भारतीय जनता पार्टी, वो राजनीतिक दल है जिसके लिए कहा जाता है कि उसके आलाकमान के पास इतनी ताकत है कि एक इशारे पर मुख्यमंत्री इस्तीफा दे देते हैं, और चूं तक नहीं करते. लेकिन हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में उसी बीजेपी के लिए सबसे बड़ा सिर दर्द बन गई है बगावत. जिन्हें टिकट नहीं दिया गया, वो बागी हो गए. पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ पर्चा भर दिया. भारी मान-मनौव्वल के बाद भी राज्य की 18 सीटें ऐसी हैं, जहां बागियों ने उम्मीदवारी वापस नहीं ली. हालात को ऐसे समझिए कि पीएम मोदी को खुद बागियों को फोन करना पड़ रहा है. आजतक के मनजीत नेगी की खबर के मुताबिक, कांगड़ा की फतेहपुर सीट से बागी कृपाल परमार को पीएम मोदी ने फोन कर पार्टी का साथ देने की 'आदेशनुमा' गुज़ारिश की. दी लल्लनटॉप से बातचीत में सीएम जयराम ठाकुर ने भी इस बात को माना बागी पार्टी के लिए मुसीबत तो बन रहे हैं.
ये 18 नेता चुनाव में बीजेपी का काम बिगाड़ देंगे?
क्या कांग्रेस से ज्यादा ये बागी BJP के लिए सिरदर्द बन गए हैं?


जय राम ठाकुर के माथे पर शिकन इसलिए है कि 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले सीनियर लीडर महेश्वर सिंह ने बगावत की थी. उन्होंने अपनी पार्टी बनाई और राज्य की कई सीटों पर उम्मीदवार उतारे. तब भी राज्य में बीजेपी की सरकार थी. मुख्यमंत्री थे प्रेम कुमार धूमल. महेश्वर सिंह की बगावत ने धूमल के समीकरण बिगाड़ दिए. महेश्वर सिंह के अलावा उनकी नई पार्टी से जीता तो कोई नहीं, लेकिन 10-15 सीटों पर बीजेपी को सीधे तौर पर नुकसान जरूर पहुंचाया. नतीजा ये हुआ कि धूमल राज्य में सरकार रिपीट नहीं कर पाए. और इस बार भी राजनीतिक विश्लेषक यही कह रहे हैं कि हिमाचल में बीजेपी के लिए कांग्रेस से ज्यादा बागी मुसीबत बन रहे हैं. तो सवाल ये है कि क्या बीजेपी इस चक्रव्यूह से बाहर निकल पाएगी? आइए जानते हैं कौन सी हैं वो सीटें जहां बीजेपी में बगावत हो गई और इस बगावत का चुनाव में कितना असर पड़ेगा?
किन्नौरतेजवंत सिंह नेगी
किन्नौर जिले की सदर सीट. पिछले चुनाव में इस सीट से उम्मीदवार थे तेजवंत सिंह नेगी. 2017 में तेजवंत, कांग्रेस के जगत सिंह नेगी से सिर्फ 120 वोट से हारे थे. तब उन्हें 19,909 वोट मिले थे. लेकिन इस बार बीजेपी ने उनका टिकट काटते हुए सूरत नेगी को टिकट दे दिया. पर्चा वापस ना लेने पर बीजेपी ने उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है.
अन्नीकिशोर लाल
कुल्लू की अन्नी से किशोर लाल मौजूदा विधायक हैं. लेकिन पार्टी ने उनका टिकट काटा और वो बागी हो गए. पिछली बार उन्हें 30 हजार से ज्यादा वोट मिले थे. और उन्होंने कांग्रेस के पारस राम को हरा दिया था. अन्नी से इस बार बीजेपी ने टिकट दिया है लोकेंद्र कुमार को.
मनोहर धीमान
कांगड़ा की इन्दौरा की सीट इस समय बीजेपी के ही पास है. यहां से विधायक हैं रीता धीमान. 2017 में रीता को कांग्रेस के कमल किशोर ने कड़ी टक्कर दी थी. हार जीत में सिर्फ 1005 वोटों का अंतर था. पार्टी ने इस बार भी रीता पर ही भरोसा जताया है. लेकिन टिकट ना मिलने से नाराज मनोहर धीमान ने बीजेपी की मौजूदा विधायक के खिलाफ बगावत कर दी है. जिले में धीमान का कद कमजोर नहीं है. पूर्व विधायक भी रहे हैं.
