The Lallantop

जनता पीएम मोदी की सलाह माने तो देश का कितना पैसा बच सकता है?

कोरोना से पहले यानी साल 2019 में 2.69 करोड़ भारतीयों ने विदेशी यात्रा की थी. लेकिन साल 2020 में यह संख्या लगभग 92 लाख और 2021 में 85 लाख रह गई. रिपोर्ट के मुताबिक इससे भारत को लाखों डॉलर विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली थी.

Advertisement
post-main-image
कोरोना काल में भारत को विदेशी मुद्रा में लाखों डॉलर बचाने में भी मदद मिली थी (फोटो क्रेडिट: Business Today)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से पेट्रोल और डीजल की खपत घटाने की अपील की है. इसके अलावा पीएम ने घर से काम करने (WFH) और अगले एक साल तक विदेश यात्रा टालने की भी सलाह दी है. ऐसे में सवाल यह है कि अगर भारतीय पीएम की बात मानते हुए ऐसा करते हैं तो वे देश के लिए कितनी बचत कर सकते हैं. इसे समझने के लिए इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में कोरोना महामारी के दौरान के आंकड़े साझा किए गए हैं.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
कोरोना काल में यात्राएं टाल कर कितनी बचत की?

कोरोना काल के दौरान जब लॉकडाउन लगा तो करीब दो साल यानी 2020-2021 के दौरान तो भारतीयों ने मजबूरन ही सही काफी कम यात्राएं कीं. लेकिन अभी लॉकडाउन नहीं लगा है और न ही घूमने-फिरने पर किसी तरह का कोई कानूनी प्रतिबंध है. कोरोना से पहले यानी साल 2019 में 2.69 करोड़ भारतीयों ने विदेशी यात्रा की थी. लेकिन साल 2020 में यह संख्या लगभग 92 लाख और 2021 में 85 लाख रह गई. रिपोर्ट के मुताबिक इससे भारत को लाखों डॉलर विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली थी.

यह 'किफायती' गिरावट न केवल विदेश यात्रा पर होने वाले खर्च में दिखी बल्कि हवाई जहाजों के तेल (एटीएफ) की खपत में भी देखी गई. वायरल फैलने के डर से उस समय अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानें तेजी से कम हो गईं. जाहिर है इससे पेट्रोल की खपत में भारी कमी आई थी.

Advertisement

पेट्रोलियम प्लानिंग एवं एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल से लेकर जुलाई 2020 के बीच भारत ने कच्चे तेल के आयात पर साल 2019 की इसी अवधि की तुलना में करीब 2 लाख 28 हजार करोड़ रुपये कम खर्च किए. रिपोर्ट में बताया गया है कि यात्रा में कमी, घर से काम करने (WFH) का चलन बढ़ने, उड़ानों की संख्या में कमी और यात्रा की मांग में गिरावट के कारण 2020 और 2021 में भारत की ईंधन खपत में भारी कमी आई थी.

पेट्रोल-डीजल के मद में कितना बचाया?

भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 90% जरूरत विदेश से आयात कर पूरी करता है. इसलिए पेट्रोल और डीजल का हर लीटर देश के विदेशी मुद्रा भंडार से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है. जब घरेलू ईंधन की मांग घटती है, तो भारत का आयात बिल भी घट जाता है. PPAC के आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि कोविड महामारी वाले सालों के दौरान (2020-21) पेट्रोलियम की खपत में भारी गिरावट आई थी. 

साल 2019-20 की तुलना में, लॉकडाउन वाली अवधि के दौरान पेट्रोल की खपत में लगभग 20 लाख टन की गिरावट आई. वहीं डीजल की खपत में लगभग 1 करोड़ टन की गिरावट आई. अप्रैल से जुलाई 2019 के बीच, भारत ने 7.49 करोड़ टन कच्चे तेल के आयात पर 3 लाख 46 हजार 300 करोड़ रुपये खर्च किए. वहीं, साल 2020 (अप्रैल से जुलाई के बीच) इसी चार महीने की अवधि के दौरान, कच्चे तेल का आयात घटकर 5.72 करोड़ टन हो गया . 

Advertisement

साथ ही आयात बिल गिरकर 1 लाख 18 हजार 600 करोड़ रुपये रह गया था. इसका मतलब यह हुआ कि भारत ने सिर्फ चार महीनों में कच्चे तेल के आयात पर 23.8 अरब डॉलर कम खर्च किए.

