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चांदी की 'चांदी ही चांदी', 3 लाख के बाद अब 4 लाख के पार कब होगी?

अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी है. इसके चलते दुनियाभर के निवेशक फिर से सुरक्षित निवेश के लिए सोने और चांदी में निवेश बढ़ा रहे हैं. इस वजह से इनकी कीमतों में उछाल आया है

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मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर पहली बार चांदी 3 लाख रुपये के पार पहुंच गई (फोटो क्रेडिट: Business Today)

चांदी ने इतिहास रच दिया है. सोमवार 19 जनवरी को MCX यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर पहली बार चांदी 3 लाख रुपये के पार पहुंच गई. सोमवार को शुरुआती कारोबार में चांदी का मार्च वायदा 13,553 रुपये या 4.71% रुपये उछलकर 3,01,315 प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गया है. इसी तरह MCX पर फरवरी डिलीवरी वाला सोने का वायदा भाव करीब 3,000 रुपये या 2% से ज्यादा चढ़कर 1,45,500 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया. वहीं, इंटरनेशनल मार्केट में चांदी में 3% की तेजी दर्ज की गई और यह 94 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई.  वहीं इंटरनेशनल मार्केट में  में सोने का भाव 1.7% चढ़कर 4,673 डॉलर प्रति औंस के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया.

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MCX भारत का प्रमुख कमोडिटी डेरिवेटिव्स एक्सचेंज है. यहां सोना, चांदी, कच्चा तेल, नेचुरल गैस, कॉपर, जिंक जैसी कई कमोडिटीज़ की वायदा (Futures) और ऑप्शन ट्रेडिंग होती है. वायदा एक तरह का कॉन्ट्रैक्ट होता है. इसमें किसी कमोडिटी की कीमत आज तय कर ली जाती है. लेकिन डिलीवरी या सेटलमेंट भविष्य की एक तय तारीख पर होता है.

सोने-चांदी में तेजी क्यों आई ?

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर के निवेशक फिर से सुरक्षित निवेश के लिए सोने और चांदी में निवेश बढ़ा रहे हैं . इस वजह से इनकी कीमतों में उछाल आया है. जब भी दुनिया के किसी हिस्से में राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो इस अनिश्चितता के माहौल में चांदी और सोना दोनों ही सुरक्षित निवेश माने जाते हैं. अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी है.

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ट्रंप के इस बयान के जवाब में यूरोपीय संघ (EU) ने भी कड़ा रुख अपनाया है. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय संघ ने ट्रंप की ग्रीनलैंड से जुड़ी धमकी के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के तौर पर 93 अरब यूरो (10 लाख करोड़ रुपये) के टैरिफ लगाने की तैयारी शुरू कर दी है. इस संभावित ट्रेड वॉर की आशंका ने निवेशकों को एक बार फिर जोखिम भरे एसेट्स से दूर कर, सोना-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर मोड़ दिया. अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापारिक टकराव की संभावना ने दुनियाभर के शेयर बाजारों पर दबाव बनाया है. शेयर बाजारों में जब भी अस्थिरता बढ़ती है, तो निवेशक अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए कीमती धातुओं की ओर रुख करते हैं. इससे सोने और चांदी की मांग बढ़ जाती है.

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सोने-चांदी में तेजी का दूसरा कारण करेंसी का असर है. डॉलर में मजबूती और रुपये में कमजोरी का सीधा फायदा सोने-चांदी की कीमतों को मिल रहा है. रुपया कमजोर होने पर विदेश से सोना खरीदना महंगा हो जाता है. इससे भारत में सोने और चांदी के दाम तेजी से ऊपर जाते हैं. सोने-चांदी में तेजी का तीसरी वजह ये है कि निवेशकों के मन में आर्थिक माहौल को लेकर असमंजस बना हुआ है. भले ही निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हुई हो, लेकिन वैश्विक आर्थिक ग्रोथ को लेकर अभी चिंता बनी हुई है. ऐसे माहौल में सोना और चांदी निवेशकों के लिए भरोसेमंद विकल्प बने रहते हैं. पिछले हफ्ते इन दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट आई थी. इसकी वजह प्रमुख वजह ये थी कि अमेरिका और ईरान के बीच जियो पॉलिटिकल टेंशन में कुछ नरमी आने से सोने-चांदी की सुरक्षित निवेश मांग घटी थी. भाव गिरने का एक और प्रमुख कारण ये था कि कई निवेशकों ने सोने-चांदी में प्रॉफिट बुकिंग की थी.

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चांदी 4 लाख छूएगी, निवेशकों को क्या करना चाहिए ?

