Submit your post

Follow Us

जब महिला खिलाड़ी ने जीत के बाद अपनी टीशर्ट उतार दी, उसकी ब्रा ने इतिहास बना दिया

कुछ रोज़ पहले कन्नड़ एक्ट्रेस संयुक्ता हेगड़े अपनी दो दोस्तों के साथ बेंगलुरु के एक पार्क में कसरत करने गई थीं. उस दौरान उन्होंने स्पोर्ट्स ब्रा और ट्रैक पैंट्स पहन रखे थे. उसी वक्त कांग्रेस नेता कविता रेड्डी वहां आईं. और संयुक्ता के पहनावे पर उन्हें आड़े हाथों लिया. कहा: “क्या तुम लोग कैबरे डांसर्स हो. इतने छोटे कपड़े क्यों पहने हैं? अगर इस तरह के कपड़े पहनने के बाद कोई कुछ होता है, तो किसी के पास रोते हुए मत जाना.”

अब कोई औरत किसी से पूछकर तो कपड़े पहनेगी नहीं. वो पहनेगी अपनी चॉइस से. फिर भी संयुक्ता की स्पोर्ट्स ब्रा को लेकर सोशल मीडिया पर बीते दिनों बवाल कटा. इतना कि कविता को माफ़ी मांगनी पड़ी. खैर, अब इसके पहले कि ब्रा शब्द सुनकर आप नाक-मुंह सिकोड़ें, ये जान लें कि स्पोर्ट्स ब्रा वर्कआउट करने वाली औरतों के लिए बहुत ज़रूरी होती हैं.

इस घटना के बहाने हम आपको बताएंगे कि स्पोर्ट्स ब्रा होती क्या है.

नाम से ही काफी कुछ समझ गए होंगे. फिर भी, ऐसी ब्रा जो औरतों के ब्रेस्ट को भारी-भरकम कसरत या रनिंग के दौरान सपोर्ट देती है. वो स्पोर्ट्स ब्रा कहलाती है. उन्हें वर्कआउट के दौरान सहज महसूस कराती हैं. Clovia डॉट कॉम के एक आर्टिकल में स्पोर्ट्स ब्रा की परिभाषा के तौर पर लिखा गया है कि-

स्पोर्ट्स ब्रा शारीरिक तौर पर एक्टिव महिलाओं के लिए बहुत ज़रूरी है. ब्रेस्ट का सबसे अहम सपोर्ट होती हैं. उन्हें सैगी (ढीला) होने से, किसी तरह की चोट लगने से बचाती है. स्पोर्ट्स ब्रा रेगुलर ब्रा से बेहद अलग होती हैं. खासतौर पर स्पोर्ट्स में शामिल महिलाओं, रनिंग, कसरत या किसी भी तरह का वर्कआउट करने वाली महिलाओं के लिए इसे बनाया गया है.

Sports Bra (7)
स्पोर्ट्स ब्रा का इतिहास करीब 45 बरस पुराना है. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)

डॉक्टर शैफाली अग्रवाल, अपोलो हॉस्पिटल में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट में सीनियर कंसल्टेंट हैं. ‘दी लल्लनटॉप’ को उन्होंने बताया,

“बहुत सी स्टडीज़ से ये साबित हुआ है कि कम सपोर्ट की वजह से दर्द होता है. दर्द होने की संभावना, हर साल उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती है. वो लिगामेंट्स जो ब्रेस्ट को सपोर्ट करते हैं, ब्रेस्ट को शेप में रखने के लिए ज़रूरी होते हैं. लेकिन बिना सपोर्ट के एक्सरसाइज़ करने से, इन लिगामेंट्स में खिंचाव होता है, जिसकी वजह से दर्द भी महसूस होता है. और ब्रेस्ट की सैगिंग प्रोसेस (ढीले होने की प्रक्रिया) में तेज़ी आ जाती है. ये लिगामेंट्स बहुत नाज़ुक होते हैं, ऐसे में बिना सपोर्ट के वर्कआउट करने से ये हमेशा के लिए डैमेज हो सकते हैं. इसलिए अच्छी फिटिंग वाले स्पोर्ट्स ब्रा असहजता, दर्द और निपल इंजरी से बचाते हैं. और सैगिंग भी कम करते हैं.”

