Submit your post

Follow Us

ज़हीर खान: जिसने एक वर्ल्ड कप हराया, तो दूसरा जिता दिया

116.37 K
शेयर्स

2 अप्रैल 2011. वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई. पूरा देश टीवी सेट से चिपका हुआ. स्टेडियम में शोर अपने चरम पर. बॉलर, बॉल फेंकने को दौड़ता है. उसका चौथा ओवर. पहले तीन ओवर मेडेन जा चुके हैं. एक भी रन नहीं. इनिंग्स का सातवां ओवर. इसकी फेंकी हुई 18 गेंदें और सामने वाली टीम एक भी रन बनाने में नाकाम रही. लेफ़्ट आर्म ओवर द विकेट. पहली गेंद. लेंथ बॉल, ऑफ स्टम्प की लाइन में टप्पा खाती हुई. बैट्समैन तक पहुंचते-पहुंचते अच्छा बाउंस पा चुकी थी. साथ ही बाहर की ओर जाने लगी. बैट्समैन न चाहते हुए भी अपना बल्ला छुआ बैठा. सहवाग अपने साइड में डाइव मार के आगे की कार्रवाई पूरी करते हैं. वानखेड़े में शोर और भी बढ़ जाता है. टीवी देखते लोग तालियां पीटते हैं. बैट्समैन पवेलियन की ओर और बॉलर अपने दोनों हाथ उठाये टीम की ओर चलने लगता है. इंडिया को पहला विकेट मिल चुका था. शेर के मुंह में खून लग चुका था. इसी शेर ने उस शाम एक शिकार और किया. कुछ घंटे बाद इंडिया वर्ल्ड कप जीत चुका था. सफ़लता! जश्न! प्यार! और ज़हीर खान!

zaheer khan


*फ्लैशबैक*

ठीक 8 साल 10 दिन पहले. जोहांसबर्ग, साउथ अफ्रीका. इंडिया अपने दूसरे वर्ल्ड कप फाइनल में था. सामने थी ऑस्ट्रेलिया. ये ऑस्ट्रेलिया का वो रूप था जिसे अजेय कहा जाता था. एक-एक प्लेयर अपने अंदर डायनामाइट लेकर चलता था. वर्ल्ड कप में पहले भी ये दोनों टीमें भीड़ चुकी थीं. इंडिया हार चुकी थी. नतीज़ा – इंडिया पर बढ़ा हुआ प्रेशर. सचिन पर परफॉर्म करने का प्रेशर. दादा पर शॉर्ट बॉल के सामने टिके रहने का प्रेशर. मगर उसके पहले था बॉलर्स पर ऑस्ट्रेलिया को रोकने का प्रेशर.

पहली गेंद. ज़हीर खान. सामने ऐडम गिलक्रिस्ट. सामने वर्ल्ड कप जीतने का ख्वाब. लेफ़्ट आर्म ओवर द विकेट. नो बॉल. ये प्रेशर की कारस्तानी थी. तेज़ गेंद फेंकने का प्रेशर. अड्डे पर गेंद फेंकने का प्रेशर. कोई मौका न देने का प्रेशर. एक ओवर में 6 गेंदें होती हैं. ज़हीर ने उस रोज़ कुल 10 गेंदें फेंकीं. 15 रन आये. 8 रन एक्स्ट्रा आये. और फिर 88.2 ओवर फेंके जाने के बाद इंडिया वर्ल्ड कप हार गया.

अगले दिन अखबार में खबर छपी, “It all started with a no ball.” ज़हीर पर ठीकरा फोड़ दिया गया था. कहते हैं उस पहले ओवर ने मैच हरा दिया था. बाकी के 88.2 ओवर तो औपचारिकता मात्र थे.


8 साल 10 दिन. और इतना बड़ा बदलाव. वर्ल्ड कप हराने से लेकर जिताने तक. ये सफ़र ज़हीर खान की क्रिकेट में कुल जमा कमाई है. और इस कमाई पर कोई टैक्स नहीं लग सकता. ये सब कुछ ज़हीर खान का है. और साथ में है भरपूर प्यार और इज्ज़त.zaheer khan


ज़हीर खान. स्विंग बॉलिंग का उस्ताद. गेंद जिसका कहना मानती है. जिसके इशारों पर वहीं पहुंचती है जहां उससे कहा जाता है.


