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मोदी सरकार फायदे के लिए कर रही कई ट्रेड डील, भारत को उल्टा नुकसान हो गया

नीति आयोग की एक रिपोर्ट के हवाले से जानकारी दी गई है कि भारत ने जिन देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया है उन देशों के साथ व्यापार घाटा तेजी से बढ़ा है

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India’s trade deficit with FTA countries
भारत ने जिन देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया है उन देशों के साथ व्यापार घाटा तेजी से बढ़ा है (फोटो क्रेडिट: Business Today )
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प्रदीप यादव
7 जनवरी 2026 (Updated: 7 जनवरी 2026, 02:34 PM IST)
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अमेरिका ने भारत के सामानों पर 50% टैरिफ लगाया तो केन्द्र सरकार ने दूसरे देशों के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए विकल्प तलाशने शुरू किये. इनमें से एक रास्ता था FTA यानी मुक्त व्यापार समझौता. इसी सिलसिले में भारत सरकार ने कई देशों के साथ डील साइन की और कुछ देशों के साथ इस तरह की डील के लिए बातचीत चल रही है. लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर में नीति आयोग की एक रिपोर्ट के हवाले से जानकारी दी गई है कि भारत ने जिन देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया है उन देशों के साथ व्यापार घाटा तेजी से बढ़ा है. मतलब भारत को फायदा की जगह नुकसान हो रहा है. FTA दो या दो से ज्यादा देशों के बीच समझौता होता है. इस समझौते के जरिये ये देश आपस में होने वाले ट्रेड पर टैक्स घटाते देते हैं या खत्म कर देते हैं. इसके अलावा व्यापार में आने वाली दूसरी दिक्कतों को भी दूर किया जाता है.

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6 जनवरी को नीति आयोग ने ‘ट्रेड वॉच क्वार्टरली’ रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने जिन देशों के साथ ट्रेड डील की है, उन देशों के साथ व्यापार घाटा 59.2 परसेंट बढ़ गया है. यह आंकड़े एक अप्रैल 2025 से 30 जून 2025 के बीच के हैं. साथ ही ये तुलना इससे पिछले साल यानी इसी दौरान (एक अप्रैल 2024 से 30 जून 2024 )  के बीच की गई है. जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से ज्यादा हो जाता है, तो उसे व्यापार घाटा कहा जाता है. नीति आयोग की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान आयात 10 परसेंट बढ़कर 65.3 अरब डॉलर (5.87 लाख करोड़ रुपये) हो गया, जबकि निर्यात 9 परसेंट घटकर 38.7 अरब डॉलर रह गया. भारतीय रुपये में यह रकम 3.48 लाख करोड़ रुपये बनती है.  

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व्यापार घाटा बढ़ने का सबसे बड़ा कारण दक्षिणपूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) को निर्यात में कमी आना है.  आसियान दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है. इसमें इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर समेत 10 देश शामिल हैं. आसियान देशों को भारत सबसे ज्यादा (जिन देशों के साथ एफटीए है) एक्सपोर्ट करता है.  इस रिपोर्ट में कहा गया है आसियान के साथ भारत का निर्यात 16.9% गिर गया है. भारत और आसियान के बीच मुक्त व्यापार समझौता काफी समय से है. लेकिन अब भारत आसियान के साथ व्यापार समझौते की शर्तों पर दोबारा विचार करने के लिए आसियान के साथ बातचीत कर रहा है. भारत ने साल 2025 में नई ट्रेड डील साइन करने का लक्ष्य रखा था लेकिन यह समय सीमा निकल गई है.  आसियान के अलावा  संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ भारत का निर्यात 2.1% गिर गया है.  हालांकि दक्षिण कोरिया (15.6%), जापान (2.8 %), थाईलैंड (2.9%) और भूटान (10.2%) को भारत के निर्यात में हल्की बढ़त देखने को मिली.

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नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अवधि के दौरान (1 अप्रैल 2025 से 30 जून 2025 के बीच) पेट्रोलियम निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई.  इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में जबरदस्त उछाल देखा गया. भारत ने साल 2025 में ओमान, न्यूजीलैंड और यूनाइटेड किंगडम (UK) के साथ मुक्त व्यापार समझौता पूरा किया है. वहीं, यूरोपीय संघ (EU), अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC), यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU), कनाडा और साउदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन (SACU) के साथ ट्रेड डील के लिए बातचीत चल रही है. इसके अलावा भारत ब्राजील और इजराइल के साथ तरजीही व्यापार समझौते (PTA) पर भी विचार कर रहा है.

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