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बेटी की मौत के बाद आया एग्जाम रिजल्ट, नंबर देखकर नहीं रुक रहे परिवार के आंसू

Sri Ganganagar student topper dies: रावला क्षेत्र के 7 केएनडी गांव की रहने वाली निकिता राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्रा थीं. उनका सपना कलेक्टर बनने का था. इसलिए पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी. लेकिन रिजल्ट आने से सिर्फ 11 दिन पहले ही उनकी मौत हो गई.

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नकिता को पहले से डायबिटीज था. (फोटो-इंडिया टुडे)

राजस्थान के श्री गंगानगर में एक छात्रा की अपना 12वीं का रिजल्ट देखने से पहले ही मौत हो गई. छात्रा ने 93 प्रतिशत अंक के साथ क्लास में टॉप किया था. बुखार के बीच में ही पेपर दिए थे. दिन-रात मेहनत की थी. लेकिन जब रिजल्ट देखकर खुशी मनाने की बारी आई, तो वो इस दुनिया को छोड़कर जा चुकी थी. मृतक का नाम निकिता है.

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रावला क्षेत्र के 7 केएनडी गांव की रहने वाली निकिता राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्रा थीं. उनका सपना कलेक्टर बनने का था. इसलिए पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी. लेकिन रिजल्ट आने से सिर्फ 11 दिन पहले ही उनकी मौत हो गई.

इंडिया टुडे से जुड़े हरनेक सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, निकिता ने आर्ट्स स्ट्रीम से 12वीं की परीक्षा दी थी. परीक्षा के बीच में ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी. उन्होंने फीवर में ही एग्जाम दिया था. बाद में बुखार के साथ उन्हें पीलिया भी हो गया. परिवार वाले उनको इलाज के लिए अस्पताल ले गए. लेकिन उनकी हालत देख डॉक्टर ने बीकानेर भेज दिया, जहां कुछ दिन चले इलाज के बाद निकिता की मौत हो गई.

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निकिता के नाना केशर सिंह ने बताया,

“8वीं क्लास में ही उसे शुगर हो गया था. वो इंसुलिन लिया करती थी. जब वो 12वीं का एग्जाम दे रही थी, तो बीच में ही उसे बुखार हो गया और उसकी तबीयत काफी बिगड़ गई. उसे पीलिया हो गया. उसे फिर अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टर ने उसे एक रात रखा. फिर हनुमानगढ़ भेज दिया. वहां भी उसे एक रात रखा, फिर हालत सीरियस होती देख बीकानेर रेफर कर दिया गया. वहां वो दिन दिन रही. कुछ घंटे वेंटिलेटर पर भी रखा गया. लेकिन इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई.”

निकिता के स्कूल टीचर ने बताया, “वो बहुत अनुशासित लड़की थी. पढ़ाई में अच्छी थी. खाली पीरियड में भी अपनी दोस्तों के साथ टॉपिक डिस्कस करती थी. पॉलिटिकल साइंस में उसके 99 मार्क्स आए थे. इतिहास में 97 मार्क्स. हमें उम्मीद थी कि उसके ऐसे ही नंबर आने थे. उसकी बहन ने भी यहां से पढ़ाई की है. उसके भी 95 मार्क्स थे. संस्था इस दुख में परिवार के साथ है.”

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निकिता के पिता मंगल सिंह और मां चरणजीत कौर बेटी की मौत के सदमे से अब तक नहीं उभरे हैं. उसके परीक्षा परिणाम ने उनका दर्द और बढ़ा दिया है. उनका कहना है कि उनकी बेटी पढ़ने में बहुत होनहार थी. निकिता की दो बहनें और एक भाई है. बड़ी बहन अपने ननिहाल में BSTC कर रही है. छोटी बहन ने इसी साल 10वीं कक्षा और छोटे भाई ने 8वीं क्लास पास की है.

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