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चीतल डायरीज़: गुजरात चुनाव में ये 'मौसी' पहली बार वोट डालने जा रही हैं

चीतल डायरीज़: गुजरात चुनाव में ये 'मौसी' पहली बार वोट डालने जा रही हैं

सितम्बर 1994. अखिल भारतीय हिजड़ा कल्याण सभा की 10 साल लंबी लड़ाई तार्किक नतीजे पर पहुंची. उस समय के मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन ने एक सर्कुलर जारी कर राज्यों के चुनाव आयोग को आदेश दिया कि किन्नरों का नाम मतदाता सूची में दर्ज किया जाए. लेकिन जल्द ही पूरी प्रक्रिया एक ‘लिंगदोष’ के पचड़े … और पढ़ें चीतल डायरीज़: गुजरात चुनाव में ये ‘मौसी’ पहली बार वोट डालने जा रही हैं

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चीतल डायरीज़: 'कुछ दिन गुजारिए' गुजरात के इस गांव में और विकास के सारे मॉडल भूल जाएंगे

चीतल डायरीज़: 'कुछ दिन गुजारिए' गुजरात के इस गांव में और विकास के सारे मॉडल भूल जाएंगे

किसी देवनागरी पढ़ने वाले को पहली नज़र में गुजराती लिपि थोड़ी हिंसक मालूम हो सकती है. यहां की लिपि की शुरुआत ही ‘ड’ का पेट चीरने से होती है. ‘ड’ का पेट चीरने के बाद उसे यहां ‘क’ पढ़ा जाता है. इसी तरह से ‘इ’ का पेट चीरकर उसे ‘फ’ में तब्दील कर दिया जाता है. … और पढ़ें चीतल डायरीज़: ‘कुछ दिन गुजारिए’ गुजरात के इस गांव में और विकास के सारे मॉडल भूल जाएंगे

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चीतल डायरीज़: गुजरात ने अपने विकास के लिए इन आदिवासियों को ‘नो मैन्स लैंड’ में धकेल दिया है

चीतल डायरीज़: गुजरात ने अपने विकास के लिए इन आदिवासियों को ‘नो मैन्स लैंड’ में धकेल दिया है

1969 में गुजरात और मध्यप्रदेश की सीमा पर जब सरदार सरोवर बांध बनाया जा रहा था और दोनों राज्य नर्मदा के पानी के बंटवारे के लिए आपस में उलझे हुए थे, उस समय मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ला ने कहा था कि वो इस बांध की वजह से मध्यप्रदेश की एक इंच जमीन भी डूबने नहीं … और पढ़ें चीतल डायरीज़: गुजरात ने अपने विकास के लिए इन आदिवासियों को ‘नो मैन्स लैंड’ में धकेल दिया है

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चीतल डायरीज़: जहां के मछुआरे बांधों की नींव का गारा बनते जा रहे हैं

चीतल डायरीज़: जहां के मछुआरे बांधों की नींव का गारा बनते जा रहे हैं

“जब मैं इस नागार्जुन सागर की नींव का पत्थर रख रहा हूं, यह मेरे लिए एक धार्मिक अनुष्ठान जैसा है. यह मानवता के मंदिर की नीव है, एक नए किस्म के मंदिर का प्रतीक, जिसे हम भारत के कोने-कोने में बना रहे हैं.” – पंडित जवाहर लाल नेहरू, नागार्जुन सागर बांध 1955 “पिछले तीस-चालीस सालों … और पढ़ें चीतल डायरीज़: जहां के मछुआरे बांधों की नींव का गारा बनते जा रहे हैं

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चीतल डायरीज़ः गुजरात का वो समुदाय जो भारत सरकार को नहीं मानता

चीतल डायरीज़ः गुजरात का वो समुदाय जो भारत सरकार को नहीं मानता

क्या आपने कभी एक रुपए के नोट को ध्यान से देखा है? यह दूसरे नोटों से अलग है. इस नोट के ऊपर केन्द्रीय रिजर्व बैंक नहीं लिखा हुआ है, बल्कि भारत सरकार लिखा हुआ है. इस पर रिजर्व बैंक के गवर्नर के बजाय वित्त सचिव के दस्तखत होते हैं. न ही इस नोट पर रिजर्व बैंक की … और पढ़ें चीतल डायरीज़ः गुजरात का वो समुदाय जो भारत सरकार को नहीं मानता

