भारतीय पहलवान बजरंग पुनिया ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया किवो वर्ल्ड चैंपियनशिप्स के साथ एशियन गेम्स में भी खेलने के बारे में सोच रहे हैं.ये दोनों कंपटीशन 2023 में होने वाले हैं. एशियन गेम्स पहले इसी साल चीन में होनेथे, पर कोविड के चलते इसे टाल दिया गया है. एशियन गेम्स अब 2023 में आयोजित होंगे.वर्ल्ड चैंपियनशिप्स भी इसी साल सितंबर में होगी. प्रेस से बात करते हुए पुनिया नेकहा कि अगर दोनों कंपटीशन के बीच कम से कम एक महीने का अंतर होता है तो वो दोनोंमें हिस्सा लेंगे.सितंबर 2023 में रूस में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप्स 2024 पेरिस ओलंपिक के लिएक्वॉलिफाइंग इवेंट है. बजरंग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा,'2023 एक महत्वपूर्ण साल है. वर्ल्ड चैंपियनशिप्स के माध्यम से पेरिस 2024 के लिएक्वॉलिफाई करने पर हम फोकस्ड हैं. हम अभी तक नहीं जानते हैं कि एशियन गेम्स औरवर्ल्ड चैपिंयनशिप्स के बीच कितना अंतर होने वाला है.'पुनिया इस साल कॉमनवेल्थ गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप्स में हिस्सा लेने वाले हैं.इसके पहले वो 35 दिन के ट्रेनिंग कैंप के लिए यूएस जा रहे हैं. यूनाइटेड किंगडम केबर्मिंघम में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 28 जुलाई से शुरु होंगे. वहीं वर्ल्डचैंपियनशिप्स सितंबर में सर्बिया के बेलग्रेड में खेली जानी है. बजरंग ने टोक्योओलंपिक्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. इसके बाद वो इंजर्ड हो गए थे. बजरंग का माननाहै कि बीती बातों को भुलकर आगे बढ़ना चाहिए. बजरंग ने कहा,'मैं इंजर्ड हो गया था और टोक्यो के बाद लगभग आठ महीने तक रिहैब में था. ओलंपिककिसी भी एथलीट के लिए सबसे जरूरी इवेंट है. इंजरी से मुझे झटका लगा था, फिर भीमैंने ब्रॉन्ज जीता. 65 kg कैटेगरी दुनिया की सबसे कठिन श्रेणी है. ओलंपिक मेडलजीतने के बाद मैं थोड़ा भी नहीं बदला हूं. 2024 में और बेहतर करने का प्रयास रहेगा.मैंने फिर से ट्रेनिंग शुरु कर दी है. पिछले चार ओलिंपिक्स में भारत को कुश्ती मेंमेडल मिले हैं. ब्रॉन्ज और सिल्वर मिला है, पर गोल्ड नहीं. पेरिस 2024 के लिए मेरायही टार्गेट है.'बजरंग ने बताया कि जब वो बाहर ट्रेनिंग करने जाते हैं, तब उन्हें लड़ने के लिएबेहतर पार्टनर्स मिलते हैं. बजरंग ने कहा,'मैं मिशिगन यूनिवर्सिटी में प्रैक्टिस करूंगा. कई टॉप पहलवान वहां ट्रेनिंग करतेहैं. जैसे, मैं किर्गिस्तान के एर्नाजर अक्मातालिएव के साथ ट्रेन करूंगा. वो 70किलो कैटेगरी में वर्ल्ड नंबर वन हैं. 86 किलो कैटेगरी के ओलंपिक मेडलिस्ट भी वहांहोंगे. इसलिए मैं वहां ट्रेनिंग करना पसंद करता हूं. वहां ट्रेनिंग करने से हम लोकलडिस्ट्रैक्शन से भी बच जाते हैं. हमें विदेश में कोई डिस्टर्ब नहीं करता. यहां रहताहूं तो मुझे शादी, बर्थडे और तरह-तरह की पार्टियों के इनवाइट आते रहते हैं.'बजरंग ने बताया कि कोई भी पहलवान ट्रेनिंग के दौरान किसी दूसरे पहलवान को इंजर्डकरने की कोशिश नहीं करता. उन्होंने बताया,'मैट पर भले ही हम कंपीट करते हों, ऑफ-द-मैट हम सभी दोस्त हैं. मेरे मन में ऐसा कोईडर नहीं है कि मैं चोटिल हो जाऊंगा. मैंने रूस, यूरोप, अमेरिका और एशियाई देशों मेंट्रेनिंग की है, ऐसा कभी नहीं हुआ.'बता दें कि भारत सरकार के खेल और युवा मंत्रालय की TOPS स्कीम बजरंग की ट्रिपस्पॉन्सर कर रही है. बजरंग रविवार 26 जून को यूएस के लिए रवाना हो चुके हैं. वे 30जुलाई तक मिशिगन कैंप में हिस्सा लेंगे. वहीं बर्मिंघम कॉमनवेल्थ में कुश्ती 5-6अगस्त को खेली जानी है. याद रहे कि 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में 65 किलो कैटेगरी मेंबजरंग ने गोल्ड मेडल जीता था.