हमने सर्टिफाइड पर्सनल ट्रेनर अंशु तिवारी से भी बात की. उनके मुताबिक, जो औरतें रेगुलर ब्रा पहनकर एक्सरसाइज़ करती हैं उन्हें कुछ समय के बाद भारी दिक्कतें होने लगती हैं. जिसका ज़िक्र डॉक्टर शैफाली ने भी किया.

Sports Bra (8)
कई डिज़ाइन के स्पोर्ट्स ब्रा मार्केट में मौजूद हैं. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)

स्पोर्ट्स ब्रा की ज़रूरत कब और क्यों पड़ी?

‘साइंस हिस्ट्री’ में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक, आज के समय में लड़कियों के जिस तरह के अंडरगारमेंट्स होते हैं, उन्हें उस रूप में लाने की शुरुआत हुई थी 19वीं सदी के आखिर में. तब मॉडर्न ब्रेज़ियर या ब्राज़ियर (brassiere) की डिज़ाइनिंग शुरू हुई. ब्रेज़ियर, ब्रा का ही फुल फॉर्म है. लड़कियों ने इन्हें पहनना शुरू किया. पहले लड़कियां स्पोर्ट्स में ज्यादा होती नहीं थीं, लेकिन धीरे-धीरे स्पोर्ट्स में भी उनकी एंट्री हुई. रेगुलर ब्रा पहनकर वर्कआउट करने लगीं, खेलने लगीं. लेकिन इन ब्रा से उनके ब्रेस्ट को ज़रूरी सपोर्ट नहीं मिलता था. तो धीरे-धीरे वर्कआउट करने वाली औरतों को दिक्कतें शुरू हुईं. जैसे- छाती या ब्रेस्ट में दर्द होना. इन दिक्कतों के साथ ही स्पोर्ट्स ब्रा की तरफ कदम भी बढ़ने लगे.

‘डेड स्पिन’ में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक, 1975 में पहला स्पोर्ट्स ब्रा बना, ‘फ्री स्विंग टेनिस ब्रा’ के नाम से. जिसने ब्रेस्ट को रेगुलर ब्रा की तुलना में ज्यादा सपोर्ट दिया, लेकिन ज्यादा उपयोगी साबित नहीं हुआ. रनिंग और जॉगिंग के लिए तो ये फेल ही हो गया.

Lisa Lindahl
लीसा लिंडाल, इनकी वजह से ही आज औरतों को स्पोर्ट्स ब्रा नसीब हो पाई है. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)

फिर आया साल 1977. इसी बरस दुनिया को असल मायने में पहला स्पोर्ट्स ब्रा मिला. अमेरिका में रहने वाली लीसा लिंडाल ( Lisa Lindahl) को इसका क्रेडिट जाता है. ‘साइंस हिस्ट्री’ में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक, लीसा को जॉगिंग करना पसंद था. लेकिन रेगुलर ब्रा की वजह से उनकी रनिंग काफी पीड़ादायक हो गई थी. साल 1977 के एक दिन उनकी बहन ने उन्हें कॉल किया और बताया कि उन्होंने भी अभी-अभी जॉगिंग करना शुरू किया है. ब्रेस्ट की वजह से उनकी जॉगिंग कितनी पीड़ादायक हो रही है, ये भी बताया. फिर लीसा से इसका उपाय पूछा. लीसा ने कहा कि वो एक साइज छोटी ब्रा पहनकर वर्कआउट करती हैं. इस पर उनकी बहन ने मज़ाक के तौर पर कहा,

“औरतों के लिए कोई ‘जॉकस्ट्रैप्स’ (Jockstrap) क्यों नहीं है?”

