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'लोग गलतियां करते थे, ताकि बाई की गालियां नसीब हों'

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बीकानेर के हैं महेंद्र मोदी. बड़े दिनों से रेडियो से जुड़े हैं. विविध भारती के चैनल हेड रहे. एनाउंसर के तौर पर भी अच्छे से जाने जाते हैं. कल हमने अल्लाह जिलाई बाई के बारे में कुछ साझा किया. उनने भी अपनी यादें बांटी. अल्लाह जिलाई बाई के किस्से बताए. उन दिनों की बातें जब वो बीकानेर रेडियो स्टेशन पर रिकॉर्डिंग के लिए आया करती थी.


श्रीमती अल्लाह जिलाई बाई की बात चलती है तो मेरी आंखों के सामने उनकी वो रुआबदार शख्सियत आ जाती है, जिस शख्सियत से सभी रेडियो वाले घबराया करते थे. मेरा सौभाग्य है कि सन 1977 से 1981 तक वो जब भी आकाशवाणी बीकानेर पधारीं. 90% रिकॉर्डिंग मैंने ही की. बहुत दबंग थीं. लेकिन साथ ही बहुत सरल भी. गुस्सा जल्दी जाती थीं तो पिघलकर मोम भी जल्दी ही हो जाती थीं.

ये सही है कि गालियां निकालने से बिलकुल नहीं हिचकिचाती थीं मगर जब वो गालियां देते-देते जोर से खिलखिला कर हंस पड़ती थीं. तो उनके चेहरे की खूबसूरती दस गुना बढ़ जाती थी. हालांकि मुझे उनसे गालियां सुनने का सौभाग्य कभी नहीं मिला. मगर मैंने देखा कि उनकी गालियां देते-देते हंस पड़ने की अदा से मोहित हो. कई लोग कई बार जानबूझकर ऐसी गलतियां करते थे कि बाई जी के मुंह से गालियों की बौछार हो.

हमारे एक साथी थे ढोलकवादक श्री दयाल पंवार जो ढोलक के तो मास्टर थे ही, हारमोनियम भी खूब अच्छा बजाते थे. बाई जी जब रिकॉर्डिंग के लिए आती थीं तो दयाल जी का होना ज़रूरी होता था. दयाल जी उनके मुंह भी बहुत लगे हुए थे. उनसे मजाक भी कर लेते थे, लेकिन अक्सर वो मजाक दयाल जी पर बहुत भारी पड़ती थीं. बाई जी उनके मजाक का ऐसा जवाब देती थीं कि दयाल जी का चेहरा शर्म से लाल हो जाता था. कई बार तो उन्हें दुम दबाकर भागना पड़ जाता था. फिर वो हम लोगों से कहतीं “अरे कठे गया दयाल जी, बुलाओ बियाने, नईं तो मैं रिकॉर्डिंग नईं करवाऊं” और शर्माते हुए दयाल जी स्टूडियो में आकार अपना साज़ संभाल लेते थे. मगर बाई जी काफी देर तक बातों बातों में उनकी चुटकियां लेती रहती थीं

यानि ज़्यादातर गालियां मैंने उन्हें प्यार से देते ही सुना था. हां एक वाकया ऐसा ज़रूर याद आ रहा है जब मैंने उन्हें गुस्से में गालियां देते सुना था. वो रिकॉर्डिंग के लिए आईं तो मैं और म्यूज़िक कम्पोज़र डी एस रेड्डी (जो संगीतकार मदन मोहन के सहायक रह चुके थे) उनकी अगवानी करने बाहर आये. हम दोनों ने उनका अभिवादन किया. रेड्डी जी ने उन्हें प्रणाम कहा और मैं कहा बाई जी सिलाम (सलाम). वो जानती थीं कि मैं बीकानेर का रहने वाला हूं, इसलिए उन्हें बीकानेर में प्रचलित अभिवादन ही करना था उन्हें. जवाब में हमें कई आशीषें देती हुई वो कार से उतरीं. वो आगे आगे और हम पीछे पीछे.

इत्तेफाक से उसके एक दिन पहले ही उनके ठुमरी दादरा का कार्यक्रम हमारे केंद्र से प्रसारित हुआ था. वो जैसे ही ऑफिस में घुसीं, सामने हमारे नए-नए ज्वाइन किये एक कार्यक्रम अधिकारी खड़े हुए थे. हाथ जोड़कर उन्होंने बाई जी को अपने कमरे की तरफ चलने का इशारा किया. बड़ी ही सरलता से बाई जी उनके कमरे की तरफ मद गईं. यहां तक तो सब कुछ ठीक था, न जाने उनके कमरे में घुसकर कुर्सी पर बैठने से पहले ही हमारे कार्यक्रम अधिकारी को अपना संगीत का ज्ञान बघारने की क्या सूझी कि बोले ” बाई जी कल रात को आपका कार्यक्रम सुना था. आपने ठुमरा और दादरी बहुत अच्छे गाए.” उनके मुंह से ठुमरा-दादरी सुनते ही उनका पारा एक दम सातवें आसमान पर चला गया. वो जोर से चिल्लाईं ” मोदी जी, कुण है ओ बेवकूफ़ ?”

मैं क्या करता? मुझे जवाब तो देना ही था, मैंने धीरे से कहा ” जी ये हमारे कार्यक्रम अधिकारी हैं, अभी अभी ज्वाइन किया है.” अपने माथे पर जोर से हाथ मारकर चिल्ला पड़ीं वो “आछा भाग फूट्या आकाशवाणी रा, इसा अधिकारी आय्ग्या तो डूब’र रैसी आकाशवाणी. (अच्छे भाग्य फूटे आकाशवाणी के, ऐसे अफसर आ गए हैं तो डूबकर रहेगा आकाशवाणी) और वो दनदनाती हुई कमरे से निकलकर स्टूडियो की तरफ चल पडी. उस दिन वो पूरे समय बहुत विचलित रहीं. उन कार्यक्रम अधिकारी महोदय ने आकर उनसे माफी भी मांगी. मगर तीन घंटे स्टूडियो में रहने के बावजूद उनका मन रिकॉर्डिंग में नहीं लगा और वो बिना रिकॉर्डिंग करवाए चली गईं.

उनकी वो रिकॉर्डिंग दो तीन दिन बाद हुई और उनके मुंह से मानो सही भविष्यवाणी ही हुई थी “अगर ऐसे अफसर आ गए हैं तो आकाशवाणी डूब कर रहेगा.” और सचमुच आकाशवाणी रसातल में चला गया. आप जानते हैं आकाशवाणी बीकानेर में आकाशवाणी बीकानेर की ही उस अज़ीम कलाकार की गिनती की रिकॉर्डिंग मौजूद है .

कुछ दिन पहले मैं एक अन्य कलाकार मांगीबाई पर फिल्म शूट करने से पूर्व बाई जी की रिकॉर्डिंग्स का अध्ययन करने बीकानेर गया तो देखा कि बहुत सारे टेप्स इरेज कर दिए गए हैं. मेरी आंखें भर आईं, मेरी आंखों के सामने दयाल जी, महेंद्र भट्ट जी, मुंशी खान जी, नज़र मोहम्मद जी, रेड्डी जी सबके चेहरे घूम गए जिन्होंने इन रिकॉर्डिंग्स के लिए अपना खून पसीना दिया था. साथ ही कार्यक्रम अधिकारी जी के कमरे में खडी गुस्से में लाल हुईं अल्लाह जिलाई बाई का चेहरा आ गया और उनकी आवाज़ कानों में गूंज उठी “आछा भाग फूट्या आकाशवाणी रा..”

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