हालांकि, कोविड वाला दौर अलग था. उस वक्त यात्राएं बंद या कम करना स्वेच्छा नहीं बल्कि मजबूरी थी. मौजूदा स्थिति में लोग इस तरह के कदम उठाएं या नहीं, ये उनकी इच्छा पर निर्भर है. वैसे भी केंद्र की तरफ स्पष्ट कर दिया गया है कि पीएम मोदी ने जनता को केवल सलाह दी है, सरकार तेल खरीद और योजनाओं में कोई कटौती नहीं करने जा रही.

फिर भी, निजी तौर पर ये लोगों पर छोड़ दिया है कि वे अपने कथित गैर-जरूरी खर्च कम करना चाहें, तो कर सकते हैं. अपनी कार से सैर-सपाटों में कमी, मेट्रो और स्थानीय बसों का ज्यादा इस्तेमाल, हाइब्रिड वर्क मोड (जैसे कि कुछ समय दफ्तर और कुछ समय घर से काम) के जरिये काफी ईंधन की बचत हो सकती है.

ये भी पढ़ें: आपने सोना खरीदना छोड़ा तो क्या होगा? PM मोदी की अपील का नफा-नुकसान समझिए

क्या WFH से भारत की विदेशी मुद्रा बचेगी?

कोविड के दौरान ईंधन की मांग में गिरावट के पीछे सबसे बड़े कारणों में से एक था वर्क फ्रॉम होम (WFH) में अचानक इजाफा. लाखों भारतीयों ने दफ्तरों में रोजाना आना-जाना बंद कर दिया था. दोस्तों-रिश्तेदारों से मिलना-जुलना भी बंद हो गया था. इस बदलाव से शहरी क्षेत्रों में पेट्रोल की खपत में भारी कमी आई. 

ऑनलाइन मीटिंग के कारण बिजनेसमैन ने भी ट्रैवल करना बंद कर दिया था. अब ईरान युद्ध के बीच, पीएम मोदी की अपील अगर जनता बिना प्रतिबंध लगाए मान लेती है और लोग घर से काम करने की व्यवस्था अपनाते हैं तो पेट्रोल और डीजल की मांग में काफी कमी आ सकती है.

ये भी पढ़ें: न युद्ध रुक रहा और न रुपये की गिरावट, दोनों कितना रुलाएंगे?

विदेश यात्रा न करने से क्या फायदा होगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीयों से गैर-जरूरी विदेश यात्रा से बचने का भी आग्रह किया है. विदेश यात्रा भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को दो तरह से प्रभावित करती है. पहला, विदेश यात्रा करने वाले भारतीय होटल, घूमने-फिरने, खाने-पीने  और शॉपिंग वगैरा पर विदेशी मुद्रा में भारी मात्रा में पैसा खर्च करते हैं. 

दूसरा, लाखों यात्रियों को ले जाने वाली एयरलाइंस भारी मात्रा में एटीएफ की खपत करती हैं. इससे आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता बढ़ जाती है. इससे देश के आयात बिल पर और दबाव पड़ता है. सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि कोविड महामारी के दौरान एटीएफ की खपत में भारी गिरावट आई थी. साथ ही, विदेश यात्राएं टलने से काफी पैसा बचा था.

अब विदेश यात्राएं कोरोना महामारी से पहले के समय के मुकाबले काफी ज्यादा हो रही हैं. साल 2024 में 3 करोड़ से अधिक भारतीयों ने विदेश यात्रा की थी. अगर लोग विदेश यात्राओं को टालते हैं तो ये भारत के चालू खाता घाटे पर दबाव को कम कर सकता है. चालू खाता घाटा का मतलब किसी देश के वस्तु और सेवाओं के आयात का मूल्य उसके निर्यात से अधिक होना है.

सोने की खरीद टालकर कितनी बचत होगी?

ईंधन, घूमने-फिरने के अलावा पीएम मोदी ने सोने की खरीद के मामले में भी एक साल संयम बरतने की बात कही है. इससे भी भारत को विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है. भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातकों में से एक है. सोने के बड़े आयात से व्यापार घाटा बढ़ता है क्योंकि इस कीमती धातु की खरीद का अधिकांश हिस्सा विदेशी मुद्रा के माध्यम से होता है.

वीडियो: शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ को मारने के लिए सुपारी दी गई? CBI की जांच में क्या सामने आया?

Advertisement