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'मैंने ऑनलाइन कर्ज लिया, फिर लेता ही रहा', डिजिटल लोन का खौफनाक सच

Digital Loan लाखों भारतीयों के लिए 'जी का जंजाल' बन चुके हैं. ये लोन भले ही आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन जब कर्ज लेने वाले अपनी किस्त भरने में चूक करते हैं तो उन्हें तमाम तरह की मुसीबतों का सामना करना होता है.

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वसूली एजेंटों की भी कानूनी सीमाएं होती हैं. वे कर्जदारों को धमका नहीं सकते. (सांकेतिक तस्वीरें: Unsplash.com)

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  • डिजिटल लोन तेजी से बिना कागजी कार्रवाई के मिल रहे हैं, जिससे कई लोग अचानक आवश्यक खर्चों के लिए तुरंत ऋण ले पा रहे हैं।
  • युवा वर्ग और पहली बार लोन लेने वाले अनियोजित खर्चों की वजह से डिजिटल लोन की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे लोन की पुनर्भुगतान में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
  • ऋण चुकाने में असमर्थता के कारण कर्जदारों को वसूली एजेंटों द्वारा परेशान किया जाता है, जिससे कानूनी शिकायतें और RBI नियमों का पालन प्रमुख मुद्दे बन गए हैं।

मेडिकल खर्च, कार की सर्विसिंग या क्रेडिट कार्ड का पेमेंट. इस तरह के खर्चों को पूरा करने के लिए अक्सर लोग तैयारी नहीं रखते. नतीजा, Digital Loan की तरफ भागते हैं. जैसे ही मोबाइल में ‘लोन’ टाइप किया, दर्जनों ऐप्स 5 मिनट में बिना डॉक्यूमेंट्स के लोन देने जैसे वादे करते दिखते हैं. अप्लाई करने वाले को लगता है इस ‘झटपट’ लोन से उसकी मुसीबत दूर हो जाएगी. लेकिन असल में एक दिक्कत से बचने के लिए दूसरी बड़ी परेशानी में फंस जाते हैं.

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इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि फटाफट मिलने वाले डिजिटल लोन लाखों भारतीयों के लिए 'जी का जंजाल' बन चुके हैं. ये मिल तो आसानी से जाते हैं लेकिन जब कर्ज लेने वाले अपनी किस्त भरने में चूक करते हैं तो उन्हें तमाम मुसीबतों का सामना करना पड़ता है.

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Digital Loan का सच

दिल्ली की रहने वाली 28 साल की एक महिला ने इंडिया टुडे को बताया कि पिछले साल उसे नौकरी से निकाल दिया गया था. इसलिए घर का किराया और क्रेडिट कार्ड का बिल भरने के लिए उसने एक लाख रुपये का डिजिटल लोन लिया. कुछ ही मिनटों में उसके खाते में पैसे आ गए. उसने सोचा था कि दूसरी नौकरी मिलने के बाद वह इसे चुका देगी. लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकी.

लोन की किस्त मिस होते ही उसे वसूली एजेंट्स की तरफ से फोन आना शुरू हो गया. पहले ये एजेंट हफ्ते में एक दिन फोन करते थे. लेकिन जल्दी ही कॉल की फ्रिक्वेंसी बढ़ती गई. बाद में हालत ये हो गई कि हर घंटे में कॉल आने लगे. 

महिला ने बताया, "मैंने जहां से लोन लिया था वहां के लोगों ने धमकी दी कि अगर मैं कर्ज नहीं चुका पाई तो मेरी पुरानी कंपनी और परिवार के लोगों को इसकी जानकारी दे दी जाएगी. इन सबसे डरकर मैंने अपने एक दोस्त से पैसे उधार लिए और कर्ज चुका दिया. कर्ज लेना सबसे बुरा नहीं था. सबसे बुरा तो डर था."

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पीड़ित महिला की कहानी Expert Panel कंपनी की तरफ से इसी तरह के जाल में फंसे 1000 लोगों पर किए गए सर्वे के नतीजों से मेल खाती है. ये फर्म लोन समाधान और वित्तीय उत्पीड़न से सुरक्षा के लिए कानूनी मदद देती है. इसके सर्वे में शामिल 72% लोगों ने कहा था कि उन्हें लोन रिकवरी एजेंटों द्वारा उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था. 

भारत में डिजिटल लोन के क्षेत्र में आई तेजी की मुख्य वजह युवा लोग हैं. सर्वे के अनुसार, पहली बार लोन लेने वालों में जनरेशन Z के 41% लोग शामिल हैं. इनमें से लगभग 46% लोग स्मार्टफोन, लैपटॉप और दूसरे गैजेट्स खरीदने के लिए लोन लेते हैं. वहीं, पर्सनल लोन लेने वालों में मिलेनियल्स लगभग 45% हैं. वे अक्सर जीवनशैली से जुड़े खर्चों, घर की मरम्मत या छोटे बिजनेस शुरू करने के लिए लोन लेते हैं.

