Submit your post

Follow Us

दक्षिण कोरिया की औरतें क्यों रख रही हैं छोटे बाल, वजह आंखों से पर्दा हटा देगी

दक्षिण कोरिया की आन सान. तीरंदाज हैं. पिछले दिनों उन्होंने  टोक्यो ओलंपिक्स में हिस्सा लिया और जीतीं भी. एक नहीं तीन गोल्ड मेडल उन्होंने अपने नाम किए. वो ऐसा करने वाली पहली दक्षिण कोरियाई एथलीट बनीं. दुनियाभर में उनकी प्रतिभा की तारीफ हुई. दक्षिण कोरिया में भी उनकी तारीफ हुई. लेकिन तारीफ के साथ-साथ उन्हें निशाना भी बनाया गया. सिर्फ इसलिए क्योंकि उनके बाल छोटे थे. उन्हें ‘फेमिनिस्ट’ बताकर ट्रोल किया गया. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर एक व्यक्ति ने आन सान के बारे में पोस्ट करते हुए लिखा,

“यह अच्छी बात है कि उसने गोल्ड मेडल जीते. लेकिन उसके छोटे बालों से लगता है कि वो एक फेमिनिस्ट है. अगर वो फेमिनिस्ट है, तो मैं अपना समर्थन वापस लेता हूं. सभी फेमिनिस्ट को मर जाना चाहिए.”

अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया के युवा लड़कों के बीच स्त्री विरोधी भावना बढ़ रही है. ये लड़के फेमिनिज्म यानी नारीवाद को पुरुष विरोधी कवायद मानते हैं. एक तयशुदा ढांचे से इतर जीने वाली महिलाएं और लड़कियां इन्हें फेमिनिस्ट लगती हैं. ऐसे में जब उन्होंने तीरंदाज आन सान के छोटे बाल देखे, तो उनके ऊपर भद्दे कमेंट्स की बौछार कर दी. आन सान इससे इतना परेशान हुईं कि ओलंपिक्स के दौरान रिपोर्टर्स के सवाल से पहले ही उन्होंने कह दिया कि वो ऑनलाइन ट्रोलिंग को लेकर कोई जवाब नहीं देंगी.

तीरंदाज के समर्थन में आई महिलाएं

इस ट्रोलिंग का जवाब दिया दक्षिण कोरिया की अनेक महिलाओं ने. उन्होंने आन सान के समर्थन में अपने बाल छोटे करा लिए और फिर अपनी फोटो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कीं. इससे पहले देश के नेताओं ने भी उनका समर्थन किया. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जब आन सान को निशाना बनाया गया, तो जस्टिस पार्टी की सांसद सिम सांग ने उनके समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. उन्होंने लिखा,

“अपने दृढ़ निश्चय और मेहनत से दुनिया के हर पूर्वाग्रह पर निशाना लगाओ और उसे खत्म कर दो. हम तुम्हारे छोटे बालों वाले लुक का समर्थन करते हैं. तुम्हारा समर्थन करते हैं.”

इधर जिन महिलाओं ने आन सान का समर्थन किया, उनका कहना है कि छोटे बाल रखना उन्हें किसी से कमतर नहीं बनाता. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इन महिलाओं का कहना है कि छोटे बालों में भी वो उतनी ही महिला हैं, जितना कि बड़े बालों में. रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया में महिलाओं ने लंबे समय तक भेदभाव का सामना किया है. हालांकि, पिछले एक दशक में उन्होंने अपनी आवाज उठाई है और कुछ अधिकार हासिल किए हैं. उदाहरण के लिए दक्षिण कोरिया की महिलाओं ने लंबे प्रोटेस्ट के बाद अबॉर्शन पर लगे बैन को हटवाने में सफलता पाई. वहीं मीटू मूवमेंट के तहत अपनी आवाज को बुलंद किया.

