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स्मार्टफोन कंपनियां आंखों में धूल झोंकने वाला झुनझुना लाई हैं, बचकर रहना!

Smartphones में आजकल Peak Brightness को खूब बढ़ाकर बेचा जा रहा है. लेकिन क्या असल में जितना दावा किया जाता है उतनी ब्राइटनेस वाकई में मिलती है या नहीं. या फिर ये स्मार्टफोन कंपनियों का नया झुनझुना है.

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what is the peak brightness of a smartphones, and does it really matters to users
चमकती स्क्रीन का झुनझुना.
7 फ़रवरी 2024
Updated: 7 फ़रवरी 2024 12:33 IST
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स्मार्टफोन कंपनियां वाकई में बहुत स्मार्ट होती हैं. मतलब, उनके बनाए फोन भले स्मार्ट ना हों लेकिन प्रोडक्ट की मार्केटिंग और प्रमोशन में उनकी स्मार्टनेस खूब दिखती है. जब देखो तब किसी फीचर का झुनझुना पकड़ा देते हैं. झुनझुना शब्द हमने जानबूझकर इस्तेमाल किया है, जिसकी वजह आपको आगे पता चल ही जाएगी. स्मार्टफोन कंपनियों के नए झुनझुने का नाम है पीक ब्राइटनेस (Smartphone Peak Brightness). पिछले कुछ महीनों में जितने भी नए स्मार्टफोन लॉन्च हुए हैं, सभी ने इस फीचर को खूब हाईलाइट किया है. 2,000 nits, 2,500 nits, और 4,500 nits. लेकिन क्या वाकई में डिस्प्ले इतना चमकता भी है? समझने की कोशिश करते हैं.

पीक ब्राइटनेस अपने पीक पर?

स्मार्टफोन में ब्राइटनेस पर प्रकाश डालने से पहले जरा ये समझ लेते हैं कि ये होती क्या है. इसको मापते हैं nits में. किसी भी प्रोडक्ट, जिसमें स्क्रीन लगी है मसलन स्मार्टफोन, टीवी, लैपटॉप या कोई और प्रोडक्ट, उसका डिस्प्ले कितना चमकदार होगा ये nits में मापा जाता है. ये जितना ज्यादा होगा डिस्प्ले उतना ब्राइट होगा. आसान गणित के लिए एक मोमबत्ती जितने स्क्वेयर मीटर एरिया में चमक बिखेरी, उसको 1 nits कहेंगे. मतलब, अगर स्मार्टफोन 1000 nits का दावा करता है तो 1000 मोमबत्ती जितनी रोशनी.

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लेकिन स्मार्टफोन में इसके साथ जोड़ा जाता है एक शब्द Peak. यही है वो झुनझुना. एकदम वैसे ही जैसे सेल के लिए कंपनियां लिख देती हैं UPTO. मतलब UPTO 50% ऑफ या UPTO 80% ऑफ. अब ये हम सभी को पता है कि ऐसे लिखने का मतलब है कि 80 फीसदी तक छूट है, लेकिन कितने प्रोडक्ट्स पर वो साफ नहीं होता. जो आप पूछने लगे तो कोई एक प्रोडक्ट दिखा दिया जाएगा जिसमें 80 फीसदी की छूट होगी. लेकिन वो एक से ज्यादा शायद ही नजर आएं.

यही गेम स्मार्टफोन ब्राइटनेस का भी है. कहने को कितनी भी लिख दीजिए लेकिन उतनी मिलने से रही. अभी हाल ही मैं एक फोन लॉन्च हुआ है. जिसमें पीक ब्राइटनेस का नगाड़ा कुछ ज्यादा ही बजाया गया. लेकिन जब कई एक्सपर्ट ने इसको मीटर लेकर चेक किया तो ब्राइटनेस 1600 nits से ज्यादा नहीं आई. हालांकि, दावा इससे दोगुने से भी ज्यादा का है. 
अब आपके मन में सवाल उठना लाजमी है कि फिर चक्कर क्या है? चक्कर नाम में है बाबू भईया. पीक मतलब सिर्फ एक बार या या कहें एक फ्रेम में. बोले तो आइडियल कंडीशन में जितना दावा किया गया उतना टच करेगी तो जरूर लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होगा.

मतलब, कान इधर से नहीं उधर से पकड़ लो टाइप. हां, इस फीचर को आजकल बेचा खूब जा रहा है. लेकिन अगर आप ऐसा मानकर कोई नया फोन खरीद लिए और फिर भरी दुपहरी में स्क्रीन चमकने की जगह सिर्फ मिच-मिचा गई तो आपने झुनझुना पकड़ लिया.

इसलिए भियो फोन आपको अपनी जरूरत और अपने बजट के हिसाब से लेना है. पहले भी बताया आज भी बता दिया. क्योंकि हमें आपको कोई झुनझुना नहीं पकड़ाना है.    

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