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जब आपका फोन लोन रिकवरी टूल बन जाता है

ऑनलाइन लोन लेने वाले कर्ज लेते वक्त जो निजी जानकारी साझा करते हैं उसी को ये लोन रिकवरी एजेंट्स हथियार बना लेते हैं. ये ऐप कर्जदार का फोन नंबर, फोटो और दूसरी जानकारियां, यहां तक की सोशल मीडिया तक पहुंच की अनुमति मांगते हैं. पहले ये अनुमतियां सामान्य लगती हैं, लेकिन जानकार चेतावनी देते हैं कि ये लोन रिकवरी के दौरान डराने-धमकाने का हथियार बन सकती हैं.

एक्सपर्ट पैनल कंपनी के निदेशक अनुराग मेहरा इंडिया टुडे से बातचीत में कहते हैं, "सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब कोई ऐप लोन देने की शर्त के तौर पर आपके कॉन्टैक्ट्स या पर्सनल डेटा तक पहुंच मांगता है. लोन देने के लिए इसकी कोई जरूरत नहीं है. यह डेटा इकट्ठा करने का एक तरीका है." 

अनुराग समझाते हैं कि कर्ज लेने वाले लोगों को उन ऐप्स से सावधान रहना चाहिए जो मोटी प्रोसेसिंग फीस वसूलते हैं. केवल एक या दो हफ्ते में लोन चुकाने का समय देते हैं और 25% से ज्यादा सालाना ब्याज वसूलते हैं. अनुराग की सलाह है कि ऐप डाउनलोड करने से पहले हमेशा यह वेरीफाई कर लें कि लोन देने वाला संस्थान RBI की तरफ से रेगुलेट होने वाला बैंक या एनबीएफसी का है या नहीं.

लोन का दुष्चक्र कैसे शुरू होता है?

रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली/एनसीआर के एक डिलीवरी ब्यॉय ने एक एक्सीडेंट के बाद अपनी बाइक की रिपेयरिंग और दूसरे खर्चों को पूरा करने के लिए 1 लाख रुपये का ऑनलाइन कर्ज लिया. इस कर्ज को उसे 3 महीने में चुकाना था. जब वह समय पर कर्ज चुकाने में असमर्थ रहा, तो उसने पहले कर्ज को चुकाने के लिए एक और ऑनलाइन कर्ज लिया. फिर इसे चुकाने के लिए एक और जगह से कर्ज लिया. इस तरह वह अलग-अलग लोन देने वाले 3 ऐप्स के चंगुल में फंस गया. 

डिलीवरी ब्यॉय ने कहा, "मैं इसलिए उधार नहीं ले रहा था क्योंकि मुझे अब पैसों की जरूरत थी. मैं अपने पुराने कर्ज को भरने के लिए नया कर्ज ले रहा था. "

बैंक आमतौर पर 10% से 20% के बीच ब्याज दर वसूलते हैं, लेकिन एक सर्वे में पाया गया कि ऑनलाइन कर्ज लेने वाले 45% लोग 25 पर्सेंट सालाना तक का ब्याज चुकाते हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ ऐप्स तो कथित तौर पर सौ पर्सेंट तक सालाना ब्याज वसूलते हैं. इससे कर्ज चुकाना लगभग असंभव हो जाता है. इसके साथ ही मोटी प्रोसेसिंग फीस और लोन की छुपी शर्तें और परेशानी में डाल देती हैं.

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कर्ज लेने से पहले अपने अधिकारों को जानें

विशेषज्ञों का कहना है कि कई कर्जदारों को यह एहसास नहीं होता कि वसूली एजेंटों की भी कानूनी सीमाएं होती हैं. वे कर्जदारों को धमका नहीं सकते, गाली नहीं दे सकते या सार्वजनिक रूप से उन्हें शर्मिंदा नहीं कर सकते. न ही वे पुलिस अधिकारी या जज की तरह बर्ताव कर सकते हैं. हालांकि नियम होने के बावजूद इनका पालन करवाना ही सबसे बड़ी चुनौती है. भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल लोन से जुड़े नियम कायदों को सख्त कर दिया है, फिर भी शिकायतें जारी हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि कर्जदारों को कभी भी यह नहीं मान लेना चाहिए कि उत्पीड़न लोन वसूली प्रक्रिया का हिस्सा है. अगर वे व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग करते हैं या कर्जदारों को डराते हैं, तो इसकी शिकायत RBI लोकपाल तक की जा सकती है. डेटा के दुरुपयोग या आपराधिक धमकी से जुड़े मामलों में साइबर क्राइम विभाग के अधिकारियों को सूचित किया जा सकता है.

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