1. सीट - राजनांदगांव
छत्तीसगढ़ के CM रमन सिंह की सीट पर क्या हुआ?
अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला ने कड़ी टक्कर दी है रमन सिंह को
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योगी संग रमन
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2. चुनने की वजह – राजनांदगांव से रमन सिंह सिटिंग एमएलए थे. तो ये है सीएम सीट.
3. चैलेंजर कौन – भाजपा के पहले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला, कांग्रेस से.
करुणा शुक्ला
4. ट्रिविया
> रमन सिंह के सामने खड़े होने का साहस आमतौर पर नेता नहीं करते. अजीत जोगी ने भी ऐलान करने के बाद सीएम सीट से पर्चा नहीं भरा. लेकिन कांग्रेस ने रमन सिंह को वॉकओवर न देने का मन बनाया.
> करुणा पहले भाजपा में ही थीं. भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष थीं. जंजगीर से सांसद भी रहीं. 2013 में अलग हुईं. ये कहकर कि भाजपा के आला नेता उन्हें किनारे कर रहे हैं. अलग होकर उस साल हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा से टूटे बागियों के लिए प्रचार भी करने गई थीं. बाद में करुणा कांग्रेस में चली गईं.
> करुणा के पर्चा भरने से राजनांदगांव का चुनाव रूखा-सूखा होने से बच गया. वो यूं कि पहले इस सीट से रमन सिंह के खिलाफ वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मोतीलाल वोरा या दुर्ग से एकमात्र कांग्रेसी सांसद ताम्रध्वज साहू को उतारने पर विचार किया गया था. लेकिन दोनों ही नेताओ ने विधान सभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था. तब करुणा शुक्ला का नाम आगे किया गया.
5. मुद्दे/फैक्टर
> राजनांदगांव में सबसे बड़ा मुद्दा है रोज़गार का.
> कभी यहां बेंगाल नागपुर कॉटन मिल थी. लेकिन मिल के बंद होने के बाद यहां आज तक ऐसा कोई बड़ा उद्योग नहीं लगा जो लोकल लोगों को बड़े पैमाने पर रोज़गार दे. लगातार घोषणाएं हुई हैं. लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं उतरा.
रमन सिंह, बीजेपी, कुल वोट मिले 86797
अल्का उदय, कांग्रेस, कुल वोट मिले 50931
रमन सिंह ने 35,866 की लीड से चुनाव जीता था.

वीडियो देखें -
रमन सिंह से सीनियर विधायक ने खुद के सीएम बनने पर क्या बोला -
3. चैलेंजर कौन – भाजपा के पहले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला, कांग्रेस से.
करुणा शुक्ला4. ट्रिविया
> रमन सिंह के सामने खड़े होने का साहस आमतौर पर नेता नहीं करते. अजीत जोगी ने भी ऐलान करने के बाद सीएम सीट से पर्चा नहीं भरा. लेकिन कांग्रेस ने रमन सिंह को वॉकओवर न देने का मन बनाया.
> करुणा पहले भाजपा में ही थीं. भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष थीं. जंजगीर से सांसद भी रहीं. 2013 में अलग हुईं. ये कहकर कि भाजपा के आला नेता उन्हें किनारे कर रहे हैं. अलग होकर उस साल हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा से टूटे बागियों के लिए प्रचार भी करने गई थीं. बाद में करुणा कांग्रेस में चली गईं.
> करुणा के पर्चा भरने से राजनांदगांव का चुनाव रूखा-सूखा होने से बच गया. वो यूं कि पहले इस सीट से रमन सिंह के खिलाफ वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मोतीलाल वोरा या दुर्ग से एकमात्र कांग्रेसी सांसद ताम्रध्वज साहू को उतारने पर विचार किया गया था. लेकिन दोनों ही नेताओ ने विधान सभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था. तब करुणा शुक्ला का नाम आगे किया गया.
5. मुद्दे/फैक्टर
> राजनांदगांव में सबसे बड़ा मुद्दा है रोज़गार का.
> कभी यहां बेंगाल नागपुर कॉटन मिल थी. लेकिन मिल के बंद होने के बाद यहां आज तक ऐसा कोई बड़ा उद्योग नहीं लगा जो लोकल लोगों को बड़े पैमाने पर रोज़गार दे. लगातार घोषणाएं हुई हैं. लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं उतरा.
वीडियो देखें: रमन सिंह अपनी ही विधानसभा राजनांदगांव में काम कराने से कैसे चूक गए?6. पिछली बार का नतीजा -
रमन सिंह, बीजेपी, कुल वोट मिले 86797
अल्का उदय, कांग्रेस, कुल वोट मिले 50931
रमन सिंह ने 35,866 की लीड से चुनाव जीता था.
7. इस बार का नतीजा क्या रहा ?
रमन सिंह लगभग 17 हज़ार वोट से जीत गए.
वीडियो देखें -
रमन सिंह से सीनियर विधायक ने खुद के सीएम बनने पर क्या बोला -
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