नागपुर में 'हारेगा' ऑस्ट्रेलिया, रुलाई पाकिस्तान की क्यों छूट रही?
पिच पर रोने वालों का इलाज ऐसे होगा?
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तक़रीबन दो साल पहले, दार्शनिक टिम पेन ने बड़े ही हंसमुख भाव से ये उद्गार व्यक्त किए थे. हां भई, दार्शनिक ही कहे जाएंगे. तभी तो विकेट के पीछे से फिलॉसफी झाड़ रहे थे. ये अलग बात है कि पेन सर की दार्शनिकता में भी घमंड की बू थी. घमंड गाबा का, जो टूट गया.
लेकिन ये घमंड था क्यों? क्योंकि गाबा को कंगारुओं का किला माना जाता था. और ऐसा क्यों था? क्योंकि गाबा का विकेट अपनी पेस, बाउंस और स्विंग के लिए फेमस है. विकेट, जो क्रिकेट के खेल में सबसे महत्वपूर्ण है. और जिसे लेकर अक्सर ही बवाल होता है. अब भी हो रहा है. तो चलिए, आज सिली पॉइंट में विकेट्स पर ही चर्चा कर लेते हैं.
सबसे पहले तो ये तस्वीर देखिए. जो ट्वीट की है क्रिकबज़ के लिए काम करने वाले भरत सुंदरेसन ने. भरत ऑस्ट्रेलियन टीम का इंडिया टूर कवर करने के लिए आए हैं. भरत के इस ट्वीट के बाद बवाल होना ही था. हुआ भी. भरत ने इस ट्वीट के साथ भले ही कोई ओपिनियन ना दिया हो, लेकिन बाकी दुनिया इतनी बिजी थोड़े है.
उन्होंने दिए, और खूब दिए. भारत को बेईमान बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई. सनसनाती स्पीड वाली पिच पर छोड़ी घास की तारीफ में कसीदे पढ़ने वाले लोग रैंक टर्नर आते ही रोने लगते हैं. इन्हें स्पिन ट्रैक दुनिया के सबसे अनफेयर ट्रैक लगते हैं. क्यों? क्योंकि इन लोगों को स्पिन खेलनी नहीं आती.
पूरी दुनिया को इवॉल्व होने, नए जमाने के मुताबिक बदलने का ज्ञान छौंकने वाले ये महाज्ञानी लोग आज तक स्पिन खेलनी नहीं सीख पाए. और नहीं सीख पाए तो ना सीखें, हम कौन सा स्पिनर्स को बहुत डॉमिनेट कर पा रहे हैं. LoL. हाल के सालों में भारतीय बल्लेबाज भी स्पिन के खिलाफ़ स्ट्रगल कर ही रहे हैं. जबकि हम पेस बोलर्स को पहले से बेहतर खेलने लगे हैं.
ये अलग बात है कि बेस्ट स्पिनर्स अभी भी हमारे ही पास हैं. और उनका ख़ौफ़ पूरी दुनिया में है ही. तभी तो मैच से पहले ही स्पिन के दमपिशाच कंगारुओं को परेशान करने लगे हैं. बात हो रही है कि नागपुर की पिच से छेड़छाड़ की जा रही है. लेफ्ट हैंडर्स के ऑफ स्टंप के पास के एरिया को जानबूझकर पानी नहीं दिया जा रहा. जबकि दोनों ओर का गुड लेंथ एरिया छोड़कर बाकी पिच पर खूब पानी दिया जा रहा है.
# Turning Track in Nagpurइससे क्या होगा? इससे ये होगा कि पिच के सूखे एरियाज जल्दी टूटेंगे. वहां से धूल उड़ेगी. क्रैक्स बनेंगे और इन तमाम चीजों से स्पिनर्स को फायदा होगा. जबकि बीच के एरियाज में नमी होगी. जिससे बैक ऑफ द लेंथ फेंकने की कोशिश करने वाले पेस बोलर्स के साथ धोखा हो जाएगा. क्योंकि पिच की नमी उनकी गेंदों को फंसा लेगी.
हालांकि ये तौर पुराना है. पिच की सेलेक्टिव वॉटरिंग और रोलिंग में कोई नई बात नहीं है. लेकिन अभी तक इस पर चर्चा नहीं हुई थी. क्योंकि सोशल मीडिया के कुपढ़ों ने इससे पहले शायद ऐसी कोई फोटो नहीं देखी होगी. अब देख ली है, तो रोएंगे ही. और गोरों का रोना तो फिर भी जायज है. रावलपिंडी और कराची में बिना टोल वाला नेशनल हाईवे बनाकर भी पिट जाने वाले पड़ोसी जाने क्यों थाली बजा रहे हैं.
उन्हें क्या? वो तो कैसी भी पिच पर हार जाते हैं. और कंगारुओं का ये रोना कोई नई बात तो है नहीं. मार्च 2017 में रांची की पिच याद है? जिसे लेकर ये लोग रोए, हंसे और फिर रोए थे? उस पिच पर भी नागपुर जैसे ही आरोप लगे थे. ऐसी पिच नहीं देखी, लेफ्ट हैंड बैट्समेन को फंसाने का प्लान है, इंडिया चीटिंग कर रहा है. और भी तमाम सारी चीजें.
मरहूम शेन वॉर्न ने तो इसे 250/75 वाली पिच करार दे दिया था. लेकिन पहले दिन का खेल खत्म हुआ तो ऑस्ट्रेलिया 299/4 बना चुका था. और फिर इन कंगारुओं को पता चला कि अपने शब्दों का स्वाद कैसा होता है. पता नहीं इन्हें चबाने के लिए इन लोगों ने पानी लिया था या नहीं. ऑस्ट्रेलिया की पारी 451 पर खत्म हुई. उसी दिन भारत ने भी एक विकेट खोकर 120 बना डाले.
अब ये शब्द और चबाए जा रहे थे.माफियां-वाफियां मांगी गईं. भारत की पारी 603/9 पर रुकी. पिच अब भी टिपिकल पाकिस्तानी हाईवे का फील दे रही थी. अंत में मैच ड्रॉ रहा. पांच दिन में सिर्फ 25 विकेट गिरे. और पिच को फिर कोसा गया. मैच से पहले घटिया, भयानक स्पिन फ्रेंडली बताई गई ये पिच अब तक हाईवे हो चुकी थी. और आलोचक इससे नाखुश थे.
और ये अब भी नाखुश ही हैं. क्योंकि नाखुश रहना इनकी हॉबी है. और हॉबी भी वो वाली, जिसे हम सीवी पर नहीं लिखते. क्योंकि हम इससे शर्मिंदा होते हैं. तो हम इस हॉबी का सीधे प्रैक्टिकल दिखाते हैं, वो भी खुलकर. ये लोग यही कर रहे हैं. इन जलकुकड़ों के मुंह लगने की जरूरत ही नहीं है. क्योंकि इस पिच पर सिर्फ भारत ही तो खेलेगा नहीं.
दोनों टीम्स को ही बैटिंग और बोलिंग दोनों करनी है. तो पिच जैसा खेलेगी, दोनों टीम्स को झेलना होगा. हमारे पास अश्विन है, तो उनके पास भी लॉयन है. और हां, उनके लेफ्टीज का नाश्ता करने के लिए हमारे अश्विन अन्ना को रैंक टर्नर की जरूरत नहीं है. वो सिंपल मैट पर भी इनका मैच बिगाड़ सकते हैं. चिंता तो आप अपने राइट हैंडर्स की करो, जिनके दिमाग में आपने खुद ही शंका के बीज बो दिए हैं.
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