इस बात पर दोनों बहनें खूब हंसी, लेकिन लीसा के दिमाग में ये बात बैठ गई. ‘जॉकस्ट्रैप्स’ साइकिलिंग करने वाले, या फिर स्पोर्ट्स में शामिल पुरुषों के लिए बनाई गई खास अंडरवियर थी. इससे उनके जननांग को चुनौतिपूर्ण शारीरिक कामों से सुरक्षा मिलती थी.

वापस लीसा पर आते हैं. वो सोचने लगीं कि औरतों के लिए कोई जॉकस्ट्रैप्स क्यों नहीं हैं? फिर एक दिन उनके पति ने अपनी जॉकस्ट्रैप्स उठाई, नीचे का हिस्सा ऊपर की तरफ करते हुए अपने चेस्ट से लगाया और मज़ाक में कहा,

“लेडीज़, ये रही तुम्हारी ‘जॉक ब्रा’.”

मज़ाक मजाक में उन्हें समझ आ गया था कि इसी की मदद से वो अपनी दिक्कत का हल निकाल सकती हैं. उनकी दोस्त पॉली स्मिथ को उन्होंने ये बात बताई. पॉली जो कि पेशे से डिजाइनर थीं, उन्होंने दो जॉकस्ट्रैप्स लीं और उन्हें एकसाथ जोड़कर सिला. लीसा ने उसे ट्राई किया और उन्हें रेगुलर ब्रा से कहीं ज्यादा कम्फर्ट महसूस हुआ. दोनों ने इसे ‘जॉकब्रा’ नाम दिया. इस तरह बना असल मायनों वाला पहला स्पोर्ट्स ब्रा. लीसा ने पॉली की दोस्त हिंडा श्राइबर के साथ मिलकर कई सारे ‘जॉकब्रा’ बनाए. स्पोर्ट्स का सामान रखने वाली दुकानों में रखवाया. बाद में इसका नाम बदलकर ‘जॉगब्रा’ कर दिया गया.

Polly Smith
पॉली स्मिथ, लीसा की दोस्त. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)

‘साइंस हिस्ट्री’ के आर्टिकल के मुताबिक, लीसा के ‘जॉकब्रा’ के शुरुआती नमूने अभी भी स्मिथसोनियन म्यूजियम ऑफ अमेरिकन हिस्ट्री और मेट्रोपोलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट में रखे हुए हैं.

फिर कई तरह की रिसर्च हुई

पहली स्पोर्ट्स ब्रा बनने के बाद कई तरह की रिसर्च हुईं. उसे नए तरीकों से और ज़रूरत के हिसाब से डेवलप करने के लिए. क्रिस्टीन हेकॉक (Christine Haycock), जो ‘यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसीन एंड डेंटिस्ट्री ऑफ न्यू जर्सी’ में सर्जरी प्रोफेसर थीं, उन्होंने स्पोर्ट्स ब्रा में साइंस वाला एंगल लाया. ‘दी कन्वर्सेशन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने करीब 300 महिला कॉलेज एथलीट को दौड़ाकर देखा. उस दौरान उनके ब्रेस्ट की मूवमेंट को रिकॉर्ड किया. उनकी रिसर्च में सामने आया कि वर्कआउट के दौरान ब्रेस्ट पेन होता है. इस रिसर्च के बाद, स्पोर्ट्स ब्रा बनाने वालों ने हेकॉक के इनपुट मांगे. हेकॉक ने ज़ोर दिया कि स्पोर्ट्स ब्रा के नीचे चौड़ी पट्टी होनी चाहिए, और स्ट्रैप्स भी कम इलास्टिसिटी वाले हों, ताकि ब्रेस्ट को ज्यादा से ज्यादा सपोर्ट मिले.

