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रूस के बैंक भारत में अपने बैंक खाते खोलने के लिए लाइन में क्यों लगे हैं ?

रूस के कई सारे बैंक भारतीय बैंकों के साथ बातचीत कर रहे हैं.

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India-Russia bilateral trade

रूस (Russia) के 15 से ज्यादा बैंक भारतीय बैंकों (Indian Banks) के साथ बिजनेस को लेकर बातचीत कर रहे हैं. ये बिजनेस रूस की करेंसी रूबल और भारत की करेंसी रूपये में होगा, जिससे इस तरह के व्यापार के लिए स्थापित अमेरिकी डॉलर का मैकेनिज्म टूट जाएगा. इसके लिए रूस के बैंकों की तरफ से एक फ्रेमवर्क बनाए जाने की बात हो रही है. अंग्रेजी अखबार इकॉनमिक टाइम्स ने ये जानकारी दी है.

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बताया जा रहा है कि रूस के जेनिट और तैत्सोबैंक जल्द ही बैंक ऑफ इंडिया, कैनरा बैंक और यूको बैंक के साथ अपने अकाउंट खोलने वाले हैं. बताया जा रहा है कि इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) की तरफ से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बातचीत की जा रही है. वहीं इंडियन इकॉनमिक ट्रेड आर्गेनाईजेशन (IETO) उन कंपनियों से बात कर रहा है जो इस तरह के बिजनेस को लेकर रुचि दिखा रहे हैं. बैंक्स और दूसरे रेगुलेटर्स एक कस्टमाइज्ड कॉमन एक्सचेंज रेट बनाने पर विचार कर रहे हैं. नियमित तौर पर इसकी दरों की घोषणा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और रूस के केंद्रीय बैंक की तरफ से की जाएगी.

रिपोर्ट के अनुसार रूस के सेंट्रल क्रेडिट बैंक, बैंक सोयूज, एमटीसी बैंक, पीटर्सबर्ग सोशल कमर्शियल बैंक, जेनिट बैंक और तैत्सोबैंक ऐसे कस्टमाइज्ड ट्रेड अकाउंट खोलने के इच्छुक हैं और मास्को में भारत के बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, यस बैंक, कैनरा बैंक जैसे बैंक इनके स्थानीय पार्टनर्स बनेंगे.

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SBI नहीं बन पाएगा हिस्सा!

इंडियन इकॉनमिक ट्रेड आर्गेनाईजेशन के अध्यक्ष आसिफ इकबाल ने इकॉनमिक टाइम्स को  बताया,

"रूस के कई सारे बैंक भारतीय बैंकों के साथ बातचीत कर रहे हैं. रूस के साथ रुपये पर आधारित व्यापार से सस्ता तेल आयात का फायदा होगा. छोटे और मीडियम साइज के बैंक इसे एक मौके के तौर पर देखेंगे. खुद को उन जगहों पर ले जाने के मौके के तौर पर, जहां पर वो थे नहीं."

रिपोर्ट के मुताबिक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया इस बिजनेस का हिस्सा नहीं बन पाएगा. वजह ये है कि उसकी बैलेंस शीट में डॉलर की भारी उपस्थिति है. रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को देखते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अमेरिका और यूरोप में खुद को मुश्किल में नहीं डालना चाहेगा. 

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इससे पहले 11 जुलाई को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रूस के साथ व्यापार को रूपये में करने की मंजूरी दे दी थी. ये फैसला रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते लिया गया था. इसी के चलते भारतीय और रूसी बैंकों के बीच लेनदेन बढ़ा और इन बैंकों ने आपस में अकाउंट खोले. वहीं जून में भारत ने रूस से लगभग 3.4 हजार करोड़ रुपये का व्यापार किया. ये पिछले साल के मुकाबले सात गुना था. इसमें कच्चे तेल का हिस्सा लगभग 2.4 हजार करोड़ रुपये रहा. 

(ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहीं शिवानी ने लिखी है)

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