एक अग्रेसिव रन-अप, बॉलिंग स्ट्राइड पर आने पर एक ऊंचा जम्प और कुल मिलाके एक सॉलिड ऐक्शन ज़हीर खान की गेंदों को 140 के आस-पास रखता था. इसपर लेफ़्ट आर्म ऐक्शन चार चांद लगा देता था. लेफ़्ट आर्म पेसर में कुछ ऐसा होता ही है जो राइट आर्म पेसर्स में नहीं मिल पाता. आप चाहते हैं कि वो गेंद फेंकते रहे और आप देखते रहें. वो बैट्समैन के लिए नहीं मैच देखने वालों के लिए गेंद फेंकते हैं. फिर वो चाहे ज़हीर हों या अकरम, नैथन ब्रेकेन हों या मुहम्मद आमिर.

दिलीप ट्रॉफी में ज़हीर, आकाश चोपड़ा और वीरेंद्र सहवाग के ख़िलाफ़ बॉलिंग कर रहे थे. पिच हरी थी, मौसम ठण्डा और ज़हीर गरम. आकाश चोपड़ा खुद कहते हैं कि उन्होंने आज तक ऐसी बाउन्सरें नहीं खेली थीं जिनसे उन्हें अपनी सेफ्टी पर खतरा मालूम हुआ हो. ज़हीर बॉल-दर-बॉल अग्रेसिव हुए जा रहे थे. वैसे तो बाउंसर से बचने के तरीके होते हैं लेकिन ज़हीर का ऐंगल ऐसा था कि सहवाग और आकाश दोनों को ही बहुत तेज़ी में गेंद के रास्ते से अलग हटना पड़ रहा था. बाउंसर ऐसी कि कंधे तक उठें पर सर के ऊपर न पहुंचे.

सहवाग ज़हीर का गेम जानते थे. लिहाज़ा आकाश को कहा कि सिर्फ उन्हीं गेंदों को खेले जो लेग स्टम्प या उसके बाहर गिर रही हों. बाकी सभी को छोड़ दें. आकाश इस असमंजस में थे कि मिडल या ऑफ स्टम्प पर पड़ी हुई गेंदें अगर अन्दर आ गयी तो क्या होगा? सहवाग ने निश्चिन्त करवाया कि गेंदें अन्दर नहीं आयेंगी. आकाश थोड़ी देर में सहज हो चले और ज़हीर को खेल पाने लगे. लेकिन सवाल ये आया कि आखिर उनकी गेंदें अन्दर क्यूं नहीं आ रही थीं? अगर डोमेस्टिक सर्किट में दो बल्लेबाजों ने उनके गेम को भांप लिया है तो इंटरनेशनल लेवल पर क्या होगा?

इस सवाल का भी जवाब मिला. ठीक दिलीप ट्रॉफी के बाद. ज़हीर ने काउंटी खेलना शुरू किया. वोर्स्टर की ओर से. अपनी स्पीड को हल्का सा कम किया, गेंद फेंकने से पहले लेने वाली जम्प को हल्का सा काटा और गेंद में स्विंग बढ़ा दी. ज़हीर की कलाई अब गेंद के पीछे रहने लगी और बॉल की सीम स्लिप की बजाय स्टम्प को देख रही थी. अब सीधे हाथ से खेलने वाले बैट्समैन के लिए गेंद अन्दर आने लगी थी. आकाश चोपड़ा और सहवाग खुशनसीब थे कि ज़हीर ने उनके साथ ऐसा नहीं किया. लेकिन वोर्स्टर को इसका फ़ायदा मिला.

