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मीना कुमारी की याद में डूबे कमाल अमरोही ने धर्मेंद्र का मुंह काला करवाया था

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अगर हिंदी सिनेमा की सबसे प्रसिद्ध 10 म्यूज़िकल फिल्मों की लिस्ट बनाई जाए तो उसमें महल, मुगल-ए-आज़म और पाकीजा की जगह पक्की होगी. इन तीन फिल्मों के साथ एक कमाल की बात जुड़ी है. इन तीनों फिल्मों के साथ कमाल अमरोही जुड़े हैं. जॉन एलिया के चचाज़ात भाई कमाल अमरोही, मीना कुमारी के पति कमाल अमरोही या पाकीज़ा वाले कमाल अमरोही. 17 जनवरी, 1918 को पैदा हुए थे. इस मौके पर पढ़िए उनकी ज़िंदगी से ज़ुड़े कुछ किस्से-

1. मुंशी नहीं स्क्रिप्ट राइटर

हिंदी सिनेमा से अक्सर लोगों को शिकायत रहती है कि इसमें कहानी पर ज़ोर नहीं होता. 1930 के दशक में सिनेमा स्क्रिप्ट राइटर को मुंशी कहा जाता था. मुंशी यानी हिसाब-किताब रखने वाला. कमाल ने कहानी लिखी और शर्त रखी कि मुंशी नहीं, राइटर का अलग क्रेडिट मिलेगा. शर्त मान ली गई. कमाल ही नहीं आगे के लेखकों के लिए जगह बनाना आसान हो गया.

2. कलम का इस्तेमाल नहीं करते थे कमाल

महल फिल्म याद है? आएगा आने वाला गाने ने लता मंगेशकर नाम की लड़की को रातों रात स्टार बना दिया. इस हॉरर फिल्म की स्क्रिप्ट कमाल ने लिखी थी. कमाल ने मुगल ए आज़म के डायलॉग भी लिखे थे. “हमारा दिल भी कोई आपका हिंदुस्तान नहीं, जिस पर किसी बादशाह की हुकूमत चले” जैसे डायलॉग कमाल ने ही लिखे थे. कमाल अमरोही लिखने में सिर्फ पेंसिल का इस्तेमाल करते थे. ताकि कोई गलती दिखाई न दे जाए.  फर्स्ट ड्राफ्ट जैसा कुछ किसी और को दिखाई न दे. जो मन मुताबिक नहीं हुआ बिगाड़ कर गायब कर दिया.

3. पर पाकीज़ा में छोड़ दी गलती

फिल्म पाकीज़ा कमाल का पैशन थी. फिल्म जब शुरू हुई थी तो कमाल और मीना दो जिस्म एक जान थे, मगर जब फिल्म 14 साल में बन कर तैयार हुई तो बहुत कुछ बदल गया. फिल्म में हीरो के तौर पर धर्मेंद्र को लिया गया था. पर मीना हीरो धर्मेंद्र की मोहब्बत में गिरफ्तार हो चुकी थीं. तमाम कोशिशों के बाद भी कमाल दोनों को दूर नहीं कर पाए तो धर्मेंद्र का रोल राजकुमार को दे दिया. मगर तब तक कुछ रील शूट हो चुकी थीं. अगर पाकीज़ा के बारात वाले सीन को देखें तो उसमें सेहरा बांधे ग्रे शेरवानी में धर्मेंद्र हैं. अगले ही सीन में जब सेहरा उठता है तो सफेद शेरवानी में राजकुमार होते हैं.

dharmendra pakeeza

4. कहते हैं कि गुलज़ार के चलते घर टूटा

मीना कुमारी और गुलज़ार की दोस्ती की बातें दुनिया जानती हैं. गुलज़ार कहते हैं कि दोनों ने क्लोज़ इंटेलैक्चुअल रिश्ता शेयर किया. कहा जाता है कि ‘पिंजरे का पंछी’ फिल्म के सेट पर मीना बंद कमरे में गुलज़ार से कमाल के साथ रिश्ते में आई दूरियां बता रहीं थी. कमाल के ड्राइवर और मीना के संरक्षक बाकर अली ने गुलज़ार को बाहर जाने को कह दिया. मीना गुलज़ार को साथ रखने पर अड़ गईं. बाकर भी अपने लोगों को हथियारों के साथ ले आए. एक्टर महमूद ने जैसे-तैसे मामला निपटाया. कमाल ने उस दिन बिना मुद्दा जाने ही बाकर का पक्ष ले लिया. मीना ऐसी नाराज़ हुईं कि दुबारा कभी कमाल के साथ नहीं गईं.

