The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Sports
  • Ek Kavita Roz : Bachchon Ki Dua A Poem By Allama Iqbal

हो मेरे दम से यूं ही मेरे वतन की ज़ीनत

आज पढ़िए अल्लामा इक़बाल की 'बच्चों की दुआ'

Advertisement
pic
14 मई 2018 (अपडेटेड: 14 मई 2018, 01:28 PM IST)
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more

एक कविता रोज़ में आज इक़बाल की ये कविता

बच्चों की दुआ

लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी,

ज़िन्दगी शमा की सूरत हो ख़ुदाया मेरी.

दूर दुनिया का मेरे दम से अंधेरा हो जाए

हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाए.

हो मेरे दम से यूं ही मेरे वतन की ज़ीनत,

जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत.

ज़िन्दगी हो मेरी परवाने की सूरत या रब!

इल्म की शमा से हो मुझ को मुहब्बत या रब!

हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत करना,

दर्दमंदों से, ज़ईफ़ों से मुहब्बत करना.

मेरे अल्लाह, बुराई से बचाना मुझ को,

नेक जो राह हो, उस रह पे चलाना मुझ को.


कुछ और कविताएं यहां पढ़िए:

‘पूछो, मां-बहनों पर यों बदमाश झपटते क्यों हैं’

‘ठोकर दे कह युग – चलता चल, युग के सर चढ़ तू चलता चल’

मैं तुम्हारे ध्यान में हूं!'

जिस तरह हम बोलते हैं उस तरह तू लिख'

‘दबा रहूंगा किसी रजिस्टर में, अपने स्थायी पते के अक्षरों के नीचे’


लल्लनटॉप कहानियों को खरीदने का लिंक: अमेज़न 
   

Advertisement

Advertisement

()