Zaheer Khan
Difference in Zak’s jump over the years

अपने 13 साल के क्रिकेट कैरियर में ज़हीर ने रिवर्स स्विंग करने वाले बॉलर्स की लिस्ट में अपना नाम काफी ऊंचा कर लिया. वो ऐसा बॉलर बन गया जो आखिरी पल तक गेंद की शाइन को छुपाये रखता था. रिलीज़ से ठीक पहले तक बल्लेबाज को नहीं मालूम रहता था कि गेंद की कौन सी साइड चमक रही है और कौन सी खुरदुरी है. ऐसे में स्विंग को समझना मुश्किल था. मज़े की बात ये कि सचिन और द्रविड़ भी उसी टीम में थे जिसमें ज़हीर. सचिन और द्रविड़ की एक सांठ-गांठ बहुत ही फ़ेमस है. एक समय में सचिन को किसी बॉलर के ऐक्शन की वजह से गेंद के शाइनी साइड के बारे में मालूम नहीं चल रहा था. उन्हें गेंद की स्विंग समझने में तकलीफ़ हो रही थी. ऐसे में उन्होंने द्रविड़ से सेटिंग की. द्रविड़ नॉन-स्ट्राइकिंग एंड पर खड़े होकर बॉलर का हाथ देखते रहते थे. जब वो गेंद फेंकने वाला होता तो बल्ले को उस हाथ में रख लेते थे जिस साइड गेंद की शाइन होती थी. सचिन बैटिंग करते हुए बॉलर की बजाय द्रविड़ का बैट देख रहे होते थे.


ज़हीर खान यानी लेफ़्ट हैंड बैट्समैन के लिए एक बुरा सपना.


ग्रीम स्मिथ, कुमार संगरकारा, हेडेन, एंड्रू स्ट्रॉस और टिम मैकिन्टोश. पांचों बैट्समैन लेफ़्ट हैण्डेड. ज़हीर खान के सबसे ज़्यादा बार आउट किये गए बैट्समैन. राइट हैण्डेड बैट्समैन में सबसे ज़्यादा किसी ने गच्चा खाया है तो इयान बेल. ज़हीर के खिलाफ़ बेल ने 44 गेंदों में मात्र 22 रन बनाये हैं और आउट हुए हैं पांच बार. आउट हुए बैट्समैन में दो बड़े नाम और शुमार हैं – माइकल क्लार्क और रिकी पोंटिंग. दोनों को पांच-पांच बार.

zaheer khan

ज़हीर खान के सबसे ज़्यादा और फ्रीक्वेंट शिकार – ग्रीम स्मिथ, कुमार संगरकारा, हेडेन, एंड्रू स्ट्रॉस, टिम मैकिन्टोश, इयान बेल, माइकल क्लार्क, रिकी पोंटिंग. यानी ज़हीर के साथ खेलने वाले सबसे बेहतरीन बल्लेबाज. बचते हैं सिर्फ़ इंडियन बैट्समेन. जिन्हें न आउट करना ज़हीर की मजबूरी थी. सभी शिकार टॉप-ऑर्डर बैट्समेन. ऐसे बॉलर किसी कप्तान के लिए एक खूबसूरत ख्वाब होते हैं.

2003 वर्ल्ड कप के आस पास टीवी पर एक ऐड आता था. एक लड़का बायें हाथ से तालाब में कंकड़ फेंकता था. ये लड़का कंकड़ यूं फेंकता था मानो उनमें हवा भरी हो. कंकड़ पानी में डूबता नहीं था. सतह पर टप्पे खाता था. एक नहीं 5-6 बार. और वो लड़का आगे चलकर ज़हीर खान बना. हमें मालूम है कि ऐड्स में इमोशन्स को लेकर ही असली खेल खेला जाता है. मगर ज़हीर सच मुच ऐसा कर सकते थे. ऐसा कम से कम मालूम तो देता ही है. ज़हीर गेंद को यूं तैराता था जैसे वो उसकी किरायेदार हो. ज़हीर खान जब हरे मैदान पर हाथ में लाल गेंद लेकर दौड़ लगा रहा होता था तो वो दृश्य उतना ही सुख देने वाला होता था जितना घर में मां के हाथों अपने मनपसंद खाने को बनते देखना होता था. मैं मां के हाथ का खाना और ज़हीर को हाथ में गेंद लेकर दौड़ते हुए देखना वाकई मिस करता हूं.