नालागढ़केएल ठाकुर
नालागढ़ सीट सोलन जिले में आती है. यहां से पिछली बार बीजेपी ने टिकट दिया था केएल ठाकुर को. ठाकुर पिछली बार कांग्रेस के लखविंदर सिंह राणा से हार गए थे. लेकिन इस बार ठाकुर का खेल बिगड़ने की वजह ये है कि लखविंदर अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं और पार्टी ने उन्हें टिकट दे दिया. केएल ठाकुर खाली हाथ रह गए. और उन्होंने बगावत कर दी. इस सीट से ठाकुर 2012 में विधायक रह चुके हैं, जब बीजेपी राज्य में हार गई थी.
फतेहपुरकृपाल परमार
कृपाल परमार कांगड़ा जिले के फतेहपुर विधानसभा सीट से BJP का टिकट मांग रहे थे. लेकिन पार्टी ने यहां से राकेश पठानिया को मैदान में उतारा है. इससे नाराज कृपाल परमार BJP से बागी हो गए और निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था. कृपाल पार्टी के पूर्व सांसद हैं. उनका कद चुनाव में पार्टी को परेशान कर सकता था और इसीलिए पीएम मोदी ने उन्हें मनाने के लिए खुद फोन किया. बताया जा रहा है कि पीएम का फोन जाने के बाद वो बीजेपी का समर्थन करने को तैयार हो गए हैं.
चंबाइंदिरा कपूर
चंबा जिले की सदर सीट से विधायक हैं पवन नैयर. लेकिन जब उम्मीदवारों की लिस्ट आई, तो उनका टिकट काटकर इंदिरा कपूर को दिया गया. पवन इससे पहले कांग्रेस में थे. टिकट कटा तो समर्थकों ने नाराज़गी जताकर उनका दम दिखाया. इसके बाद नामांकन से ठीक पहले बीजेपी ने इंदिरा कपूर को बैठा दिया और पवन नैयर की पत्नी नीलम नैयर को टिकट दे दिया. अब पवन नैयर का खेमा तो खुश हो गया, लेकिन इंदिरा ने बगावत कर दी. उन्होंने स्वतंत्र रूप से नामांकन भर दिया.
कांगड़ाकुलभाष चौधरी
कांगड़ा की सदर सीट से कुलभाष चौधरी पार्टी के खिलाफ हो गए हैं. उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार के खिलाफ ही पर्चा भर दिया. चौधरी बड़े नेता नहीं हैं. जिले में पार्टी के सचिव हैं, लेकिन लोकल लेवल पर लोगों में ठीकठाक पैठ रखते हैं. कांगड़ा से बीजेपी ने टिकट दिया है पवन काजल को. पवन ने पिछली बार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीता था. लेकिन अब वो बीजेपी में हैं.
धर्मशालाविपिन नेहरिया
कांगड़ा की धर्मशाला सीट से विपिन नेहरिया ने बगावत की है. धर्मशाला से 2017 में किशन कपूर जीते थे. लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव जीतकर वो दिल्ली चले गए. इसके बाद उपचुनाव में पार्टी ने टिकट दिया विशाल नेहरिया को. विशाल जीते भी. इस बार विपिन नेहरिया ने टिकट की मांग की थी. लेकिन पार्टी ने टिकट दिया राकेश चौधरी को. तो विपिन ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया.
बड़सरसंजीव शर्मा
हमीरपुर की बड़सर में संजीव शर्मा ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पार्टी ने यहां से पिछले चुनाव के उम्मीदवार बलदेव शर्मा की पत्नी माया शर्मा को टिकट दिया है. इसके बाद संजीव शर्मा ने माया शर्मा के खिलाफ पर्चा भर दिया.
बिलासपुरसुभाष शर्मा
ये वही सीट है जहां से मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा दो बार विधायक चुनकर आ चुके हैं. लेकिन इस बार उनके ही गढ़ में बगावत हो गई है. पार्टी ने मौजूदा विधायक सुभाष ठाकुर का टिकट काटते हुए त्रिलोक जम्वाल को टिकट दे दिया. ठाकुर नाराज़ हुए भी होंगे तो उन्होंने कुछ नहीं कहा. लेकिन पार्टी नेता सुभाष शर्मा यहां से बागी हो गए हैं. बताया जा रहा शर्मा को मनाने की काफी कोशिश की गई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.
