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FIFA में ‘पर्शिया की दीवार’! गोलची, जो एक वक्त सड़क पर सोया और कार-बर्तन तक धुले

Alireza Beiranvand 14 साल की उम्र तक भेड़-बकरियां चराते थे. पिता फुटबॉल खेलने नहीं देते थे. अलीरेज़ा के पिता ने एक बार उनके फुटबॉल के कपड़े तक फाड़ दिए और कहा कि खेल या पढ़ाई से कुछ नहीं होगा.

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22 जून 2026 (पब्लिश्ड: 04:15 PM IST)
Alireza Beiranvand Sheep herder, car washer, street cleaner to Iran FIFA WC hero
अलीरेज़ा को "पर्शिया की दीवार" कहा जाता है. उनके लंबे थ्रो, तकड़े सेव्स और डेडिकेशन उन्हें खास बनाते हैं. (फोटो- AFP)
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ईरान का एक शहर है, खोर्रमाबाद. कैपिटल तेहरान से साउथ-वेस्ट चलेंगे तो ये शहर लगभग 470 किलोमीटर पड़ेगा. इसी 470 किलोमीटर की दूरी और दुनिया की किसी भी स्केल में न मांपे जाने वाले जिगरे ने अलीरेज़ा बेरानवंद (Alireza Beiranvand) को ‘महान’ बना दिया. अलीरेज़ा ने फुटबॉल खेलने के लिए घर छोड़ा. तेहरान की सड़कों पर रातें काटी. बर्तन धुले. कारें साफ कीं. अलीरेज़ा की कहानी में कई और परतें हैं, लेकिन असल में ये बंदा वो दीवार है जिसे FIFA World Cup 2026 में बेल्जियम की टीम पार नहीं कर पाई.

पिता फुटबॉल नहीं खेलने देते थे

अलीरेज़ा बेरानवंद का जन्म 21 सितंबर 1992 को ईरान के खोर्रमाबाद के सराबियास गांव में हुआ था. परिवार गरीब था. पिता बड़े परिवार को संभालने के लिए बच्चों को पढ़ाई या खेल के बजाय काम पर लगाना चाहते थे. 14 साल की उम्र तक अलीरेज़ा भेड़-बकरियां चराते थे. पिता फुटबॉल खेलने नहीं देते थे. ईरान वायर की रिपोर्ट के मुताबिक अलीरेज़ा के पिता ने एक बार उनके फुटबॉल के कपड़े तक फाड़ दिए और कहा कि खेल या पढ़ाई से कुछ नहीं होगा.

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14 साल की उम्र तक अलीरेज़ा भेड़-बकरियां चराते थे. 
घर से भागे

लेकिन अलीरेज़ा के दिल और दिमाग में बस फुटबॉल घूमती थी. भयंकर जुनून भरा था. वो चुपके से थोड़े-थोड़े पैसे बचाते. आखिरकार एक रात उन्होंने घर से भाग निकले का फैसला किया. वो भी बिना किसी को बताए. वो निकले, और बस से तेहरान पहुंच गए. बड़े शहर में रहना इतना आसान नहीं था. वहां उनके पास रहने की जगह नहीं थी. तो सड़कों पर सोते थे. अज़ादी स्क्वायर के आसपास वो बेघरों की तरह रात गुजारते थे.

तेहरान में एक दिन बस में उन्हें कोच हुसैन फैज़ मिले. फैज़ ईरान के मशहूर कोच में गिने जाते थे. उन्होंने अलीरेज़ा से एक सवाल किया. क्या वो एथलीट हैं? आगे बात हुई तो ट्रायल के लिए 300,000 तोमान (तब के हिसाब से करीब 20 डॉलर) मांगे गए. अलीरेज़ा ने कहा,

"अगर इतना पैसा होता तो मैं सोने की जगह ढूंढ लेता."

ये बता सुनकर कोच ने उन्हें फ्री में ट्रायल का मौका दे दिया. अलीरेज़ा ने ट्रायल में कमाल किया. कोच उन्हें टीम में रखना चाहते थे लेकिन रहने की समस्या थी. इसका भी हल अलीरेज़ा ने निकाला.

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अलीरेज़ा के दिल और दिमाग में बस फुटबॉल घूमती थी.
सिलाई का काम किया

टीम के एक खिलाड़ी के पिता की सिलाई की दुकान थी. अलीरेज़ा ने फैसला किया कि वो वहां पर काम करेंगे. वो रात दो बजे तक सिलाई करते. फिर थोड़ी नींद लेते. और सुबह सात बजे से दोपहर तक काम फिर काम. उसके बाद ट्रेनिंग. ये दौर उनके लिए काफी मुश्किल था.

एक दिन तेहरान में अलीरेज़ा यूथ गेम खेल रहे थे. वहीं नाफ्त तेहरान क्लब के कोच ने उन्हें स्पॉट किया. अपनी टीम में आने का ऑफर दिया. लेकिन ये ऑफर एक्सेप्ट करने का मतलब था कि उनका सोने का ठिकाना भी छिन जाता. अलीरेज़ा ने नाफ्त तेहरान जाने का फैसला किया. फिर से सड़क पर आ गए. लेकिन सोने का ठिकान तो ढूंढना था.