Jogbra
कुछ ऐसी दिखती थी ‘जॉगब्रा’. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)

इसके बाद समय-समय पर और भी कई तरह की रिसर्च होती रहीं. कुछ ही समय में स्पोर्ट्स ब्रा महिलाओं के बीच काफी पॉपुलर हो गईं. एथलीट इन्हें पहनने लगे. 1999 वो साल था, जब पहली बार स्पोर्स्ट ब्रा को किसी महिला खिलाड़ी की बदौलत भयंकर पॉपुलैरिटी मिली.

ब्रांडी चैस्टेन (Brandi Chastain), पूर्व अमेरिकी सॉकर प्लेयर हैं. 1999 में हुए फीफा विमन्स वर्ल्ड कप फाइनल, जो चीन के साथ हुआ था, उसमें पैनल्टी शूटआउट में स्कोर करने के बाद भयंकर खुश हुईं थीं. और इसी खुशी में ग्राउंड पर ही घुटनों के बल बैठ गईं और जर्सी उतार दी थी. जर्सी के नीचे ब्रांडी ने काले रंग की स्पोर्ट्स ब्रा पहनी थी. वो पल कैमरे में कैद हो गया. ‘दी न्यू यॉर्क टाइम्स’ ने उस तस्वीर को ‘किसी महिला खिलाड़ी की सबसे आइकॉनिक तस्वीर’ कहा. ब्रांडी ने उस दिन ग्राउंड पर जो किया, उसने स्पोर्ट्स ब्रा को सबसे बड़ी किक दी.

Brandi Chastain
ब्रांडी चैस्टेन की आइकॉनिक तस्वीर. फोटो- AP

स्पोर्ट्स ब्रा में ऐसा क्या खास है कि ब्रेस्ट को सपोर्ट मिलता है

महिलाओं के सामान्य और रोज़ाना के काम को देखते हुए रेगुलर ब्रा बने थे. वहीं स्पोर्ट्स ब्रा, वर्कआउट को ध्यान में रखते हुए बनाए गए. रेगुलर ब्रा के मुकाबले, ब्रेस्ट को ज्यादा कवर करते हैं. पीठ को भी सपोर्ट देते हैं. ‘लिंक डॉट स्प्रिंगर’ में छपे एक आर्टिकल और ‘यूनिवर्सिटी ऑफ वॉलोन्गॉन्ग’ में ऑनलाइन पब्लिश हुई एक रिसर्च के मुताबिक: . इन ब्राज़ में स्ट्रैप्स रेगुलर ब्रा के मुकाबले ज्यादा चौड़ी होती हैं, पीठ की तरफ यानी बैक साइड भी या तो चौड़े क्रॉस स्ट्रैप्स होते हैं, या फिर इस तरह की डिज़ाइन होती है, जो ब्रेस्ट को ज्यादा से ज्यादा सपोर्ट देते हैं. जितने चौड़े स्ट्रैप्स होंगे, ब्रेस्ट को उतना ज्यादा सपोर्ट मिलेगा. बैक को भी उतना सपोर्ट मिलेगा. – स्ट्रैप्स के चौड़े होने का एक मकसद ये भी है कि वर्कआउट के वक्त, कंधों से फिसलकर ये नीचे न आएं. या फिर कंधों में गहरे निशान न छोड़ें. जो अक्सर रेगुलर ब्राज़ के साथ होता है.

फंक्शन के आधार पर कितने स्पोर्ट्स ब्रा?

मौजूदा समय में, स्पोर्ट्स ब्रा को आमतौर पर दो कैटेगिरी में बांटा गया है- इनकैप्सुलेशन (encapsulation) ब्रा और कम्प्रैशन (compression) ब्रा.

कम्प्रैशन ब्रा- ऐसे स्पोर्ट्स ब्रा जो दोनों ब्रेस्ट को समान रूप से दबाव देते हुए एकसाथ छाती की तरफ प्रेस करते हुए सपोर्ट देते हैं. ताकि उनका मूवमेंट कम हो.

