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इलाहाबाद यूनिवर्सिटी: 400% बढ़ गई फीस, आमरण अनशन पर बैठे छात्र

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ 9 दिन से छात्र आमरण अनशन पर हैं. जबकि यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि यूनिवर्सिटी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फीस 100 साल बाद बढ़ाई गई है.

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फीस में हुई बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन करते इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्र

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ गई है. कई कोर्सेज में ये बढ़ोतरी करीब 400% तक है. बढ़ी फीस नए सेशन से एडमिशन लेने वाले छात्रों पर लागू होगी. यानी पहले से एनरोल्ड स्टूडेंट्स को बढ़ी फीस नहीं देनी होगी. यूनिवर्सिटी प्रशासन के इस फैसले का छात्र विरोध कर रहे हैं. पिछले 9 दिनों से 6 छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं. अनशन पर बैठे इन छात्रों में से दो की तबीयत भी खराब हो गई. इन दोनों छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 

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किस कोर्स की कितनी बढ़ी फीस? 

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने बताया कि पहले बीए की फीस 975 रुपए हुआ करती थी जिसे बढ़ाकर 3700 रुपए कर दिया गया है. इसी तरह BCom की फीस 975 रुपए से बढ़ाकर 3901 रुपए, BSc की फीस 1125 रुपए से बढ़ाकर 4151 रुपए, MA की फीस 1375 से बढ़ाकर 4651 रुपए, MSc की फीस 1961 से बढ़ाकर 6 हजार रुपए, BTech की फीस 1941 से बढ़ाकर 5151 रुपए, LLB की फीस 1375 से बढ़ाकर 4651 रुपए कर दिया गया है. जो एनरोलमेंट फीस अब तक शून्य थी उसे बढ़ाकर 400 रुपए कर दिया गया है. इसके अलावा लाइब्रेरी फीस, ट्यूशन फीस, एग्जाम फीस आदि में भी बढ़ोतरी की गई है. फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र अजय यादव ने लल्लनटॉप से बात करते हुए कहा, 

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यूनिवर्सिटी में 400% फीस बढ़ा दी गई है. पहले कोर्स की फीस 945 रूपये के करीब होती थी. लेकिन अभी 400% फीस बढ़ने के बाद ये करीब 37 सौ कुछ रूपये के करीब पहुंच गई है. सभी छात्र मिलकर लगातार अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं. लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. हमारी कुलपति से सिर्फ इतनी मांग है कि वे फीस वृद्धि का अपना तुगलकी फरमान वापस लें.

फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन करते छात्र
यूनिवर्सिटी का क्या कहना है? 

दूसरी तरफ यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि फीस यूनिवर्सिटी की जरूरतों को देखते हुए छात्रहित में बढ़ाई गई है. लल्लनटॉप से बात करते हुए यूनिवर्सिटी की जनसंपर्क अधिकारी प्रो. जया कपूर ने बताया कि फीस में बढ़ोतरी 100 साल के बाद हो रही है. इससे पहले 1922 में फीस तय हुई थी. उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में फीस  फीस में कई तरह के कम्पोनेंट्स होते हैं हर कम्पोनेंट में अलग-अलग फीस बढ़ाई गई है. ये जिस तरह से बताया जा रहा है वैसा नहीं है कि फीस 400 प्रतिशत बढ़ा दी गई है. उन्होंने कहा, 

फीस 400 प्रतिशत नहीं बढ़ी है. हम लोगों ने जो फीस बढ़ाई है वो अलग-अलग कोर्सेज में अलग-अलग है. आप उसे परसेंटेज के हिसाब से न देखते हुए नंबर्स के हिसाब से देखिए. आजकल की जरूरत के हिसाब से उसे रेशनलाइज किया गया है. हमारी फीस बाकी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज से या तो कम है या फिर सबसे कम में से है. आप BA की फीस दूसरे सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में देखेंगे तो पाएंगे कि कहीं 10 हजार है कहीं 5 हजार है. सबसे कम फीस BHU की है जो कि 34 सौ रुपए के आसपास है.

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प्रो. जया कपूर ने कहा कि समय के हिसाब से जरूरतें बढ़ रही हैं. साथ ही सरकार की ओर से भी ग्रांट में कटौती की जा रही है. इसलिए छात्रहित में जो कम से कम हो सकता था वो फैसला किया गया है. उन्होंने कहा,

हमारे यहां ट्यूशन फीस अभी 12 रुपए है. जो 1922 में तय की गई थी. समय के हिसाब से हर चीज को ठीक किया जाता है. यूनिवर्सिटी बढ़ रही है. छात्र हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर हैं. गवर्नमेंट बराबर ग्रांट में कटौती कर रही है और हमसे कह रही है कि हम लोग रिसोर्सेज जनरेट करें. इसके बावजूद हम लोग जानते हैं कि हमारे बच्चे बहुत हाई क्लास से नहीं आते हैं. इसलिए हमने सबसे पहले छात्रहित को ध्यान में रखा है और फीस को सबसे कम रखने की कोशिश की है. जहां बेहद जरूरी है वहीं हमने फीस बढ़ाई है. जो बच्चे पहले से एनरोल्ड हैं उनकी फीस नहीं बढ़ी है. जो नए सेशन से बच्चे आएंगे उन्हीं की फीस बढ़ेगी. 

विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा

फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को विपक्षी दलों का समर्थन मिल रहा है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा, 

छात्रसंघ लोकतंत्र की प्राइमरी होते हैं।

इलाहाबाद विवि में छात्रसंघ बहाली की मांग हेतु 783 दिनों से क्रमिक अनशन व 400% फीस वृद्धि के विरोध में 7 दिनों से बैठे छात्र आमरण अनशन के समर्थन में विवि परिसर में निकाला गया ‘छात्र जन आक्रोश मार्च’ भाजपा सरकार से नाउम्मीदगी का प्रतीक है।

कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी ने लिखा, 

इलाहाबाद विवि में 400% फीस वृद्धि भाजपा सरकार का एक और युवा विरोधी कदम है. यहां यूपी-बिहार के साधारण परिवारों के बच्चे पढ़ने आते हैं. फीस वृद्धि कर सरकार इन युवाओं से शिक्षा का एक बड़ा जरिया छीन लेगी. सरकार को छात्र-छात्राओं की बात सुनकर फीस वृद्धि का फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए.

फिलहाल यूनिवर्सिटी कैंपस में छात्रों का प्रदर्शन जारी है. आज भी छात्रों ने कैंपस में जुलूस निकाला और फीस बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की.  

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