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एक दशक पुरानी लड़ाई के बाद नेवी में औरतों को अब आदमियों की बराबरी का हक मिला

भारतीय जल सेना, यानी Navy (नेवी). इसमें शामिल सभी महिलाओं को अब परमानेंट कमीशन मिलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च को ये आदेश दिया है. यानी अब महिलाएं रिटायरमेंट की उम्र तक काम कर सकेंगी. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस धनंजय वाई. चंद्रचूर्ण के नेतृत्व वाली बेंच ने ये फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि परमानेंट कमीशन देने में महिलाओं के साथ जेंडर के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता.

कोर्ट ने कहा कि नेवी में महिलाओं की एंट्री होने के बाद अगर उनके साथ उनके पुरुष साथियों की तरह बर्ताव नहीं किया जा रहा, तो ये साफ तौर पर भेदभाव ही है. ‘बार एंड बेंच’ के मुताबिक, केंद्र की तरफ से औरतों और पुरुषों के बीच साइकोलॉजिकल अंतर होने का तर्क दिया गया था. इस पर कोर्ट ने कहा कि औरतें भी उतनी ही कुशलता के साथ सेल कर सकती हैं, जितना कि पुरुष और इसमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए.

कोर्ट की तरफ से कहा गया,

‘एक बार जब नेवी में महिलाओं की एंट्री पर लगा वैधानिक बार हट गया, तो फिर महिला और पुरुष अधिकारियों को परमानेंट कमीशन मिलने में किसी तरह का भेदभाव नहीं हो सकता. संवैधानिक तौर पर हर व्यक्ति चाहे किसी भी जेंडर का हो, कामकाज की स्थिति न्यायपूर्ण और सामान पाने का अधिकार है, इसके लिए 101 बहाने बनाना कोई जवाब नहीं है.’

आगे कोर्ट ने ये भी कहा कि महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन देने से मना करने से उन SSC (शॉर्ट सर्विस कमीशन) महिला अधिकारियों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने देश की सेवा की.

Navy Women Officers
2008 की पॉलिसी के बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई. प्रतीकात्मक तस्वीर. फोटो- ट्विटर.

इन बातों के साथ कोर्ट ने क्या आदेश दिए?

– इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि नेवी में मौजूद सभी SSC महिला अधिकारियों को और कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन दिया जाए.

– केंद्र सरकार तीन महीने के अंदर SSC महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन देने के लिए कदम उठाए.

– 2006 और 2008 के बीच रिटायर होने वाली नेवी की जिन महिला अधिकारियों ने कोर्ट में परमानेंट कमीशन के लिए अपील डाली, उन्हें 25 लाख रुपए का मुआवज़ा और पेंशन की सुविधा दी जाए.

– परमानेंट कमीशन के लिए वैकेंसी की उपलब्धता के आधार पर और चीफ नेवल स्टाफ के कहने पर आवेदन लिए जाएं.

केंद्र ने क्या दलील दी थी?

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र ने कहा था कि जलयात्रा संबंधी ड्यूटी SSC महिला अधिकारियों को इसलिए नहीं दी जा सकती क्योंकि रूसी जहाज में उनके लिए वॉशरूम नहीं है. इसके अलावा महिला और पुरुष अधिकारियों के बीच साइकोलॉजिकल अंतर भी एक कारण बताया था.

नेवी में महिलाओं को परमानेंट कमीशन मिलने का सफर

इस लड़ाई का इतिहास बहुत लंबा है. नेवी में महिला अधिकारियों का चयन SSC के जरिए ही होता है, जिसमें दस साल और अधिकतम 14 साल तक ही सर्विस दी जाती है. 1990 के शुरुआती दशक में वायुसेना में SSC के जरिए महिलाओं की भर्तियां हुईं. तब होता क्या था कि पुरुष अधिकारी और महिला अधिकारी दोनों ही SSC के जरिए ही आते थे, लेकिन पुरुष अधिकारियों को परमानेंट कमीशन मिल जाता था और महिला अधिकारियों को नहीं.