इनकैप्सुलेशन ब्रा- ऐसे ब्रा जो दोनों ब्रेस्ट को अलग करते हुए, सपोर्ट देते हैं.

Sports Bra (2)
कम्प्रैशन ब्रा और इनकैप्सुलेशन ब्रा. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)

‘लिंक डॉट स्प्रिंगर’ के आर्टिकल के मुताबिक, दोनों में से कौन-सा ब्रा ज्यादा इफेक्टिव है, इसे लेकर भी कई तरह की स्टडीज़ हुईं, ज्यादातर स्टडीज़ में यही पाया गया कि दोनों में कोई बड़ा और ठोस अंतर देखने को नहीं मिला.

हालांकि स्पोर्ट्स ब्रा को वर्कआउट के नेचर के आधार पर भी तीन भागों में बांटा गया है. जैसे हाई इम्पैक्ट, मीडियम और लो इम्पैक्ट ब्रा. मान लीजिए कि कोई औरत रनिंग करती है, तो इसमें ब्रेस्ट का मूवमेंट काफी ज्यादा होगा, ये हाई इंटेसिटी (कम समय में ज्यादा वर्कआउट) वाली एक्सरसाइज़ की श्रेणी में आएगा, इसमें ब्रेस्ट को ज्यादा से ज्यादा सपोर्ट की ज़रूरत होगी. इसलिए हाई इम्पैक्ट वाली स्पोर्ट्स ब्रा यहां काम आएगी. वैसे ही थोड़ी-बहुत या लाइट एक्सरसाइज़ के लिए मीडियम इम्पैक्ट वाली ब्रा और योग वगैरह के लिए लो इम्पैक्ट वाली ब्रा की ज़रूरत होगी.

कौन-सी ब्रा हाई इम्पैक्ट वाली है, कौन-सी मीडियम और लो इम्पैक्ट वाली है, ये ब्रा के स्टोर में आपको पता चल जाएगा. या फिर अगर आप ऑनलाइन भी खरीदेंगी, तो भी इन कैटेगिरी के आधार पर आपको ब्राज़ मिलेंगी. एक ज़रूरी बात, आपके वर्कआउट का जो नेचर होगा, उसी के हिसाब से आपको स्पोर्ट्स ब्रा पहननी चाहिए. इस पर अंशु तिवारी कहती हैं,

“योग में आपका जो मूवमेंट है, भले ही वो इंटेंस मूवमेंट है, लेकिन हम उसे धीरे-धीरे कर रहे हैं. ऐसे में हमें हाई इम्पैक्ट ब्रा की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि उस केस में अगर हम हाई इम्पैक्ट ब्रा पहनते हैं, तो वो हमारे मूवमेंट को रोक सकता है. क्योंकि योग में हमारे मूवमेंट्स में काफी टर्न और ट्विस्ट होता है, तो इन मूवमेंट्स को हमारा ब्रा सपोर्ट नहीं करेगा, तो सही नहीं. तो ये समझकर आपको स्पोर्ट्स ब्रा पिक करना चाहिए कि आपके वर्कआउट का नेचर क्या है.”

पहनने के तरीके के आधार पर कैसे चुनें स्पोर्ट्स ब्रा?

पहला तो ज्यादातर स्पोर्ट्स ब्रा हर तरफ से कवर्ड होती हैं, यानी उसे आपको किसी टीशर्ट की तरह ही सिर की तरफ से पहनना होता है, जिन्हें पुल-ओवर ब्रा कहते हैं. दूसरा हुक वाली स्पोर्ट्स ब्रा, जो पहनने में थोड़ी आसान होती हैं. तीसरी ज़िप वाली, ये भी पहनने में आसान होती हैं.

ज्यादा कम्फर्टेबल कौन-सी होती है?