दुबई के एमिरेट्स इन्वेस्टमेंट बैंक में डायरेक्टर (वेल्थ मैनेजमेंट) डॉक्टर धर्मेश भाटिया ने लल्लनटॉप को बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का भाव आसमान छूने से भारत में चांदी का भाव उछला है.  उनका मानना है कि आगे भी चांदी में उछाल जारी रह सकती है.  उनका अनुमान है कि अगर डॉलर के मुकाबले रुपया आगे भी दबाव में बना रहता है और जियो पॉलिटिकल टेंशन में कमी नहीं आती है तो जल्दी ही चांदी का भाव 3.30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकता है.  

धर्मेश भाटिया का कहना है कि लंबी अवधि के नजरिये से चांदी में और भी तेजी आने का अनुमान है.  उनका कहना है कि अगर अमेरिका और यूरोप के बीच ट्रेड को लेकर तनाव जारी रहता है. मिडिल ईस्ट और रूस–यूक्रेन के बीच शांति समझौता नहीं होता है तो MCX पर इस साल के आखिर तक चांदी का भाव 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच सकता है.  उनका कहना है कि दुनियाभर में चांदी की औद्योगिक खपत जोर पकड़ रही है खासतौर से सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों में चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ी है. औद्योगिक मांग बढ़ने से आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों को सपोर्ट मिल सकता है.

ऑगमोंट-गोल्ड फॉर ऑल में रिसर्च हेड डॉक्टर रेनिशा चेनानी ने लल्लनटॉप को साझा किए गए अपने एक ‘वीकली ब्लॉग’ (रिपोर्ट) में लिखा है कि चांदी की कीमतों में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है.  साल 2026 की शुरुआत से अब तक चांदी में करीब 30% की तेजी आ चुकी है. इससे पता चलता है कि निवेशकों और ट्रेडर्स की दिलचस्पी चांदी में लगातार बनी हुई है. उनका कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका–यूरोप ट्रेड विवाद, रूस–यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, चांदी को सेफ-हेवन एसेट के तौर पर सपोर्ट दे रहे हैं. ऑगमोंट -गोल्ड फॉर ऑल भारत की एक प्रमुख डिजिटल गोल्ड और बुलियन कंपनी है. यह निवेशकों को आसान तरीके से सोना–चांदी खरीदने व निवेश करने की सुविधा देती है.

चेनानी का कहना है कि चीन के प्रमुख बाजार (शंघाई मार्केट) में चांदी की कीमतें लंदन की तुलना में करीब 10 डॉलर प्रीमियम पर ट्रेड कर रही हैं. यह मजबूत मांग और निवेशक का चांदी के प्रति बढ़ता उत्साह दिखाता है. टेक्निकल नजरिए से इंटरनेशनल मार्केट में चांदी 99-100 डॉलर प्रति औंस और अगर ये स्तर टूटता है  तो फिर चांदी का भाव 107 डॉलर प्रति औंस का स्तर छू सकता है. वहीं गिरावट की स्थिति में 86.5 डॉलर प्रति औंस का स्तर मजबूत सपोर्ट है. कुल मिलाकर, मौजूदा फंडामेंटल और जियोपॉलिटिकल माहौल चांदी के लिए पॉजिटिव बना हुआ है और आने वाले समय में इसमें और मजबूती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

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सेबी रजिस्टर्ड इंटेलिसिस वेंचर्स के फाउंडर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित सुरेश जैन ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि निकट अवधि में चांदी में कुछ गिरावट देखने को भले मिले लेकिन लंबी अवधि में तेजी की की संभावना है. डाउनसाइड की बात करें तो MCX पर चांदी का भाव 2 लाख 93 हजार तक गिर सकती है. अगर चांदी इस स्तर को तोड़ती है तो नीचे में भाव 2 लाख 80 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर सकते हैं. लेकिन इस स्तर के ऊपर दाम स्थिर रहने पर एक अच्छा बाउंस-बैक देखने को मिल सकता है. 

जैन का मानना है कि बुनियादी तौर पर चांदी में तेजी का ही रुझान दिखता है. आने वाले समय में चांदी 3.15 लाख -3.26 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में कारोबार कर सकती है. वहीं 2026 के अंत तक चांदी का भाव 3.86 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंचने का अनुमान है. 

इसके अलावा सोने के तकनीकी स्तरों पर बात करते हुए पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि MCX पर सोने को 1 लाख 41 हजार 400 से 1 लाख 40 हजार रुपये प्रति दस ग्राम के दायरे में मजबूत सपोर्ट मिल रहा है. वहीं , ऊपर की तरफ 1 लाख 43 हजार 300 से 1 लाख 44 हजार का स्तर रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है.  रेजिस्टेंस वह स्तर होता है, जहां किसी शेयर, सोना या चांदी की कीमत ऊपर जाने में रुकावट महसूस करती है. इस स्तर पर अक्सर बिकवाली बढ़ जाती है, जिससे कीमत आगे बढ़ने के बजाय रुक जाती है या नीचे आने लगती है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में रणनीति यह होनी चाहिए कि सोने और चांदी को गिरावट के समय खरीदा जाए. 
 

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