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'गावस्कर होते तो पूरा भारत हिला देते', सचिन तेंदुलकर से क्यों नाराज है पूर्व क्रिकेटर?

BCCI और ECB ने भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज का नाम बदलने का फैसला किया था. 2007 से इस सीरीज का नाम पटौदी ट्रॉफी था. पटौदी का नाम हटाने के फैसले पर दिग्गज खिलाड़ियों और फैन्स ने नाराजगी जताई थी.

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16 अगस्त 2025 (पब्लिश्ड: 12:58 PM IST)
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करसन घावरी ने सचिन तेंदुलकर के फैसले पर हैरानगी जताई है. (PHOTO-PTI)
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भारत और इंग्लैंड (India vs England) के बीच टेस्ट सीरीज का नाम पटौदी ट्रॉफी हुआ करता था. इस साल सीरीज का नाम बदलकर एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी करने का फैसला किया गया. सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने इसे अपने लिए सम्मान की बात बताया. लेकिन उन्होंने पटौदी के नाम को इस सीरीज से जोड़े रखने की भी कोशिश की. हालांकि पूर्व पेसर करसन घावरी को लगता है कि सचिन ने वो नहीं किया जो करना चाहिए था.

सचिन तेंदुलकर से नाराज हैं घावरी

घावरी तो इस बात से नाराज हैं कि ये फैसला किया ही क्यों गया. उन्होंने कहा, 

सबसे पहले तो यह सवाल ही नहीं उठाया जाना चाहिए था. आप इतने बड़े कद के व्यक्ति को नीचा दिखा रहे हैं. यह बिल्कुल गलत है.

करसन घावरी ने कहा कि पटौदी की जगह अगर ये सुनील गावस्कर के साथ होता तो नजारा अलग होता. उन्होंने विक्की लालवानी के चैनल पर कहा,

 पहली बात, ऑस्ट्रेलिया-वेस्टइंडीज़ सीरीज को हमेशा फ्रैंक वॉरेल ट्रॉफी कहा जाता है. भारत-ऑस्ट्रेलिया ट्रॉफी को हमेशा बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी कहा जाता है. अगर इसका नाम बदल दिया जाए, तो गावस्कर पूरे भारत को हिलाकर रख देंगे. BCCI को ACC और ECB के सामने अपनी बात रखनी चाहिए थी. टाइगर का नाम नहीं हटाया जाना चाहिए था.

घावरी के मुताबिक इस पूरे मामले में सचिन की भूमिका अहम थी. सचिन को इस फैसले को मानने से इनकार कर देना चाहिए था. उन्होंने कहा,

सबसे पहले, सचिन को अपना पक्ष रखना चाहिए था और कहना चाहिए था, 'नहीं, मैं अपना नाम इस्तेमाल नहीं करना चाहता क्योंकि टाइगर पटौदी का नाम पहले से ही वहां है. पटौदी भारतीय क्रिकेट के दिग्गज हैं. अगर आपको मेडल देना है, तो हमारा नाम इस्तेमाल करें. ट्रॉफी का नाम वही रहना चाहिए.'

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सचिन ने की थी ECB और BCCI से बात

सचिन ने सीरीज से पहले पटौदी का नाम जोड़े रखने की कोशिश की थी. सचिन तेंदुलकर ने एक यूट्यूब मीडिया चैनल से कहा था,

मैं यह सुनिश्चित करना चाहता था कि विरासत को बरकरार रखा जाए. जब मुझे पता चला तो मैंने पटौदी परिवार को फोन किया और बातचीत की. इसके बाद मैंने जय शाह, BCCI और ECB से बात की.  उनसे कहा कि विरासत को बरकरार रखने के लिए कुछ किया जाना चाहिए. जहां तक ​​पटौदी परिवार का सवाल है, मैं भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान से वाकिफ हूं. पटौदी सीनियर ने इंग्लैंड और भारत के लिए खेला, जबकि टाइगर पटौदी ने भारत की कप्तानी शानदार तरीके से की.

BCCI और ECB ने सचिन की अपील के बाद भी फैसले पर कायम थे कि सीरीज को तेंदुलकर-एंडरसन ट्रॉफी के नाम से ही जाना जाएगा. लेकिन सचिन तेंदुलकर की बात का भी मान रखा गया था. सचिन की अपील के बाद बोर्ड ने पटौदी लेगेसी को भी कायम रखने के लिए इस सीरीज में जीतने वाले कप्तान को ‘पटौदी मेडल ऑफ एक्सीलेंस’ देने का फैसला किया गया था.

दोनों कप्तानों को मिला पटौदी मेडल

पांच टेस्ट मैचों की ये सीरीज 2-2 से ड्रॉ रही थी. भारत ने एजबेस्टन और ओवल टेस्ट में जीत हासिल की. वहीं इंग्लैंड ने लीड्स और लॉर्ड्स में बाजी मारी. मैनचेस्टर टेस्ट ड्रॉ रहा. भारत के युवा खिलाड़ियों ने सीरीज में कमाल का प्रदर्शन किया. यशस्वी जायसवाल, शुभमन गिल, ऋषभ पंत और केएल राहुल ने शतकीय पारी खेली. वहीं मोहम्मद सिराज ने सीरीज में सबसे ज्यादा 23 विकेट लिए.  सीरीज खत्म होने के बाद ‘पटौदी मेडल ऑफ एक्सीलेंस’  मेडल शुभमन गिल और बेन स्टोक्स दोनों को दिया गया.

वीडियो: 'पटौदी ट्रॉफी' का नाम बदलने पर क्या बोले सचिन?

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