ये जानने के लिए हमने बात की कुमुद (नाम बदल दिया गया है) से. वो रोज़ाना साइकलिंग करती हैं, 28 बरस की हैं. कहती हैं,

“शुरुआत में जब स्पोर्ट्स ब्रा पहनना शुरू किया था, तब अजीब लगता था. बंधा-बंधा सा लगता था. लेकिन अभी कम्फर्टेबल हो गई हूं. मेरे पास बिना हुक वाला, हुक वाला और फ्रंट ज़िप वाला, तीनों तरह के स्पोर्ट्स ब्रा हैं. बिना हुक वाला पहनने में ज्यादा मुश्किल होती है. उसको पहनना और उतारना एक टास्क लगता है मुझे अभी तक. लेकिन एक बार पहन लो तो एक्सरसाइज़ के लिए वही कंफर्टेबल होता है सबसे ज्यादा. वहीं हुक वाला चुभता है और ज़िप वाले में ज़िप खुलने का डर बना रहता है.”

इसी मुद्दे पर अंशु कहती हैं,

“मैं पर्सनली हुक वाले स्पोर्ट्स ब्रा को प्रिफर नहीं करती. क्योंकि मुझे हुक्स का झंझट नहीं चाहिए. ऐसा नहीं है कि वो अच्छे नहीं होते, किसी-किसी को वो पसंद होते हैं. लेकिन मैं पर्सनली उसे प्रिफर नहीं करती, क्योंकि कहीं न कहीं मुझे ऐसा लगता है कि वो चुभेगा या वो कम्फर्टेबल नहीं होगा.”

Sports Bra (10)
हुक वाला ब्रा. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)

वहीं सर्टिफाइड पर्सनल ट्रेनर जोएना की राय इसमें अलग है. उन्होंने अपने एक यूट्यूब वीडियो में कहा,

“मुझे हुक वाले स्पोर्ट्स ब्रा पसंद हैं. क्योंकि इन्हें पहनना-उतारना बहुत आसान होता है. वहीं बिना हुक वालों को पहनने-उतारने में बहुत दिक्कत होती है.”

वैसे इस मुद्दे पर हर किसी की राय अलग-अलग होती है, अपने-अपने कम्फर्ट के हिसाब से.

Sports Bra (9)
ज़िप वाला ब्रा. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)

पोस्ट सर्जरी इस्तेमाल होने वाली मेडिकल ब्रा क्या है?

स्पोर्ट्स ब्रा की तरह ही एक और कम्प्रैशन ब्रा होती है, जिसे मेडिकल ब्रा या पोस्ट-सर्जिकल ब्रा कहा जाता है. इनका इस्तेमाल ब्रेस्ट से जुड़ी हुई किसी सर्जरी के बाद किया जाता है, ज्यादातर डॉक्टर्स इसे रिकमेंड करते हैं. दिखती तो ये स्पोर्ट्स ब्रा की तरह ही हैं, लेकिन बनाने का कॉन्सेप्ट पूरा अलग होता है.

Surgical Bra
पोस्ट सर्जरी ब्रा या मेडिकल ब्रा. (फोटो- एमेज़ॉन)

पुरुषों के लिए भी ऐसा कुछ बनाया गया है

वर्कआउट के दौरान बाउंसिंग ब्रेस्ट की दिक्कत केवल महिलाओं को हो, ऐसा नहीं है. कुछ पुरुषों को, खासतौर पर जो मोटापे से जूझ रहे हों, उन्हें भी इस तरह की दिक्कत होती है. चेस्ट के आस-पास ज़्यादा चर्बी जमा होने की वजह से वर्कआउट के वक्त दर्द हो सकता है. ऐसे में इन आदमियों के लिए भी स्पोर्ट्स ब्रा जैसी इनरवियर बनाई जा चुकी है. जिसे चेस्ट बाइंडर्स या कम्प्रैशन वेस्ट कहते हैं.

