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क्या आपसे बच्चे ने पूछा है, बेबी पेट के अंदर कैसे जाता है?

‘दीदी आपसे कुछ बात करनी है’, सात साल की नन्ही सी चाचा की बेटी ने अपनी प्यारी सी आवाज में मुझसे कहा. मैंने कहा, ‘हां कहो’. उसने कहा, ‘मुझे बॉडी पार्ट्स के बारे में बता दीजिए. मुझे आईज, नोज, स्टमक, लेग्स सब पता है. आप वो बता दीजिए जो मुझे नहीं पता’

मैंने कहा, शुरू से स्टार्ट करते हैं. नेक के नीचे चेस्ट है. चेस्ट पर ब्रेस्ट. ब्रेस्ट क्यों होते हैं?

बेबी को दूध पिलाने के लिए… लेकिन मम्मा कहती हैं अब उनको दूध नहीं आता.

हां, दूध बस तब तक आता है जब तक बेबी बड़े नहीं हो जाते.

pp ka column

बेबी कैसे आता है?

मैं चुप हो गई. इसलिए नहीं कि मुझे शर्म थी ‘वजाइना’ जैसा शब्द बोलने में. इसलिए भी नहीं कि मुझे डर था कि ‘वजाइना’ बोलकर मैं उसे उसकी उम्र के पहले ही ये बात बता दूंगी. चुप हो गई क्योंकि मुझे पता था कि मैं एक ऐसे एरिया में कदम रखने वाली हूं, जहां से सवालों का सिलसिला बढ़ता ही जाएगा. और एक सवाल से दूसरा निकलेगा. मुझे नहीं पता था ये कहां ख़त्म होगा.

मैंने कहा, रुको. पेन और पेपर लेकर आती हूं. अंदर गई, पेन खोजने लगी. मम्मी ने पूछा क्या हुआ. मैंने बताया कि बच्ची ने एक ऐसा सवाल पूछ लिया है कि आज मेरा सारे कुल जमा ज्ञान की परख होने वाली है.

‘बेबी यूट्रस में रहता है. वजाइना से बाहर आता है. खूब दर्द होता है. वजाइना वुमन का प्राइवेट पार्ट होता है.’ अगले 10 मिनट में बच्ची को इतना याद हो गया था.

‘लेकिन बेबी अंदर कैसे जाता है?’

‘मैन के प्राइवेट पार्ट को पीनिस कहते हैं. उसमें सीड होता है. जैसे पेड़ के सीड से पौधा बनता है, वैसे ही मैन के सीड को वुमन के अंदर डाल दें तो बेबी बनता है. मैन अपना पीनिस वुमन की वजाइना में डालता है. उसे सेक्स कहते हैं.’

‘पापा मम्मा की वजाइना में पीनिस डालते हैं?’

‘हां. लेकिन तभी जब दोनों की मर्जी होती है. अगर दोनों में से कोई भी न चाहे, तो वो संभोग (सेक्स) नहीं होता. क्राइम होता है. और पता है, सिर्फ बिना मर्जी का संभोग ही नहीं. ज़बरदस्ती किसी का पीनिस या वजाइना देखना या छूना भी क्राइम होता है.’

‘लेकिन मुझे तो मम्मी-पापा नहलाते हैं.’

‘हां. आप अभी छोटे हो न. थोड़े टाइम बाद वो खुद ही बंद कर देंगे. अच्छा आपको पता है पीरियड क्या होते हैं?’

‘हां, फर्स्ट पीरियड इंग्लिश का होता है.’

मुझे नहीं पता था क्या कहूं. मैंने कहा नेक्स्ट टाइम बताउंगी.

मुझे नहीं पता था मैं पीनिस या वजाइना कैसे बनाउंगी कागज़ पर. मुझे नहीं मालूम था बच्ची को क्या समझ आया. हो सकता है आने वाले दिनों में वो अपने मम्मी या पापा से कोई ऐसा सवाल करे कि वो शरमा जाएं. हो सकता है ये बातें अपने दोस्तों को बता दे और उन दोस्तों के मम्मी पापा दोस्ती ही ख़त्म करवा दें. हो सकता है इस एक बात की वजह से लोग उसके बैकग्राउंड को बुरा भला कहें. मैं बस इतना जानती थी कि मैंने जो किया है, सही किया है. और आने वाले समय में उसे ये पता होगा कि उसे भगवान ने नहीं भेजा. मां-पापा ने सेक्स नाम की चीज कर के उसे पैदा किया है. और उसे पैदा करते समय उसकी मां ने खूब दर्द झेला है. उसका होना एक बायोलॉजिकल प्रक्रिया का नतीजा है.