अलीरेज़ा को एक पिज्जा शॉप में काम मिला. वो बताते हैं,

“ये काम से ज्यादा शोषण था. वो लोग मुझे सुबह पांच बजे उठाकर बर्तन धुलवाते, ओवन साफ कराते. मैंने उनसे कहा ये ठीक नहीं है, पर वो नहीं माने.”

एक दिन फुटबॉल लीजेंड अली दाई की कार धोने को कहा गया. अलीरेज़ा ने मना कर दिया और कहा,

"एक दिन मैं अली दाई के लिए खेलूंगा, उनकी कार नहीं धोऊंगा."

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बेल्जियम के खिलाफ अलीरेज़ा का सेव.
झाड़ू लगाने का काम मिला

इसके बाद उन्हें तेहरान नगर निगम में झाड़ू लगाने का काम मिला. वो लंबे कद के थे, इसलिए भीड़ वाली जगह नहीं जाना चाहते थे. उन्हें खजाने पार्क में भेजा गया. जिसका अलीरेज़ा को डर था, वही हुआ. एक रिश्तेदार ने उन्हें झाड़ू लगाते देख लिया और उनके पिता को बता दिया. पूरे परिवार में खबर फैल गई.

मीडिया में जब उनकी कहानी छपी कि फुटबॉल खिलाड़ी सड़क साफ कर रहा है, तो नाफ्त क्लब ने उन्हें कंपनी के प्रेयर रूम में सोने की जगह दे दी. लेकिन उनसे कहा गया कि उन्हें सुबह पांच बजे उठकर घास पर सोने जाना पड़ेगा, वरना केयरटेकर देख लेगा.

FIFA की तारीफ 

2015 में उनकी किस्मत चमकी. एशियन चैंपियंस लीग में नाफ्त तेहरान वर्सेज सऊदी अरब की अल-अहली टीम के मैच था. इसमें अलीरेज़ा ने इतना लंबा थ्रो किया कि गेंद एक पेनल्टी एरिया से दूसरे तक पहुंच गई. FIFA ने इसे "दुनिया का सबसे रोमांचक थ्रो" तक बता दिया. ये वीडियो 10 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा. एशियन फुटबॉल कन्फेडरेशन ने उन्हें "यूनिक आर्म्स वाला आदमी" बताया.

ये भी पढ़ें- एसिड अटैक से बचे, वर्ल्ड कप में इतिहास रच दिया, योआने विस्सा की कहानी रुला देगी

अलीरेज़ा ने बताया कि बचपन में चरवाहे का काम करते थे. तब वो अपने साथियों के साथ पहाड़ों पर एक तरफ से दूसरी तरफ पत्थर फेंक कर खेलते थे. इसी से उनके हाथों की ताकत बढ़ी. 2016 में उन्होंने साउथ कोरिया के खिलाफ 61 मीटर से ज्यादा का थ्रो किया, जो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड है.

2016 में वो पर्सेपोलिस क्लब में शामिल हुए. वहां उन्होंने चार लीग खिताब, एक FA कप, तीन सुपर कप जीते और एशियन चैंपियंस लीग में रनर-अप रहे.

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 2016 में अलीरेज़ा ने साउथ कोरिया के खिलाफ 61 मीटर से ज्यादा का थ्रो किया, जो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड है.

2020 में बेल्जियम के एंटवर्प गए, लेकिन ज्यादा मैच नहीं खेले. 2021 में पुर्तगाल के बोआविस्टा में लोन पर गए. 2022 में वापस पर्सेपोलिस लौटे ताकि नेशनल टीम में जगह बनी रहे. अब वो ट्रैक्टर क्लब के लिए खेलते हैं.

नेशनल टीम में अलीरेज़ा ने 80 से ज्यादा मैच खेले हैं. 2018 वर्ल्ड कप में पुर्तगाल के खिलाफ क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पेनल्टी बचाया, जो बहुत चर्चित है. 2015, 2019, 2023 एशियन कप और 2018, 2022, 2026 वर्ल्ड कप में ईरान के लिए खेले. 2019 में उन्हें ईरान का बेस्ट प्लेयर और बेस्ट गोलकीपर चुना गया.

अलीरेज़ा को "पर्शिया की दीवार" कहा जाता है. उनके लंबे थ्रो, तकड़े सेव्स और डेडिकेशन उन्हें खास बनाते हैं. FIFA वर्ल्ड कप 2026 में बेल्जियम के खिलाफ मैच में अलीरेज़ा क्लीन शीट परफॉर्मेंस दी. अपनी टीम के लिए 7 गोल बचाए. इसी के साथ टीम के आगे के क्वालिफिकेशन की उम्मीदें भी जिंदा रखीं.

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