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न राजनाथ, न योगी आदित्यनाथ, इस नेता को यूपी का सीएम बनाएगी बीजेपी?

उत्तर प्रदेश में 11 मार्च, 2017 का हासिल ये रहा कि मोदी-लहर बरकरार है. यूपी की जनता ने बीजेपी को 312 सीटों का प्रचंड बहुमत दिया. इस परिणाम के बाद नोटबंदी की परेशानी, दलितों पर हमले और वोटों के ध्रुवीकरण जैसे मुद्दे कहीं पीछे छूट गए हैं. लेकिन जितना मनोरंजन यूपी के चुनावी नतीजों ने किया है, उससे कहीं दिलचस्प ये देखना होगा कि अब भारतीय जनता पार्टी लखनऊ की गद्दी पर किसे बैठाएगी.

रवायत के मुताबिक बीजेपी ने सीएम कैंडिडेट घोषित नहीं किया था. ऐसे में राजनाथ से लेकर योगी आदित्यनाथ, स्मृति ईरानी और महेश शर्मा जैसे कई नेताओं का नाम चर्चा में था. लेकिन सूबे में पार्टी को जिस तरह हर वर्ग का वोट मिला है, ऐसे में सीएम चुनने में सोशल इंजीनियरिंग का ख्याल रखना लाजिमी है. ओबीसी वर्ग से आने वाले केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाना और ज्यादातर सवर्णों को टिकट देना पार्टी की इसी सोशल इंजीनियरिंग का उदाहरण था.

प्रदेश अध्यक्ष होने की वजह से मौर्य का दावा पहले से मजबूत है. सूबे में पार्टी की सफलता वह अपने हक में दिखा सकते हैं. वो अलग बात है कि वोट सिर्फ नरेंद्र मोदी के नाम पर पड़ा है. अगर पार्टी ओबीसी चेहरे को सीएम बनाती है, तो केशव को किनारे करना मुश्किल होगा. लेकिन अगर पार्टी ने सवर्ण चेहरा चुनना चाहा, तो उसके पास बेदाग छवि वाला एक नेता है, जो मनोहर लाल खट्टर, देवेंद्र फडणवीस, सर्वानंद सोनोवाल और विजय रूपानी की लीग में शामिल हो सकता है.

ये नेता हैं दिनेश शर्मा

दिनेश शर्मा
दिनेश शर्मा

53 साल के दिनेश शर्मा लखनऊ के मेयर हैं और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी. शर्मा को नरेंद्र मोदी और अमित शाह, दोनों का बेहद विश्वस्त माना जाता है. 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत दर्ज करने के बाद मोदी और शाह ने दिनेश को अपने गृहप्रदेश गुजरात का प्रभारी बनाया था. यानी उनके पास आलाकमान का पूरा भरोसा है. पिछले साल दशहरे पर नरेंद्र मोदी ने लखनऊ के लक्ष्मण मैदान में जो रैली की थी, उसकी जिम्मेदारी भी दिनेश शर्मा के कंधों पर थी. इस रैली में मोदी का ‘जय श्री राम’ बोलना खूब चर्चित हुआ था. एक और महत्वपूर्ण बात, शर्मा के पास RSS का समर्थन भी है.

महाराष्ट्र, हरियाणा और असम में पार्टी ने ऐसे नेताओं को सीएम बनाया, जो पहले से चर्चा में नहीं थे. पद मिलने से पहले राज्य के बाहर कम ही लोग उन्हें जानते थे. खास रणनीति के तहत पार्टी ने ऐसे नेता चुने, जिनकी निजी महत्वाकांक्षा कम थी और वो हर परिस्थिति में राष्ट्रीय नेतृत्व के अंडर रहकर ही काम करेंगे. शर्मा इस खांचे में फिट बैठते हैं. वो सीएम बने, तो लखनऊ का संचालन भी दिल्ली से हो सकता है.

दिनेश 2008 में पहली बार लखनऊ के मेयर बने थे. 2012 में जब दोबारा चुनाव हुए, तो उन्होंने कांग्रेस के नीरज वोरा को 1.71 लाख वोटों के अंतर से हराया था. उस समय कांग्रेस में रहे वोरा बाद में बीजेपी में शामिल हो गए और इस बार के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें लखनऊ नॉर्थ सीट से उतारा था, जहां उन्होंने सपा कैंडिडेट अभिषेक कुमार को 27,276 वोटों से हरा दिया. वोरा को 1,09,315 वोट मिले.

जीतत के बाद दिनेश शर्मा
जीतत के बाद दिनेश शर्मा

पिछले साल जब दी लल्लनटॉप ने दिनेश शर्मा से बात की थी, तो ‘विकास की राजनीति’ के फायदे गिनाते हुए शर्मा ने कहा था, ‘विकास की राजनीति के नतीजे गुजरात में देखने को मिले हैं. आपको पता ही नहीं चलता कि कौन किस जाति का आ जाएगा. कौन सा पद किसको मिल जाएगा. वहां पर योग्यता के हिसाब से समाज चलता है.’

आखिरी चरण के मतदान के बाद काउंटिंग से पहले अखिलेश के उस बयान ने खलबली मचा दी थी, जिसमें उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से मायावती से हाथ मिलाने का संकेत दिया था. ये दिनेश शर्मा ही थे, जिन्होंने पिछले साल ही अखिलेश को मायावती संग गठबंधन का न्योता दे दिया था. तब तक सपा-कांग्रेस गठबंधन फाइनल नहीं था, लेकिन सुगबुगाहट थी.

दी लल्लनटॉप के साथ बातचीत के दौरान दिनेश शर्मा
दी लल्लनटॉप के एडिटर सौरभ द्विवेदी के साथ बातचीत के दौरान दिनेश शर्मा

हमारे साथ बातचीत में उन्होंने कहा था, ‘जो कमजोर होता है, वो गठजोड़ की बात करता है. जो मजबूत होता है, वो खुद से लड़ता है. मेरा तो निमंत्रण है यूपी के मुख्यमंत्री महोदय को कि वो अपनी बुआजी को भी साथ कर लें. परिवार तक सीमित पार्टियों को विस्तार की जरूरत होती है.’

यूपी में सरकार बनाने के बाद अब बीजेपी के पास बहाने बनाने का मौका नहीं होगा. जिस विकास के नाम पर उसने वोट बटोरा है, वो उसे अब डिलीवर करना होगा. फिर चाहे सड़क हो, गंगा-सफाई हो या बिजली आपूर्ति. सोशल मीडिया पर राम मंदिर की भी बयार है. दिनेश शर्मा पहले ही दावा कर चुके हैं कि अगर बीजेपी सरकार में आई, तो 24 घंटे बिजली दी जाएगी.

देखते हैं यूपी में सेहरा किसके सिर सजता है.

देखिए दिनेश शर्मा का इंटरव्यू:


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