5. और फिर कहानी है कि कमाल ने धर्मेंद्र का किया मुंह काला

कमाल और मीना अलग हो गए मगर मीना के लिए कमाल की मोहब्बत कम न हुई. मीना धर्मेंद्र की मोहब्बत में गिरफ्तार हो गई थीं. इस बात की कसक कमाल के दिल से नहीं निकली. धर्मेंद्र कुछ समय के बाद मीना को छोड़कर आगे बढ़ गए. मीना को इससे भी बहुत सदमा पहुंचा. फिर फिल्म रज़िया सुल्तान में हीरो धर्मेंद्र थे और प्रोड्यूसर-डायरेक्टर कमाल अमरोही. कमाल ने शॉट के लिए धर्मेंद्र का मुंह काला करवाया और सीन शूट किया. लोग बताते हैं कि इसकी कोई ज़रूरत नहीं थी. कमाल ने बस धर्मेंद्र की वजह से मीना को मिली तकलीफों के कारण ऐसा किया था. बॉलीवुड की तमाम किंवदंतियों में से एक ये भी है.

dharmendra raziya sultan

6. पाकीज़ा के लिए प्राण ने की अवॉर्ड वापसी

पाकीज़ा 1972 में जब रिलीज़ हुई तो फिल्म संगीत पूरी तरह से बदल चुका था. पियानो पर किशोर कुमार की आवाज़ को चेहरा देते राजेश खन्ना सुपर स्टार थे और गानों से शास्त्रीयता गायब हो चुकी थी. पाकीज़ा का संगीत देने वाले गुलाम मोहम्मद दुनिया से जा चुके थे. लोग कह रहे थे अब पाकीज़ा जैसे गाने नहीं चलेंगे, शंकर-जयकिशन से फिल्म का संगीत दुबारा बनवाया जाए. कमाल अड़ गए कि मैं मरे हुए आदमी का क्रेडिट नहीं छीनूंगा. अंत में 12 में से 6 गानों के साथ पाकीज़ा रिलीज़ हुई. फिल्म के म्यूज़िक ने इतिहास बनाया. मगर उस साल बेस्ट म्यूज़िक का फिल्म फेयर मिला ‘बेईमान’ फिल्म के लिए शंकर-जयकिशन को. इस फैसले से बेईमान में विलेन का रोल करने वाले प्राण इतना नाराज़ हुए कि उन्होंने ‘बेईमान’ के लिए मिला अपना अवॉर्ड वापस कर दिया.

7. मौसम है आशिकाना

ये गाना जितना खूबसूरत है इसकी कहानी उतनी ही दर्द भरी है. इस गाने की रिकॉर्डिंग के समय म्यूज़िक डायरेक्ट गुलाम मोहम्मद बीमारी के चलते बिस्तर पकड़ कर चुके थे. गुलाम ने जैसे तैसे इस गाने को रिकॉर्ड किया. वो इस गाने के लिए किसी और को नहीं देना चाहते थे. अपने गुरू नौशाद को भी नहीं जो गुलाम की बीमारी के चलते पाकीज़ा के गानों की रिकॉर्डिंग देख रहे थे. दरअसल ये गाना कमाल ने मीना कुमारी के लिए लिखा है. इसको लिखते समय कमाल से मीना की नाराज़गी चरम पर थी. नर्गिस और सुनील दत्त इन्हें मिलवाने की कोशिश कर रहे थे मगर मीना नहीं मान रहीं थी. दर्द भरे दिल से निकल इस कमाल के गाने की लिरिक्स पर गौर करिएगा.

“कहना के रुत जवां है, और हम तरस रहे हैं
काली घटा के साये, बिरहन को डस रहे हैं
डर है न मार डाले, सावन का क्या ठिकाना
मौसम है आशिकाना ऐ दिल कहीं से उनको ऐसे में ढूंढ लाना.”

जाते-जाते एक बात और पाकीज़ा का वो ट्रेन वाला सीन तो आपने देखा होगा जिसमें राजकुमार मीना कुमारी को पैर ज़मीं पर न रखने की बात कहते हैं. इससे ठीक पहले का ये शॉट देखिए और तय करिए कि ट्रेन में अंदर जाते हुए ये राजकुमार हैं या धर्मेंद्र.

rajkumar pakeeza


(अनिमेष ने यह स्टोरी की है.)


वीडियो में देखिए ‘सोन परी’ वाली फ्रूटी आज कल कहां है ?

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Rare incidents about legendary film director Kamaal Amrohi When he painted face of Dharmendra Black and some other trivia about Pakeeza

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