Chest Binders And Compression Vests
आदमियों के लिए चेस्ट बाइंडर्स या कम्प्रैशन वेस्ट. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)

1975-77 से शुरू हुआ सफर अभी तक चल रहा है और ये रुकने वाला नहीं है. वक्त और ज़रूरत के हिसाब से मार्केट में अलग-अलग तरह की स्पोर्ट्स ब्रा आ रही हैं, और आती रहेंगी.

जब बात स्पोर्ट्स की हो तो ब्रेस्ट महिलाओं की दौड़-भाग में बड़ी बाधा बन सकते हैं. उनकी स्पीड कम कर सकते हैं. जहां पहले ही मां-बाप अपनी बेटियों को स्पोर्ट्स में भेजने को लेकर सहज नहीं  होते, बुरे गारमेंट्स उनके खेल को और कमज़ोर करते हैं. ऐसे में स्पोर्ट्स ब्रा खेलने वाली महिलाओं के लिए किसी क्रांति से कम नहीं है. इंडिया जैसे देश में, जहां सारा जोर लड़कियों की फिटनेस के बजाय खुद को पतला रखने पर है, वो दिन जब हर लड़की के पास कम से कम एक स्पोर्ट्स ब्रा होगा, एक खुशनुमा दिन होगा.


वीडियो देखें: बेंगलुरु के पार्क में वर्क आउट कर रही एक्ट्रेस का आरोप कांग्रेस नेता कविता रेड्डी ने बदतमीज़ी की

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्राइम

झारखंड : फेसबुक पर दोस्त बने लड़के से मिलने गई, घर जिंदा नहीं लौटी!

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लड़की के साथ रेप की पुष्टि हुई है.

पार्क में एक्ट्रेस और उनकी दोस्तों से मारपीट के आरोप पर क्या बोलीं कांग्रेस नेता?

एक्ट्रेस सम्युक्ता हेगड़े ने लाइव वीडियो बनाया था. अब कविता रेड्डी ने भी अपना पक्ष रखा है.

मैट्रिमोनियल साइट पर दोस्ती की और फिर झूठ बोल-बोलकर 6.19 लाख रुपये ठग लिए

पैसे न देने पर प्राइवेट फोटो पब्लिक करने की धमकी देता था.

लड़की की एक चालाकी ने दिल्ली के पार्कों में 20 गैंगरेप करने का आरोपी गैंग पकड़वा दिया!

दोस्तों के साथ घूमने आने वाली लड़कियों को बनाते थे शिकार, रेप के विडियो वायरल करने की देते थे धमकी.

139 लोगों के खिलाफ रेप का केस दर्ज कराने वाली महिला अब अलग ही बात कह रही है

हैदराबाद का मामला है. 42 पन्नों में इस केस की FIR हुई थी.

बच्चों और महिलाओं के साथ हिंसा की खुलेआम वकालत कर रही है ये वेबसाइट!

ऐसी-ऐसी बातें लिखी हैं कि पढ़कर इंसानियत पर से भरोसा उठ जाए.

कोरोना पॉजिटिव बताकर 14 दिन दवा खिलाई, फिर पता चला कभी संक्रमण था ही नहीं

होम आइसोलेशन के दौरान वे दवाएं भी खानी पड़ी जिनसे महिला को एलर्जी थी.

इंजीनियर ने कथित तौर पर नौ महीने की बच्ची के साथ पांचवी मंजिल से कूदकर जान दे दी

महिला के परिजनों ने ससुरालवालों पर धक्का देने का आरोप लगाया.

आरोप: घर बुलाकर स्कूल के मैनेजर ने छात्रा का रेप कर वीडिया बनाया था, पुलिस ने गिरफ्तार किया

पॉक्सो समते IPC की कई धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ.

महिला ने वीडियो बनाकर इंसाफ मांगा और फांसी लगाकर जान दे दी

सोशल मीडिया तक वीडियो पहुंचने के बाद पुलिस ने पति और सास को अरेस्ट किया.