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'यह गीत सख़्त सरदर्द भुलाएगा, यह गीत पिया को पास बुलाएगा'

आज पढ़िए भवानी प्रसाद मिश्र की कविता.

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7 जून 2018 (अपडेटेड: 8 जून 2018, 07:26 AM IST)
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एक कविता रोज़ में आज पढ़िए भवानी प्रसाद मिश्र  को -

गीत फरोश

जी हां हुजूर, मैं गीत बेचता हूं. मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूं; मैं किसिम-किसिम के गीत बेचता हूं. जी, माल देखिए दाम बताऊंगा, बेकाम नहीं है, काम बताऊंगा; कुछ गीत लिखे हैं मस्ती में मैंने, कुछ गीत लिखे हैं पस्ती में मैंने; यह गीत, सख़्त सरदर्द भुलाएगा; यह गीत पिया को पास बुलाएगा. जी, पहले कुछ दिन शर्म लगी मुझ को पर पीछे-पीछे अक़्ल जगी मुझ को; जी, लोगों ने तो बेच दिये ईमान. जी, आप न हों सुन कर ज़्यादा हैरान. मैं सोच-समझकर आखिर अपने गीत बेचता हूं; जी हां हुजूर, मैं गीत बेचता हूं. यह गीत सुबह का है, गा कर देखें, यह गीत ग़ज़ब का है, ढा कर देखे; यह गीत ज़रा सूने में लिखा था, यह गीत वहां पूने में लिखा था. यह गीत पहाड़ी पर चढ़ जाता है यह गीत बढ़ाए से बढ़ जाता है यह गीत भूख और प्यास भगाता है जी, यह मसान में भूख जगाता है; यह गीत भुवाली की है हवा हुज़ूर यह गीत तपेदिक की है दवा हुज़ूर. मैं सीधे-साधे और अटपटे गीत बेचता हूं; जी हां हुजूर, मैं गीत बेचता हूं. जी, और गीत भी हैं, दिखलाता हूं जी, सुनना चाहें आप तो गाता हूं; जी, छंद और बे-छंद पसंद करें– जी, अमर गीत और वे जो तुरत मरें. ना, बुरा मानने की इसमें क्या बात, मैं पास रखे हूं क़लम और दावात इनमें से भाए नहीं, नए लिख दूं? इन दिनों कि दुहरा है कवि-धंधा, हैं दोनों चीज़े व्यस्त, कलम, कंधा. कुछ घंटे लिखने के, कुछ फेरी के जी, दाम नहीं लूंगा इस देरी के. मैं नये पुराने सभी तरह के गीत बेचता हूं. जी हां, हुज़ूर, मैं गीत बेचता हूं. जी, गीत जनम का लिखूं, मरण का लिखूं ; जी, गीत जीत का लिखूं, शरण का लिखूं; यह गीत रेशमी है, यह खादी का, यह गीत पित्त का है, यह बादी का. कुछ और डिजायन भी हैं, ये इल्मी– यह लीजे चलती चीज़ नयी, फ़िल्मी. यह सोच-सोच कर मर जाने का गीत, यह दुकान से घर जाने का गीत, जी नहीं, दिल्लगी की इस में क्या बात मैं लिखता ही तो रहता हूं दिन-रात. तो तरह-तरह के बन जाते हैं गीत, जी, रूठ-रुठ कर मन जाते है गीत. जी, बहुत ढेर लग गया हटाता हूं गाहक की मर्ज़ी – अच्छा, जाता हूं. मैं बिलकुल अंतिम और दिखाता हूं– या भीतर जा कर पूछ आइए, आप. है गीत बेचना वैसे बिलकुल पाप क्या करूं मगर लाचार हार कर गीत बेचता हूं. जी हां हुज़ूर, मैं गीत बेचता हूं.
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