इस पूरे मामले में हमने नेवी महिला अधिकारियों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में लड़ने वाली वकील पूजा से बात की. उन्होंने जो बताया, उसके मुताबिक, साल 2006 और 2008 के बीच पहले, दूसरे और तीसरे बैच की महिलाओं के 14 साल पूरे होने को आए. इन बैचेस की महिला अधिकारी रिटायर हो गईं. उन्हें परमानेंट कमीशन नहीं दिया गया.

इसी के चलते 90 के दशक की शुरुआत से लेकर 2008 के बीच तक महिलाओं के परमानेंट कमीशन की मांग बीच-बीज में उठती गई. साल 2008 में सरकार ने एक पॉलिसी बनाई. ये कि 2008 के बाद जो भी महिला ऑफिसर नेवी में भर्ती होंगी, उन्हें परमानेंट कमीशन दिया जाएगा. अब क्योंकि 1991-92 के बाद से तो हर साल SSC के जरिए महिला अधिकारियों की भर्ती हो ही रही थी, 2008 में कई महिला अधिकारी ऐसी थीं, जिनके 14 साल पूरे होने में वक्त था, लेकिन 2008 की पॉलिसी में उन्हें परमानेंट कमीशन देने की बात नहीं की गई थी.

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सुप्रीम कोर्ट ने नेवी की महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन देने का आदेश दिया.

उसके बाद शुरू हुई लीगल लड़ाई. 2008 के बाद रिटायर होने वाली कुछ महिला अधिकारियों ने परमानेंट कमीशन की मांग करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा. फिर 2015 में हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया. कहा कि 2008 के बाद रिटायर होने वाली सभी नेवी महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन दिया जाए, उन्हें फिर से भर्ती किया जाए. इस बीच 2008 से 2015 के बीच कई महिला अधिकारी 14 साल पूरे करके रिटायर हो चुकी थीं. कोर्ट ने इन्हीं सबको फिर से भर्ती करने के आदेश दिए.

कोर्ट के फैसले को चैलेंज करते हुए केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची. कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि 2008 की पॉलिसी आने के बाद जितनी महिला अधिकारी रिटायर हुई हैं, उन्हें वापस जॉब पर रखो. ये कोर्ट का अंतरिम आदेश था. तब वापस रखी जा रही अधिकारियों को परमानेंट कमीशन दिया जाएगा या नहीं, इस पर कोर्ट ने फैसला नहीं दिया था. केवल इतना कहा था कि इन्हें वापस रखो, तब तक परमानेंट कमीशन के मुद्दे पर सुनवाई की जाएगी. ये भी कहा कि 2006 और 2008 के बीच रिटायर होने वालों को रिटायर कर दो.

फिर आया 17 मार्च, 2020 का ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने नेवी में काम कर रही सभी महिलाओं को, इनमें वो महिलाएं भी शामिल हैं जो 2008 के बाद रिटायर हुई थीं और उन्हें दोबारा नौकरी पर रखा गया था. अब इन सभी महिलाओं को परमानेंट कमीशन मिलेगा. इसके अलावा 2006 और 2008 के बीच रिटायर होने वाली जो महिलाएं कोर्ट पहुंची थीं, उन्हें पेंशन और मुआवज़ा दिया जाएगा.

क्या होता है परमानेंट कमीशन?

परमानेंट कमीशन यानी रिटायरमेंट की उम्र तक सेना में सेवाएं देना. प्रमोशन होता है. रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलती है. वहीं SSC में पेंशन नहीं मिलती है. SSC में कमांडर के पद से ही रिटायर कर दिया जाता है, लेकिन परमानेंट कमीशन में एडमिरल तक बनने के मौके मिलते हैं. परमानेंट कमीशन में जॉब सिक्योरिटी ज्यादा होती है. बहुत से लाभ मिलते हैं.

कुछ दिन पहले आर्मी में महिलाओं को लेकर फैसला सुनाया था

17 फरवरी, 2020 के दिन सुप्रीम कोर्ट ने आर्मी में सेवाएं दे रही महिलाओं को परमानेंट कमीशन देने का ऑर्डर दिया था. एक महीने के बाद ही नेवी के लिए भी यही फैसला दिया गया.


वीडियो देखें: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा, आर्मी में महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन देना पड़ेगा

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