एक कविता रोज़ में कात्यायनी की कविता - हॉकी खेलती लड़कियां
'लड़कियों को चेतावनी दी जा रही है और वे हंस रही हैं कि यह ज़िन्दगी नहीं है'
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कात्यायनी पिछले 24 वर्षों से विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर स्वतंत्र लेखन करती रही हैं. इसके अलावा उन्होंने कुछ वर्षों तक बड़े हिंदी अखबारों में भी काम किया.
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