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पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था जिन दो महिलाओं को उम्मीद से देख रही है, वो कौन हैं?

कोरोनावायरस के चलते पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झटका लगा है. भारत से लेकर अमेरिका तक लोग नौकरियां खो रहे हैं. कम्पनियां अपना बिजनेस समेट रही हैं. एक वैश्विक स्लोडाउन से निपटने के लिए इंतजाम भी वैश्विक स्तर पर करने की बात चल रही है, जिसमें देश साथ आएं, और एक दूसरे की मदद करें.

इन हालात में ग्लोबल स्तर पर काम करने वाले आर्थिक संगठनों की इम्पॉर्टेंस बढ़ गई है. इन्हीं में से दो संगठन हैं- IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) और वर्ल्ड बैंक. इंटरेस्टिंग बात ये है कि दोनों के ही महत्वपूर्ण पदों पर महिलाओं को चुना गया है. IMF की चीफ इकोनॉमिस्ट हैं गीता गोपीनाथ. और वर्ल्ड बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट बनने वाली हैं प्रफेसर कारमेन रेनहार्ट. कौन हैं ये दोनों महिलाएं, और क्यों उनका इन पदों पर होना महत्वपूर्ण है, यहां पढ़ लीजिए.

प्रफेसर कारमेन रेनहार्ट

हाल में ही वर्ल्ड बैंक के प्रेसिडेंट डेविड मल्पास ने घोषणा की कि चीफ इकोनॉमिस्ट और वाइस प्रेसिडेंट के पद के लिए प्रफेसर कारमेन रेनहार्ट को चुना गया है. उनका कार्यकाल 15 जून से शुरू होगा.

इनके पास कोलंबिया यूनिवर्सिटी से PhD की डिग्री है. हारवर्ड केनेडी स्कूल में इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स पढ़ाती हैं. वहां से ये दो साल की लीव लेंगी और इस पद को जॉइन करेंगी. वो मूलतः क्यूबा नाम के देश से हैं. बचपन में ही अपने परिवार के साथ अमेरिका आ गई थीं.

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कारमेन को अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, उसकी दिक्कतें, कर्ज का लेन-देन,, मुश्किल समय के अनुसार नीतियां बनाने जैसी चीज़ों की गहरी समझ है. (तस्वीर: रायटर्स)

किसलिए फेमस हैं?

उन्होंने 2009 में इकोनॉमिस्ट केनेथ रोगोफ़ के साथ मिलकर एक किताब लिखी थी: This Time is Different: Eight Centuries of Financial Folly (दिस टाइम इज डिफरेंट: 8 सेंचुरीज ऑफ फाइनेंशियल फॉली). ये वो समय था जब पूरा विश्व मंदी से जूझ रहा था. इस किताब में बताया गया था कि किस तरह मार्केट को बेहतर तरीके से रेगुलेट करने की ज़रूरत है. और आर्थिक बुलबुलों से बचने के लिए किस तरह एक सिस्टम तैयार करने की ज़रूरत है.

आर्थिक बुलबुलों का मतलब ऐसी सिचुएशन जिसमें अर्थव्यवस्था का अनुमान असल वैल्यू से कहीं ज्यादा बढ़ा-चढ़ा कर लगा लिया जाता है. जिस तरह पानी का बुलबुला फैलता बहुत तेजी से है, लेकिन फूटता है तो कुछ नहीं बचता. उसी तरह फाइनेंशियल बबल भी फूटता है, तो अचानक से अर्थव्यवस्था झटका खा जाती है. रेनहार्ट ने इसी से बचने और उपयुक्त तरीकों का इस्तेमाल करने की बात कही.

हाल के समय में भी कोरोनावायरस से जूझ रही दुनिया के लिए रेनहार्ट ने लिखा,

साफ़ तौर पर ये बड़े स्तर पर ‘जो भी करना पड़े, करेंगे’ वाला पल है, हमें ऐसी आर्थिक और मौद्रिक (monetary) नीतियों की ज़रूरत है जो सामान्य से हटकर हों.

IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टीना जियोर्जेवा ने कहा कि रेनहार्ट इस क्राइसिस के समय में एक बेहतरीन चॉइस हैं. IMF की ही चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ ने कहा कि रेनहार्ट को कर्ज, कैपिटल फ्लो, क्राइसिस की अच्छी समझ है.

गीता गोपीनाथ

इन्होंने जनवरी, 2019 में IMF के चीफ इकोनॉमिस्ट की पोस्ट संभाली थी. इस पद तक पहुंचने वाली ये  पहली महिला हैं. उनके नाम का ऐलान अक्टूबर, 2018 में ही हो गया था. IMF की पूर्व प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लेगार्ड ने गीता के नाम की घोषणा की थी. उन्होंने गीता को दुनिया के बेहतरीन अर्थशास्त्रियों में से एक कहा था.

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आने वाले समय में कई देशों को अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद लेने की ज़रूरत पड़ सकती है, ऐसा अनुमान लगाया गया है. इसमें IMF और उसकी चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ की अहम भूमिका होगी. कि वो इस सिचुएशन को कैसे संभालते हैं. (तस्वीर: IMF)

किसलिए फेमस हैं?

48 साल की गीता IMF की 11वीं चीफ इकोनॉमिस्ट हैं. उनसे पहले इस पोस्ट पर मौरिस आब्स्टफेल्ड थे. गीता हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर रही हैं.

हाल में ये ख़बरों में आई थीं जब जनवरी में इन्होंने एक बयान दिया था. इसमें उन्होंने कहा कि ग्लोबल ग्रोथ दर को 0.1 फीसद कम करके 2.9 किया गया है, क्योंकि इंडिया की GDP में गिरावट आ रही है और इसका असर पूरी विश्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. गोपीनाथ ने कहा था,

‘विश्व की GDP और ग्लोबल ग्रोथ में भारत की भागीदारी काफी अहम है. हमने ग्लोबल ग्रोथ में 0.1 फीसद की कमी लाकर उसे 2.9 किया है. और इस कमी का बड़ा हिस्सा भारत की आर्थिक वृद्धि में कमी की वजह से है.’

जब गीता से ये सवाल किया गया कि ग्लोबल ग्रोथ को भारत की धीमी पड़ी अर्थव्यवस्था ने किस हद तक प्रभावित किया है, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘साधारण तौर पर अगर हिसाब लगाएं तो 80 फीसद तक.’

इस बयान को लेकर भारत में सोशल मीडिया पर काफी बहस हुई थी. लेकिन इस वक़्त IMF जैसे संगठन की ज़िम्मेदारी गीता के कंधों पर है. और वो आने वाले आर्थिक मंदी के दौरान इसे कैसे लीड करती हैं, ये देखने के लिए लोग उनकी तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं.


वीडियो: ब्रेटन वुड्स की जुड़वां संतानें कही जाने वाली वर्ल्ड बैंक और IMF में क्या अंतर है? 

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