झंडूताराजकुमार कौंडल
इस सीट से भी नड्डा के बिलासपुर के राजकुमार कौंडल ने ही पार्टी के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है. बीजेपी ने मौजूदा विधायक जे आर कटवाल पर भरोसा जताते हुए उन्हें एक बार फिर टिकट दिया. लेकिन कौंडल ने नाराज होकर झंडूता से नामांकन भर दिया. कौंडल भाजपा के पूर्व मंत्री रिखिराम कौंडल के बेटे हैं. पार्टी ने कहीं से टिकट नहीं दिया, तो यहां से वो खुद ही खड़े हो गए.
नाचनज्ञानचंद
सीएम जयराम ठाकुर के गृह जिले मंडी के नाचन की इस सीट में भी पार्टी को नाराज़गी का सामना करना पड़ रहा है. बीजेपी ने मौजूदा विधायक विनोद कुमार को इस बार भी टिकट दिया. लेकिन नाचन में पार्टी के नेता ज्ञानचंद ने बगावत कर दी. हालांकि, ज्ञानचंद पार्टी को पार्टी बड़े नेताओं में नहीं गिना जाता.
मंडीप्रवीण शर्मा
सीएम जयराम ठाकुर के घर की इस सीट से भी पार्टी दिक्कतों का सामना कर रही है. बीजेपी ने सीट से विधायक और सीनियर नेता अनिल शर्मा को टिकट दिया है, लेकिन यहां के लोकल नेता प्रवीण शर्मा टिकट की मांग पूरी ना होने से नाराज़ हो गए और उन्होंने अनिल शर्मा के खिलाफ दावेदारी ठोक दी.
सुंदरनगरअभिषेक ठाकुर
यहां से बीजेपी ने विधायक राकेश कुमार जम्वाल को ही टिकट दिया है. लेकिन पूर्व मंत्री रूप सिंह ठाकुर के बेटे अभिषेक ठाकुर ने सुंदरनगर में बगावत कर दी है. अभिषेक को पार्टी ने मनाने की काफी कोशिशें कीं, लेकिन उन्होंने नामांकन वापस नहीं लिया.
कुल्लूराम सिंह
कुल्लू की सदर सीट से राम सिंह ने बगावत कर दी है. राम सिंह को पार्टी ने 2012 में टिकट दिया था. लेकिन तब वो करीब 2800 से ज्यादा वोटों से हार गए थे. कुल्लू की सीट फिलहाल कांग्रेस के पास है. यहां से सुंदर सिंह ठाकुर विधायक हैं. बीजेपी ने इस बार नरोत्तम सिंह को टिकट दिया है.
मनालीमहेंद्र सिंह ठाकुर
मनाली में भी बीजेपी बगावत का सामना कर रही है. यहां से दो बार के विधायक और वकील गोविंद सिंह ठाकुर को बीजेपी ने एक बार फिर टिकट दिया है. लेकिन पार्टी के नेता महेंद्र सिंह ठाकुर की मांग थी कि इस बार टिकट उन्हें मिले. उन्होंने ये दावा भी किया कि पार्टी का आंतरिक सर्वे भी उनके पक्ष में हैं. लेकिन टिकट नहीं मिला और वकील साहब ने निर्दलीय उम्मीदवारी ठोक दी.
बंजारहितेश्वर सिंह
2012 में बगावत करने वाले महेश्वर और हितेश्वर दोनों बीजेपी में थे. लेकिन बीजेपी हितेश्वर को टिकट नहीं देना चाहती थी. नाराज़ हितेश्वर ने निर्दलीय पर्चा भर दिया. बीजेपी यहां से महेश्वर सिंह को टिकट देने वाली थी, लेकिन उनके बेटे की दावेदारी से उनका टिकट कट गया. और बीजेपी ने नरोत्तम चंद को टिकट दे दिया.
देहराहोशियार सिंह
देहरा से विधायक हैं होशियार सिंह. पिछली बार 4 हाजर से ज्यादा वोटों से जीते थे. लेकिन इस बार बीजेपी ने टिकट काट दिया. पार्टी ने टिकट दिया रमेश चंद को. इसके बाद होशियार सिंह हुए बागी और उन्होंने निर्दलीय पर्चा भर दिया.
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