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ब्याज दरों में आग लग चुकी है, आप EMI बढ़ाएंगे या लोन की अवधि ?

अगले कुछ दिनों में लगभग सभी बैंक होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन जैसे सभी तरह के लोन पर ब्याज दरें बढ़ाएंगे. यानी आपके लोन की मासिक किस्तों का बढ़ना तय है.

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चार साल में पहली बार आरबीआई ने ब्याज दरों में इजाफे की हरी झंडी दिखा दी है यानी रेपो रेट में करीब आधा फीसदी बढ़ोतरी का फैसला कर डाला. रेपो रेट क्या बढ़ा, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई बैंक और आईडीबीआई बैंक ने अपनी रेपो-लिंक्ड ब्याज दरों में इजाफा कर दिया है. यह बढ़ोतरी उतनी ही हुई है, जितना आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाया है, यानी 40 बेसिस पॉइंट या 0.4 फीसदी. लेकिन यह तो शुरुआत भर है. अगले कुछ दिनों में लगभग सभी बैंक होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन जैसे सभी तरह के लोन पर ब्याज दरें बढ़ाएंगे और संभव है कि यह बढ़ोतरी रेपो रेट के मुकाबले थोड़ी ज्यादा हो. यानी आपके लोन की मासिक किस्तों का बढ़ना तय है. बैंक आपके सामने दो विकल्प रखते हैं कि आप पहले के मुकाबले ज्यादा ईएमआई चुकाएं या ईएमआई तो उतनी ही रहने दें जितनी पहले से चली आ रही है और इसके एवज में लोन की अवधि यानी मासिक किस्तों की संख्या बढ़वा लें. दोनों में से आपके लिए कौन सा विकल्प मुफीद होगा, इस पर बात करते हैं. लेकिन इससे पहले थोड़ा ब्याज के इस बोझ का गणित भी समझते चलें.

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अगर आपने 1 अक्टूबर 2019 के बाद लोन लिया है, तो जाहिर है आपका लोन रेपो लिंक्ड होगा. यानी रेपो रेट के बढ़ने से ब्याज दरें बढ़ेंगी और उसके घटने से घटेंगी. इसका मतलब ये नहीं कि दूसरे पैरामीटर्स जैसे MCLR लिंक्ड लोन के रेट, रेपो से सरोकार नहीं रखते. उनके रेट भी बढ़ेंगे, लेकिन देर-सबेर. फिलहाल रेपो रेट में 40 बेसिस पॉइंट इजाफा किया गया है और वो भी अचानक, जबकि अगले महीने ही आरबीआई की मौद्रिक नीति की समीक्षा होनी है और माना जा रहा है कि तब रेपो रेट में और 75 बेसिस पॉइंट यानी करीब पौने एक फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है. लेकिन असली टेंशन कुछ और है. दुनिया भर में महंगाई रिकॉर्ड तोड़ रही है और अमेरिका से यूरोप तक लगातार ब्याज दरें बढ़ रही हैं. ऐसे में कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो आरबीआई साल के आखिर तक रेपो रेट में बढ़ोतरी 200 बेसिस पॉइंट यानी करीब दो फीसदी तक पहुंचा दे, तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए.

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आरबीआई की सांकेतिक तस्वीर (साभार-आजतक)

 