जब मेरी मम्मी ने मुझे पीरियड के बारे में बताया था, मेरी उम्र 7 साल थी. मैंने अगले 5 सालों तक पीरियड के बारे में तरह तरह की चीजें सोची हुई थीं. कोई सीनियर कभी टॉयलेट से निकलती तो मैं दिमाग में तस्वीर बनाती कि ज़रूर इसके पीरियड हो रहे होंगे. मुझे लगता शायद लगातार खून आता होगा. मुझे लगता कि सूसू की जगह खून आता होगा. और न जाने क्या क्या. लेकिन हां, इतना तो पता था कि मम्मी पूजा क्यों नहीं करतीं. और ये भी मालूम था कि टीवी में जिस व्हिस्पर का ऐड आता है वो क्या होता है.

कुछ समय पहले पीरियड का पहला दिन याद किया. तो मम्मी को फोन कर थैंक्स कहा. मुझे पहले से पीरियड के बारे में बताने के लिए. वरना जिस समय पहली बार मुझे अंडरवियर पर खून का गाढ़ा धब्बा दिखा था, मैं जाने वो पल कैसे हैंडल करती. मम्मी ने जवाब दिया, ‘बेटा हम भोंदू रह गए. पर हमने ये जरूर सोच रखा था कि बच्चों को अपनी तरह भोंदू नहीं होने देंगे.’

‘हम भोंदू रह गए’. ये वाक्य अगर हमारी जनरेशन के लिए कहा जाए तो भी कुछ गलत नहीं होगा. मेरी उम्र के सभी बच्चों का बचपन ये सोचते हुए गुजरा है कि ये माला डी क्या होता है, निरोध किसे कहते हैं. थोड़े बड़े हुए तो कामसूत्र के ऐड भी टीवी पर आने लगे. लड़के सोचते रहे कि सेनेटरी पैड नीली स्याही सोखने के लिए बने होते हैं. लड़कियां उन्हें भाइयों से छुपाकर इस्तेमाल करती रहीं. हमने कभी सवाल नहीं किए. हमें बस इतना मालूम था कि जो चीज कोई हमारे लिए नहीं लाता, वो हमारे लिए नहीं बनी है. जिन चीजों का ऐड आने पर पापा किसी को फोन करने चले जाएं. दादाजी जम्हाई लेकर आंख मलने लगें, और मम्मी किचन में सब्जी चलाने चली जाएं या बड़े-भाई बहन चैनल बदल दें, वो हमारे लिए नहीं बनीं. न हम उनपर बात करेंगे, न सवाल पूछेंगे.

और एक दिन हमारी शादी होती है. और पेरेंट्स की निगाहों में हम बदल जाते हैं. वही मम्मी-पापा, दादा-दादी, चाचा-चाची जो कल तक ऐसे रहते थे मानो उन्हें पता ही न हो कि ये सेक्स होता क्या है, शादी के अगले ही दिन आपसे पूछने लगते हैं. गुड न्यूज़ कब मिलेगी बेटा? मैं तो सोचती हूं शादी के बाद ऐसे सवालों का जवाब दूंगी, ‘मुझे बच्चे करने नहीं आते. किसी बड़े ने कभी सिखाया ही नहीं.’

जाने हमारे कल्चर में ये क्या विश्वास फैला हुआ है, कि उम्र के साथ बच्चों को खुद ही सेक्स का ज्ञान आ जाएगा. और हां, हमें काफी हद तक खुद ही ज्ञान आया है. भला हो स्कूल कॉलेज के सीनियर, सिडनी शेल्डन, मिल्स एंड बून और रेलवे साहित्य का. हमने जब भी सेक्स को पढ़ा, छिपकर पढ़ा. उसे एक पाप माना. मास्टरबेट किया तो घंटों खुद से सवाल किया, ‘क्या ये सही था?’. पॉर्न वीडियो में देखी हुई फेक चीजों को भी सच माना. लेकिन कभी मम्मी-पापा से कुछ नहीं पूछा.

अगर आपने कोई ऐसा काम नहीं किया, जिसे आप गलती मानें, तो आप लकी हैं. लेकिन ऐसे भी टीनेजर हैं, जिन्होंने कौतूहलवश सेक्स किया और टीनेज प्रेग्नेंसी के शिकार हुए. जिन्होंने प्रेग्नेंसी के चलते सुसाइड की. जो सेक्स को डिस्कवर करते हुए HIV के शिकार हो गए. वो इसलिए कि उनके मम्मी-पापा ने उन्हें कभी नहीं बताया कि सेक्स क्या होता है. या सेफ सेक्स क्या होता है. जो पॉर्न देख-पढ़ उन्होंने सेक्स सीखा, उसमें कॉन्डम नहीं थे.

अगर समय कम पड़ता हो तो बच्चे को एक चौपाई, एक आयत, एक श्लोक कम याद कराएं. एक देशभक्ति की कविता कम याद कराएं. लेकिन उन्हें उनके शरीर के बारे में जरूर बताएं. आने वाले समय में ये ज्ञान उन्हें धर्म और देश के ज्ञान से ज्यादा काम आएगा.

ऐसी ही समझ से भरा एक ये वीडियो है. इसे देखिए…

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