प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना. घर-घर में LPG कनेक्शन पहुंचाने वाली योजना. पश्चिम बंगाल में इस योजना के कम से कम 1 करोड़ 24 लाख लाभार्थी हैं. उज्ज्वला कनेक्शन के मामले में बंगाल देश में दूसरे नंबर पर आता है. अब पश्चिम एशिया में मचे घमासान के चलते LPG सप्लाई प्रभावित हुई है. इसका असर बंगाल चुनाव पर भी पड़ रहा है. वोटर्स बीजेपी उम्मीदवारों से LPG सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर सवाल पूछ रहे हैं. वहीं सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस भी इस मुद्दे पर बीजेपी को घेर रही है.
बंगाल चुनाव: LPG संकट पर घिरे बीजेपी कैंडिडेट, TMC भुनाने में जुटी, CPIM ने टांग अड़ा दी
बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होना है. चुनाव प्रचार के दौरान वोटर्स गैस सिलेंडर की कमी को लेकर सवाल कर रहे हैं. बीजेपी के कैंडिडेट सफाई दे रहे हैं कि 'मसला' जंग से निकला है. वहीं तृणमूल कांग्रेस इसके लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराने की पुरजोर कोशिश में जुटी है.


बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होना है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान वोटर्स गैस सिलेंडर की कमी को लेकर सवाल कर रहे हैं. बीजेपी के कैंडिडेट सफाई दे रहे हैं कि 'मसला' जंग से निकला है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के चलते सप्लाई का संकट पैदा हुआ है. वहीं तृणमूल कांग्रेस इसके लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराने की पुरजोर कोशिश में जुटी है, ताकि चुनाव में नंबर बनाया जा सके.
पिछले महीने से LPG सिलेंडर की सप्लाई में कमी की खबरें आने लगी थीं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसको लपक लिया. कोलकाता में विरोध मार्च निकाला. आरोप लगाया संकट बीजेपी ने पैदा किया है. इनके पास स्थिति से निपटने की योजना नहीं है.
रिपोर्ट के मुताबिक अब बंगाल में वोट मांगने जनता के बीच जा रहे बीजेपी उम्मीदवारों से गैस सिलेंडर को लेकर सवाल किए जा रहे हैं. कूच बिहार जिले की शीतलकुची अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट है. यहां से बीजेपी उम्मीदवार सबित्री बर्मन की सभा में लोगों ने सिलेंडर रिफिल कराने में आ रही परेशानी की शिकायत की. सबित्री बर्मन बताती हैं,
हमने उन्हें बताया कि ये परेशानी पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के चलते हुई है. वोटर्स इस चीज को समझ रहे हैं. बैठक में हमने जनता को बताया कि बीजेपी के आने पर उन्हें क्या-क्या लाभ मिलेगा. जनता बीजेपी के प्रति पॉजिटिव है. वे चाहते हैं कि पार्टी सत्ता में आए.
अलीपुरदुआर जिले की कुमारग्राम सीट पर बीजेपी ने TMC पर LPG की कमी को मुद्दा बनाने का आरोप लगाया है. इस सीट से बीजेपी विधायक और उम्मीदवार मनोज उरांव ने बताया, “TMC इसे मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है. इसका थोड़ा असर हो सकता है. लेकिन ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा. जमीनी हकीकत ये है कि LPG कोई मुद्दा नहीं है.”
हालांकि उनके प्रतिद्वंद्वी इससे उलट दावा करते नजर आए. TMC कैंडिडेट राजीव तिर्की ने बताया कि उनका चुनावी मुद्दा विकास और ममता बनर्जी की वेलफेयर स्कीम था. लेकिन वोटर्स ने LPG की कमी को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने बताया,
चुनाव प्रचार के दौरान मैं LPG की कमी का जिक्र नहीं करता. लेकिन लोग खुद मुझसे इसके बारे में पूछते हैं. उनको ये जानकारी नहीं है कि LPG की सप्लाई केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है. इसलिए जब भी वे यह मुद्दा उठाते हैं, मैं उन्हें विस्तार से समझाता हूं कि इसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है.
लंबे समय से राज्य की सत्ता से बाहर CPI(M) की ओर से भी LPG सप्लाई के मुद्दे को भुनाने की कोशिश की जा रही है. लेफ्ट पार्टी ने इस मुद्दे पर बीजेपी और TMC दोनों को निशाने पर लिया है. कूच बिहार जिले के नटाबारी विधानसभा क्षेत्र से CPI(M) कैंडिडेट हाइक हसन ने दावा किया,
जमकर कालाबाजारी चल रही है. लोग ऊंची कीमत पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं. चुनाव प्रचार के दौरान जब लोग इस मुद्दे को उठाते हैं तो मैं उन्हें CPI(M) के शासन की याद दिलाता हूं. तब ऐसी कोई समस्या नहीं होती थी. CPI(M) के सत्ता में आने पर उन्हें ऐसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा.
कुमारग्राम की बगल की सीट तूफानगंज विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी कैंडिडेट मालती रावा रॉय ने माना है कि उनके क्षेत्र में LPG की कमी एक मुद्दा है. वोटर्स ने इसको लेकर उनसे शिकायत की है. उनके प्रतिद्वंद्वी और पूर्व क्रिकेटर शिबशंकर पॉल ने बताया,
गांवों में संकट बढ़ता जा रहा है. उज्ज्वला कनेक्शन पाने वाली अधिकतर महिलाएं सिलेंडर रिफिल नहीं करवा पा रही हैं. इसके बजाय वो लकड़ी से खाना बना रही हैं. लोग खुद से आकर इस समस्या के बारे में बता रहे हैं. चुनाव रिजल्ट पर इसका असर दिखेगा. क्योंकि हर कोई महंगे दामों पर सिलेंडर नहीं खरीद सकता.
उज्ज्वला योजना साल 2016 में शुरू की गई थी. इस योजना के तहत महिलाओं को मुफ्त में LPG कनेक्शन मिलता है. चुनाव में महिलाओं की भूमिका निर्णायक होती है. उन्हें एक अलग वोट बैंक के तौर पर भी देखा जाने लगा है. चुनावों में उनको लुभाने के लिए कई योजनाएं लाई जाती हैं. वादे और घोषणाएं की जाती हैं.
बंगाल में तो ये बाकी राज्यों के मुकाबले ज्यादा निर्णायक रही हैं. साल 2011 में ममता बनर्जी पहली बार सत्ता में आईं. इसके बाद हुए हर विधानसभा चुनाव में पुरुष वोटर्स के मुकाबले महिलाओं का वोटर टर्नआउट ज्यादा रहा है. साल 2011 में पुरुष वोटर टर्नआउट रहा 84.25 प्रतिशत. महिला वोट प्रतिशत था 82.22 प्रतिशत. साल 2016 में पुरुष वोट प्रतिशत रहा 82.22 प्रतिशत. वहीं महिला वोट प्रतिशत बढ़कर हो गया 83.13 प्रतिशत. साल 2021 के चुनाव में पुरुष वोट प्रतिशत घटकर 81.41 प्रतिशत हो गया. वहीं महिला वोट प्रतिशत रहा 81.74 प्रतिशत.
वीडियो: रॉयल बंगाल टाइगर का डर, टाइगर विधवाओं की कहानी, सुंदरबन में जीवन कैसा?






















