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YS शर्मिलाः आंध्र के CM की अब तक पर्दे के पीछे रहने वाली बहन, जिसने अपनी अलग पार्टी बना ली है

आंध्र प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के एक कद्दावर नेता थे. वाईएस राजशेखर रेड्डी. 2004 से 2009 के बीच अविभाजित आंध्र प्रदेश के सीएम रहे. हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मौत हो गई. वाईएसआर रेड्डी की मौत के बाद उनके बेटे जगन मोहन रेड्डी ने कांग्रेस से अलग होकर एक नई पार्टी बनाई. नाम रखा वाईएसआर कांग्रेस. जगन मोहन रेड्डी फिलहाल आंध्र प्रदेश के सीएम हैं. खबर है कि उनकी बहन वाईएस शर्मिला ने 8 जुलाई को एक नई पार्टी बना ली है. उन्होंने अपनी पार्टी का नाम वाईएसआर तेलंगाना पार्टी रखा है. बताया जा रहा है कि अभी तक चुनाव में हिस्सा ना लेने वाली वाईएस शर्मिला आने वाले समय में तेलंगाना में चुनाव लड़ेंगी.

तेलंगाना पर है नज़र

फ्रंटलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी को लॉन्च करते हुए शर्मिला ने कहा कि वे तेलंगाना में ‘राजन्ना राज्यम’ को वापस लाना चाहती हैं. इससे उनका मतलब अविभाजित आंध्र प्रदेश में अपने पिता राजशेखर रेड्डी के मुख्यमंत्री के तौर पर शासन से है. राजशेखर रेड्डी के शासन में राज्य में कई गरीब कल्याण योजनाएं शुरू की गई थीं. रिपोर्ट के मुताबिक शर्मिला ने यह भी कहा कि वे अपनी पार्टी तेलंगाना आंदोलन की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए लॉन्च कर रही हैं, ताकि सत्ता में बैठे लोगों की जवाबदेही तय की जा सके. साल 2014 में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश से अलग हो गया था. फिलहाल तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्र समिति पार्टी की सरकार है. के चंद्रशेखर राव राज्य के मुख्यमंत्री हैं.


फ्रंटलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, शर्मिला ने साल 2019 के चुनाव में अपने भाई जगन मोहन रेड्डी के लिए बढ़-चढ़कर चुनाव प्रचार किया था. विश्लेषक मानते हैं कि शर्मिला के अंदर अपने पिता की राजनीतिक खूबियां मौजूद हैं और जगन मोहन रेड्डी को गद्दी तक पहुंचाने में उनका एक बड़ा रोल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 के विधानसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के बाद शर्मिला को उम्मीद थी कि उन्हें या तो कैबिनेट में जगह दी जाएगी या फिर राज्यसभा भेजा जाएगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इसके चलते उनके और जगनमोहन रेड्डी के बीच मतभेद भी बढ़ते गए. अब आखिर में उन्होंने खुद की ही अपनी पार्टी बना ली है. हालांकि, शर्मिला अपने भाई से सीधे तौर पर नहीं उलझना चाहती हैं. ऐसे में उन्होंने पार्टी को तेलंगाना में लॉन्च किया है.

भाई जेल में था, बहन चुनाव प्रचार कर रही थीं

राजनीतिक पटल पर शर्मिला का उभार जून 2012 में हुआ. इस समय उनके भाई जगन मोहन रेड्डी को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भेजा जा चुका था. दूसरी तरफ राज्य में एक लोकसभा सीट और 18 विधानसभा सीटों पर उप चुनाव होने थे. ऐसे में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी शर्मिला ने संभाली. इस उपचुनाव में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी ने 18 में से 15 विधानसभा सीट जीतीं. नेल्लोर लोकसभा सीट भी पार्टी के खाते में आ गई.

इन उप चुनावों के तुरंत बाद शर्मिला ने 3,112 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू की. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पदयात्रा के दौरान शर्मिला ने करीब 150 जनसभाओं को संबोधित किया. हजारों लोग शर्मिला की रैलियों में शामिल हुए. करीब एक साल बाद सितंबर, 2013 में जगन मोहन रेड्डी भी जेल से रिहा हो गए. जगन मोहन के आने के बाद शर्मिला पर्दे के पीछे चली गईं.

'बाय बाय बाबू' चुनावी कैंपेन के दौरान YS Sharmila. (फोटो: YSRCP)
‘बाय बाय बाबू’ चुनावी कैंपेन के दौरान YS Sharmila. (फोटो: YSRCP)

पांच साल बाद शर्मिला फिर सक्रिय हुईं. इस बार 2019 के राज्य विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए. उन्होंने 11 दिन की बस यात्रा की. इस यात्रा को एक नाम दिया गया- ‘बाय बाय बाबू’. इस नाम के जरिए शर्मिला ने सीधे तौर पर राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर निशाना साधा. उनकी बस पर एक घड़ी भी लगी थी. जो यह बताने के लिए लगाई गई थी कि अब नायडू का समय पूरा हो गया है. चुनाव के परिणाम आए तो वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को भारी बहुमत से जीत मिली. 175 सीट की विधानसभा में पार्टी ने लगभग पचास फीसदी मत के साथ 151 सीटें अपने नाम कीं. लगभग इतने ही मत प्रतिशत से पार्टी ने 25 में से 22 लोकसभा सीटें भी जीतीं.

फ्रंटलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस चुनाव के बाद ही शर्मिला और जगन मोहन के बीच मतभेद बढ़ने लगे. हालांकि, इन्हें सुलझाने का भी प्रयास किया गया. लेकिन आखिरकार शर्मिला पार्टी से अलग ही हो गईं. पार्टी के लॉन्च के साथ ही वाईएस शर्मिला ने 100 दिन के भीतर पदयात्रा शुरू करने की बात कही है. उनका कहना है कि इस यात्रा के जरिए वे लोगों की समस्याएं समझेंगी. हाल के दिनों में उन्होंने बेरोजगारी और उसकी वजह से आत्महत्या कर रहे लोगों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया है. इस मुद्दे को लेकर वे लगातार पीड़ित परिवारों से मिल रही हैं और हैदराबाद के धरना चौक पर भूख हड़ताल भी कर चुकी हैं.


 

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