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घर खरीदने जा रहे? जानें ये सही समय है भी या नहीं

रियल एस्टेट डेवलपर्स का फोकस हाउसिंग सोसाइटीज डेवलप करने में रहा है. इसी के चलते नए घरों की सप्लाई लगातार बढ़ी है. खासकर मिड और अपर-मिड सेगमेंट में नए घरों की सप्लाई बढ़ी है. दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और हैदराबाद के कुछ हिस्सों में यह साफ दिखता है.

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देशभर में घरों की मांग में कमी आई है. (फोटो क्रेडिट: Unsplash.com)

अगर आप अपने परिवार के लिए सपनों का आशियाना खोज रहे हैं तो ये आपके लिए मुफीद समय हो सकता है. इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट कहती है कि देशभर में घरों की मांग ठंडी पड़ रही है. ऐसे में जो लोग घर खरीदना चाहते हैं उनको कुछ राहत मिल सकती है. मैजिकब्रिक्स की हालिया PropIndex रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि पिछले साल अक्टूबर से दिसंबर में प्रमुख शहरों में मकानों की मांग करीब 9% घट गई. इसी दौरान बिक्री के लिए उपलब्ध घरों की सप्लाई 3% से ज्यादा बढ़ी है. मैजिकब्रिक्स ऑनलाइन प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने वाली वेबसाइट है.

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घरों की मांग क्यों धीमी पड़ी?

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि घरों की मांग आने का सबसे बड़ा कारण ये है कि आमतौर पर वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही (एक जनवरी से 31 मार्च के बीच) में लोगों के खर्चे काफी बढ़ जाते हैं. कई त्योहार और न्यू ईयर के चलते लोग अपनी पसंद की जरूरतों पर खर्च करते हैं. इस दौरान शादियों का सीजन भी पड़ने से लोग खरीदारी करते हैं. इसके अलावा कुछ लोग परिवार के साथ घूमने-फिरने  की प्लानिंग करते हैं. कुल मिलाकर इस वक्त घर खरीदने जैसे बड़े खर्चों की जगह लोग दूसरी चीजों पर पैसा खर्च करते हैं.

उधर रियल एस्टेट डेवलपर्स का फोकस हाउसिंग सोसाइटीज डेवलप करने में रहा है. इसी के चलते नए घरों की सप्लाई लगातार बढ़ी है. खासकर मिड और अपर-मिड सेगमेंट में नए घरों की सप्लाई बढ़ी है. दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और हैदराबाद के कुछ हिस्सों में यह साफ दिखता है.

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रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रॉपर्टी की कीमतें अभी भी बढ़ रही हैं. लेकिन रफ्तार धीमी है. रिहायशी प्रॉपर्टी की कीमतें तिमाही आधार पर करीब 1.5% और सालाना आधार पर लगभग 17% बढ़ीं हैं. यह पिछले करीब दो साल में कीमतों की सबसे धीमी बढ़ोतरी है.

घर खरीदारों के लिए क्या मायने?

घर खरीदने वालों के लिए यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण है. जब मांग की तुलना में सप्लाई ज्यादा तेजी से बढ़ रही हो तो ग्राहकों के पास विकल्प होते हैं. घर खरीदने वाले लोगों के पास जल्दबाजी में फैसले लेने का दबाव कम होता है. खरीदारों को मोलभाव करना आसान लग सकता है. खासतौर से मिड रेंज वाली हाउसिंग प्रॉपर्टी सेगमेंट में मुकाबला बढ़ रहा है. डेवलपर्स डील पूरी करने के लिए घर खरीदारों को आसान किस्तों में भुगतान, कुछ समय के लिए खास छूट की पेशकश कर सकते हैं.

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शहर-दर-शहर अलग रुझान

यह रुझान शहर-दर-शहर अलग-अलग है. दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में अल्ट्रा-लक्जरी से हटकर प्रैक्टिकल प्राइस सेगमेंट की ओर झुकाव दिख रहा है. प्रैक्टिकल प्राइस सेगमेंट से मतलब होता है वह कीमत जिसमें घर आम खरीदारों की आय और जरूरतों के हिसाब से घर खरीदा जा सके. यह न तो बहुत महंगे घर होते हैं और न ही बहुत सस्ते. यह ऐसे घर होते हैं जिन्हें नौकरीपेशा लोग, मिडिल और अपर-मिडिल क्लास के लोग अफोर्ड कर सकते हैं.

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि घरों की मांग में आई ये कमी हमेशा बनी रहेगी. रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे में जो लोग घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए प्रॉपर्टी लेने का ये सही समय हो सकता है. घर खरीदने के इच्छुक लोग बिल्डर से मोलभाव कर सकते हैं. यह बिना दबाव में सही फैसला लेने का सुनहरा मौका है. आगे चलकर हाउसिंग मार्केट की दिशा काफी हद तक होम लोन की ब्याज दरों और देश की अर्थव्यवस्था पर निर्भर करेगी. 

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