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EMI और Tenure का हिसाब

फिलहाल, मान लीजिए आपने 15 साल के लिए 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है, जिस पर आपकी मासिक किस्त बनती है 44 हजार 941 रुपये. अब अगर बैंक इंटरेस्ट रेट में 50 बेसिस पॉइंट यानी आधा फीसदी की बढ़ोतरी करता है, तो आपकी ईएमआई हो जाएगी 46 हजार 350 रुपये. करीब 1400 रुपये का मंथली बोझ बढ़ेगा. साल के अंत तक अगर रेट दो फीसदी तक बढ़ जाए तब आपकी ईएमआई हो जाएगी 50 हजार 713 रुपये यानी हर महीने 5,772 का अतिरिक्त खर्चा. लेकिन आप अगर यह मंथली खर्च नहीं उठाना चाहते यानी ईएमआई नहीं बढ़ने देना चाहते तो आधा फीसदी की मौजूदा बढ़ोतरी पर 15 साल की 180 किस्तें बढ़कर 191 हो जाएंगी. यानी लोन की अवधि 11 महीने बढ़ जाएगी. दोनों की तुलना करें तो आप पाएंगे कि दूसरे विकल्प में बैंक का फायदा हुआ है यानी जो अतिरिक्त 11 महीने आप ईएमआई देंगे, वह बढ़ी हुई ईएमआई के साथ 180 किस्तों में किए जाने वाले भुगतान के मुकाबले कहीं ज्यादा है. मामला साफ है कि अगर दे सकतें हैं तो लोन की किस्तों में ही थोड़ा बहुत इजाफा होने दें, यानी लोन की अवधि या कह लें कि मासिक किस्तों की संख्या न बढ़ने दें.

किस्तों की रकम और महीनों की संख्या के असर और अंतर को और सफाई के साथ समझते हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में अगर आज 7 पर्सेंट इंटरेस्ट रेट पर आप 20 साल के लिए 30 लाख रुपये का होमलोन लें, तो आपकी ईएमआई बनेगी 23 हजार 187 रुपये. यही लोन, इसी रेट पर अगर 10 साल के लिए लिया जाए तो ईएमआई होगी 34 हजार 771 रुपये. लेकिन असली फर्क ये है कि अगर आप पूरे 20 साल तक लोन की किस्तें चुकाएं तो आप बैंक को 25 लाख से ज्यादा ब्याज दे चुके होंगे, जबकि लोन की अवधि केवल 10 साल हो तो आप करीब 12 लाख ब्याज ही चुकाएंगे. यानी जितनी लंबी अवधि, उतना ज्यादा ब्याज. हालांकि यह आकलन मोटामोटी है. इसमें यह भी मायने रखता है कि इस लंबी अवधि के किन दिनों में ब्याज दरें कितनी थीं और क्या आपने बीच-बीच में कोई प्री-पेमेंट किया या नहीं.

 
 
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बैंक की सांकेतिक तस्वीर (साभार-आजतक)

 

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FD से बेहतर है लोन चुकाएं

बात प्री-पेमेंट की छिड़ी है तो एक बात और समझ लें कि आपके पास ईएमआई या अवधि बढ़ाने के अलावा एक और विकल्प है. अगर आपके पास अतिरिक्त फंड है या बचत की कुछ रकम कहीं जमा है तो उसे निकालकर लोन का थोड़ा-बहुत रीपेमेंट कर दें. अभी बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट के रेट काफी कम हैं और रेट बढ़ोतरी के दौर में भी एफडी के रेट लोन पर ब्याज के रेट से हमेशा कम ही रहेंगे. ऐसे में एक तरफ आपका लोन चल रहा है, तो दूसरी तरफ एफडी में पैसे रखकर आप अपना ही नुकसान कर रहे होंगे. वैसे भी जब खुदरा महंगाई दर करीब 7 फीसदी चल रही हो, तो एफडी पर 6 फीसदी ब्याज लेकर आप एक तरह से नेगेटिव रिटर्न ही कमा रहे हैं. हमने जितने भी जानकारों से बात की, उनकी यही सलाह है कि अगर आप मौजूदा समय में जब ब्याज दरें पूरी तरह बढ़ी नहीं है, थोड़ा बहुत लोन चुका दें तो आपका ज्यादा फायदा होगा. अगर आपके पास इस लायक पैसे नहीं हैं, लेकिन हाल फिलहाल इनकम इतनी बढ़ी है कि ईएमआई में थोड़ी बढ़ोतरी सह सकते हैं, तो ईएमआई में इजाफा ही होने दें. लोन की अवधि बढ़ाने का विकल्प आखिरी होना चाहिए.

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