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चीतल डायरीज़: जिन कारीगरों ने मोदी और शी जिनपिंग के बैठने के लिए झूला तैयार किया था उनके साथ बहुत बुरा हुआ

चीतल डायरीज़: जिन कारीगरों ने मोदी और शी जिनपिंग के बैठने के लिए झूला तैयार किया था उनके साथ बहुत बुरा हुआ

12 सितंबर, 2014. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी प्रोटोकॉल तोड़ते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लेने अहमदाबाद के हवाई अड्डे पहुंच गए. उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद यह किसी विदेशी नेता की पहली भारत यात्रा थी. मोदी विदेश नीति पर अपनी अलग छाप छोड़ना चाहते थे इसलिए दोनों नेताओं की मुलाकात दिल्ली के बजाय गांधी … और पढ़ें चीतल डायरीज़: जिन कारीगरों ने मोदी और शी जिनपिंग के बैठने के लिए झूला तैयार किया था उनके साथ बहुत बुरा हुआ

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चीतल डायरीज़: 'अमूल' की कामयाबी के कसीदों में खेड़ा-आणंद इलाके की ये सच्चाई छुप जाती है

चीतल डायरीज़: 'अमूल' की कामयाबी के कसीदों में खेड़ा-आणंद इलाके की ये सच्चाई छुप जाती है

अहमदाबाद से वडोदरा की तरफ बढ़ते समय आपका साबका स्वर्णिम चतुर्भुज के एक कतरे से पड़ता है. यह वाजपेयी सरकार के समय में शुरू हुई महत्वाकांक्षी परियोजना थी जिसके जरिए देश के चारों कोनों को एक-दूसरे से जोड़ा जाना था. छह लेन वाली अद्भुत सड़क. आप मन में सोचते हैं, “तो यह है विकास का गुजरात मॉडल.” … और पढ़ें चीतल डायरीज़: ‘अमूल’ की कामयाबी के कसीदों में खेड़ा-आणंद इलाके की ये सच्चाई छुप जाती है

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चीतल डायरीज़: गुजरात का ये मुसलमान क्यों पिछले 15 साल से वोट नहीं डाल रहा है?

चीतल डायरीज़: गुजरात का ये मुसलमान क्यों पिछले 15 साल से वोट नहीं डाल रहा है?

अहमदाबाद पहुंचने पर आपको पता चलता है कि इस शहर की स्पेलिंग का ‘एच’ सिर्फ दस्तावेज़ों में सजाकर रखे जाने वाली चीज़ है. यहां के लोगों के लिए इस शहर का नाम ‘अमदवाद’ है. आधी रात तक सड़कों पर टहलते, शर्बत पीते लोगों को देखकर यह अंदाजा लगा सकते हैं कि बनारस या कलकत्ते की तरह … और पढ़ें चीतल डायरीज़: गुजरात का ये मुसलमान क्यों पिछले 15 साल से वोट नहीं डाल रहा है?

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चीतल डायरीज़: साबरकांठा में औरतों को गाली के तौर पर क्यों कहा जाता है - ‘वाडिया वाली’

चीतल डायरीज़: साबरकांठा में औरतों को गाली के तौर पर क्यों कहा जाता है - ‘वाडिया वाली’

बनासकांठा ज़िले में आज़ादी से पहले एक रजवाड़ा हुआ करता था, थराद. फिलहाल यह बनासकांठा ज़िले की एक विधानसभा सीट है. पाकिस्तान की सीमा से थराद की दूरी महज़ 40 किलोमीटर है. भीम सिंह वाघेला थराद के आखिरी राजा थे, जिनका राज चला करता था. थराद में उनके हवाले से एक किस्सा बड़ा मशहूर है. कहते … और पढ़ें चीतल डायरीज़: साबरकांठा में औरतों को गाली के तौर पर क्यों कहा जाता है – ‘वाडिया वाली’