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हैकर्स Omicron नाम का ऐसे उठा रहे हैं फायदा

साइबर ठगी के लिए नया हथियार बना ओमिक्रॉन न्यूज़.

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14 जनवरी 2022 (अपडेटेड: 14 जनवरी 2022, 12:27 PM IST)
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हैकर्स ओमिक्रॉन के नाम पर ठगी कर रहे हैं.
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Corona का नया वेरिएंट Omicron आपके मेल में भी घुस सकता है. मालवेयर या वायरस के सहारे ओमिक्रॉन आपकी डिजिटल दुनिया में सेंध लगाने को तैयार हैं. साइबर सुरक्षा पर नजर रखने वाली एक कंपनी ने इसको लेकर आगाह किया है. पिछले दो सालों में साइबर ठगों ने कोरोना महामारी का सहारा लेकर लोगों को खूब चूना लगाया है और अब तीसरी लहर भी इससे बच नहीं पाई है. एक फर्जी "कोविड 19 ओमिक्रॉन स्टेट्स काउंटर" ऐप के नाम पर लोगों को लिंक भेजी जा रही है. लिंक पर क्लिक करते ये मालवेयर क्या गुल खिलाने वाला है वो आप अच्छे से जानते हो. एक बार क्लिक किया नहीं और आपकी निजी जानकारी से लेकर, बैंक अकाउंट डिटेल्स सब इन ठगों के हाथ लग जाता है. जानकारी के लिए बताते चलें कि मालवेयर गिरोह के इस सदस्य का नाम "रेड लाइन" है. "रेड लाइन" नाम का मालवेयर खतरनाक तो है लेकिन इसको डेवलप करने वाले अपराधी भी बहुत एक्टिव हैं. इस मालवेयर में नए-नए टूल्स भी ऐड किए जा रहे हैं, जैसे कि "मल्टीपल डिस्ट्रब्यूशन मेथड ". कई बार ऐसे मालवेयर किसी एक संस्थान या व्यक्ति विशेष को टारगेट करने के उद्देश्य से डेवलप किए जाते हैं लेकिन रेड लाइन मालवेयर अभी तक 12 देशों में मिल चुका है. मतलब साफ है, रेड लाइन किसी विशेष संस्थान या व्यक्ति को टारगेट नहीं करता, क्योंकि इन ठगों का निशाना दुनियाभर में महामारी से परेशान लोगों को मोटी चपत लगाना है. रिसर्च फर्म FortiGuard को रेड लाइन मालवेयर की एक फ़ाइल Omicron States.exe का पता चला है जो विंडोज (Windows) यूजर को टारगेट कर रही है. अभी अन्य प्लेटफ़ॉर्म जैसे iOS और Linux पर इसका असर देखने को नहीं मिला है. फिलहाल में सिर्फ विंडोज इस्तेमाल करने वाले इसके शिकार हो रहे हैं, लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं कि अन्य प्लेटफ़ॉर्म में सेंध नहीं लग सकती. रेड लाइन मालवेयर नया नहीं है. भले फ़ाइल का नाम ओमिक्रॉन हो. मार्च 2020 में कोरोना की पहली लहर के समय भी ये मालवेयर एक्टिव था और लोगों को ठग रहा था. साइबर ठगों का ये धंधा तो चलता ही रहता है लेकिन आप सावधान रहिए. ओमिक्रॉन या किसी भी नाम पर आने वाले मेल, मैसेज पर क्लिक मत कीजिए. आपको कोरोना से जुड़ी कोई भी जानकारी चाहिए तो केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारों ने कई हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं. उनको इस्तेमाल में लाइए.

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