमी पार्टी के खाते में गई थीं. 

कांग्रेस इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा जोश में नज़र आ रही है. पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाले के मुकाबले संदीप दीक्षित और मुख्यमंत्री आतिशी के मुकाबले अल्का लांबा को उतारा है. दिल्ली में 5 फरवरी को चुनाव और 8 फरवरी को नतीजे घोषित होंगे.

वीडियो: मनोज तिवारी ने अरविंद केजरीवाल के दिल्ली चुनाव के दावों पर दिया बयान, केजरीवाल ने भी पलटवार किया

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