ये भी पढ़ें:

धोनी वो बाप है, जिसने बच्चे की साइकिल छोड़ दी है और गुमान से खड़ा है

IPL से अश्विन के बाहर होने की असली वजह ये है

‘दिल किया स्टंप उखाड़ लूं और कोहली के शरीर में घोंप दूं’

जब सचिन ने मोहाली में अफ्रीदी का घमंड तोड़ा था, फ़ाइनल स्कोर 8-0

 

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

गंदी बात

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

उस अंधेरे में बेगम जान का लिहाफ ऐसे हिलता था, जैसे उसमें हाथी बंद हो.

PubG वाले हैं क्या?

जबसे वीडियो गेम्स आए हैं, तबसे ही वे पॉपुलर कल्चर का हिस्सा रहे हैं. ये सोचते हुए डर लगता है कि जो पीढ़ी आज बड़ी हो रही है, उसके नास्टैल्जिया का हिस्सा पबजी होगा.

बायां हाथ 'उल्टा' ही क्यों हैं, 'सीधा' क्यों नहीं?

मां-बाप और टीचर बच्चों को पीट-पीट दाहिने हाथ से काम लेने के लिए मजबूर करते हैं. क्यों?

फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां

और बिना बैकग्राउंड देखे सेल्फी खींचकर लगाने वाली अन्य औरतें.

'अगर लड़की शराब पी सकती है, तो किसी भी लड़के के साथ सो सकती है'

पढ़िए फिल्म 'पिंक' से दर्जन भर धांसू डायलॉग.

मुनासिर ने प्रीति को छह बार चाकू भोंककर क्यों मारा?

ऐसा क्या हुआ, कि सरे राह दौड़ा-दौड़ाकर उसकी हत्या की?

हिमा दास, आदि

खचाखच भरे स्टेडियम में भागने वाली लड़कियां जो जीवित हैं और जो मर गईं.

अलग हाव-भाव के चलते हिजड़ा कहते थे लोग, समलैंगिक लड़के ने फेसबुक पोस्ट लिखकर सुसाइड कर लिया

'मैं लड़का हूं. सब जानते हैं ये. बस मेरा चलना और सोचना, भावनाएं, मेरा बोलना, सब लड़कियों जैसा है.'

ब्लॉग: शराब पीकर 'टाइट' लड़कियां

यानी आउट ऑफ़ कंट्रोल, यौन शोषण के लिए आमंत्रित करते शरीर.

औरतों को बिना इजाज़त नग्न करती टेक्नोलॉजी

महिला पत्रकारों से मशहूर एक्ट्रेसेज तक, कोई इससे नहीं बचा.

सौरभ से सवाल

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा. और अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया.

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

'सिर्फ तुम' के बाद क्या-क्या किया उन्होंने?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

सबसे बड़े खान का नाम सुनकर आपका फिल्मी ज्ञान जमीन पर लोटने लगेगा. और जो झटका लगेगा तो हमेशा के लिए बुद्धि खुल जाएगी आपकी.

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

कहां है टेलीविज़न का वो आइकॉनिक किरदार निभाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

मंदाकिनी जिन्हें 99 फीसदी भारतीय सिर्फ दो वजहों से याद करते हैं

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

‘दामिनी’ के जरिए नई ऊंचाई तक पहुंचा मीनाक्षी का करियर . फिर घातक के बाद 1996 में उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री को बाय बोल दिया.

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

केआरके इंटरनेट एज का ऐसा प्रॉडक्ट हैं, जो हर दिन कुछ ऐसा नया गंधाता करना रचना चाहता है.

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एडवेंचर ऑफ टॉर्जन की हिरोइन किमी काटकर अब ऑस्ट्रेलिया में हैं. सीधी सादी लाइफ बिना किसी एडवेंचर के

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

बहुत समय पहले से बहुत समय बाद की बात है. इलाहाबाद में थे. जेब में थे रुपये 20. खरीदी हंस...

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते.