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Ola वाले Bhavish Aggarwal की AI कंपनी ने 300 करोड़ रुपये कमाए, लेकिन असली गेम क्या?

Ola वाले Bhavish Aggarwal अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड स्टार्टअप Krutrim से पलटी मार रहे हैं. टेक और बिजनेस की भाषा में इसे pivots (पुनर्गठन) करना कहते हैं. Krutrim अब चिप से नहीं चिपकेगा बल्कि AI पर फोकस करेगा.

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Krutrim अब चिप नहीं बनाएगा

Ola वाले Bhavish Aggarwal याद हैं. याद होंगे ही क्योंकि वो आपको उन्हें भूलने का मौका कहां देते हैं. समझ ही गए होंगे आप कि अपना इशारा किधर है. खैर क्या आपको Krutrim याद है? अग्रवाल साब का यूनिकॉर्न प्रोजेक्ट जिसमें वो सेमीकंडक्टर चिप से लेकर LLM (large language models) बनाने वाले थे. बंद हो गया क्या? अरे नहीं बस इसका AI असिस्टेंट Kruti कुछ दिनों से ऑफलाइन था. Krutrim में छंटनी और कई दूसरी दिक्कतों के चलते Kruti कंपनी के ऐप्स और सर्वर से भी ऑफलाइन था. ठीक बात मगर अभी खबर क्या है.

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खबर ये है कि भाविश अग्रवाल Krutrim से अपना गेम बदल रहे हैं. टेक और बिजनेस की भाषा में इसे pivots (पुनर्गठन) करना कहते हैं. Krutrim अब चिप से नहीं चिपकेगा बल्कि AI पर फोकस करेगा.

Krutrim स्टार्ट डाउन हो गया

भाविश अग्रवाल के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड स्टार्टअप क्रुत्रिम ने अपना ध्यान एआई क्लाउड सेवाओं पर लगाया है. इतना ही नहीं, वित्त वर्ष 2026 के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये का रेवेन्यू भी बनाया है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है. पढ़ने में अच्छा लगेगा मगर ये उस कंपनी की बात हो रही है, जिसने पहले दिन ही 1 बिलियन की वैल्यूएशन दर्ज की थी.

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क्रुत्रिम अब लार्ज लैंग्वेज मॉडल और सेमीकंडक्टर चिप्स नहीं बनाएगी बल्कि बिजनेस के लिए क्लाउड-आधारित कंप्यूटिंग और टूल्स सहित एआई इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर फोकस करेगी. अब जरा एक साल पीछे चलते हैं. Entrackr की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल, कंपनी ने 150 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी की थी. लगभग उसी समय, इसकी प्रमोटर कंपनी ओला इलेक्ट्रिक ने क्रुत्रिम डेटा सेंटर के लिए धन जुटाने के लिए 10.71 करोड़ शेयर, यानी अपनी इक्विटी का लगभग 2.43 फीसदी गिरवी भी रखा था. माने क्रुत्रिम में सब ठीक नहीं था.

हालांकि अभी के लिए कंपनी कह रही है कि उसको तकरीबन 25 से ज्यादा कंपनियों के प्रोजेक्ट मिल गए हैं. नए बिजनेस के लिए उसको फंड भी नहीं चाहिए. लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक शुरुआती कारोबार का एक हिस्सा ओला इकोसिस्टम के भीतर से आया है. माने ये सवाल भी बना हुआ है कि इस राजस्व का कितना हिस्सा बाहरी ग्राहकों से आता है.

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अब ऐसे में पलटी मारना कंपनी को कितनी स्पीड देगा वो जल्द पता चल ही जाएगा. क्योंकि इंडिया के 'एलन मस्क' की असली कंपनी की मार्केट में स्पीड एकदम स्लो है. ई-स्कूटर में मार्केट लीडर रही ओला अभी 5वें नंबर पर आ गई है.  

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