शुरू किया गया कैंपेन

आन सान का समर्थन करने के लिए दक्षिण कोरिया की महिलाओं ने ट्विटर पर एक कैंपन चलाया. हैशटैग women_shortcut_campaign नाम से. इसके तहत दो फोटो अपलोड की जाती हैं. पहली में महिला के बाल बड़े होते हैं और दूसरी में छोटे. बीबीसी के मुताबिक इन महिलाओं ने जब आन सान की ट्रोलिंग देखी, तो उन्हें लगा कि यह संदेश देना जरूरी है कि महिलाओं के शरीर पर पुरुषों का हक नहीं है और किसी भी फेमिनिस्ट को ये छुपाने की जरूरत नहीं है कि वो फेमिनिस्ट हैं.


रिपोर्ट के मुताबिक, इस कैंपेन की शुरुआत हान जियॉन्ग नाम की एक महिला ने की. उन्होंने बीबीसी को बताया कि कैंपेन की शुरुआत करते हुए उनके मन में बस दो ही बातें थीं. पहला, ओलंपिक में गई महिला एथलीट्स को सपोर्ट करना और दूसरा फेमिनिज्म को लेकर जिस तरह का नकारात्मक माहौल बनाया गया, उसके खिलाफ नैरेटिव खड़ा करना.

इसके बाद दक्षिण कोरिया की हजारों महिलाओं ने अपनी इस तरह की फोटो सोशल मीडिया पर डालीं और लिखा की आन सान के हेयरस्टाइल ने उन्हें प्रोत्साहित किया है.

छोटे बाल फेमिनिज्म की निशानी क्यों?

अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2018 में दक्षिण कोरिया में एक आंदोलन हुआ. आंदोलन का नाम था- ‘कट द कोरसेट’. इस आंदोलन के दौरान युवा लड़कियों ने छोटे बाल और बिना मेकअप के जरिए सुंदरता के तयशुदा पैमानों को चुनौती दी. उसके बाद से ही छोटे बाल दक्षिण कोरिया में फेमिनिज्म की निशानी बन गए. इस आंदोलन का दक्षिण कोरिया के पुरुषों ने खासा विरोध किया था.

पुरुषों ने महिलाओं के एक और आंदोलन का विरोध किया. यह आंदोलन आन सान के ट्रोलिंग विवाद से कुछ समय पहले ही शुरू हुआ था. इसके तहत महिलाएं हाथ से एक खास तरह का इशारा कर रही थीं. उनका विरोध करने वालों ने कहा कि महिलाएं पुरुषों के जननांग को छोटा दिखाने के लिए ऐसा इशारा कर रही हैं. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस इशारे के तहत अंगूठे और उंगली को करीब लाया जाता है. इससे एक खास तरह के लोगो को बनाने की कोशिश होती है. यह लोगो एक रेडिकल फेमिनिस्ट संगठन का प्रतीक है. इस संगठन का नाम मेगालियन है.

 

रेडिकल फेमिनिस्ट ग्रुप मेगालिया का लोगो.
रेडिकल फेमिनिस्ट ग्रुप मेगालिया का लोगो.

मेगालियन संगठन के लोगो के वजह से कनवीनिएंस स्टोर GS 25 और बीबीक्यू चेन जेनेसिस को अपने प्रिंट ऐड्स हटाने पड़े. क्योंकि इनके ऐड्स, मेगालिया के लोगो जैसे लग रहे थे. ऐसे में इनका बहिष्कार करने की धमकी दी गई. यही नहीं इन कंपनियों को माफी भी मांगनी पड़ी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह की माफी मांगने की वजह से बहिष्कार करने वालों की हिम्मत बढ़ी और फिर उन्होंने ओलंपिक्स में देश का नाम ऊंचा करने वाली आन सान को निशाना बना लिया.

पुरुषों की कीमत पर महिलाओं की कामयाबी?

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, फेमिनिज्म से घृणा करने वाले ये पुरुष यह भी मानते हैं कि उनकी कीमत पर महिलाएं सफलता प्राप्त कर रही हैं. सोशल मीडिया पर इस तरह के समूह हैं, जहां बताया जाता है कि दक्षिण कोरिया में जितनी भी महिलाएं सफलता हासिल कर रही हैं, आगे बढ़ रही हैं, वो सब की सब पुरुषों को मौके छीनकर ऐसा कर रही हैं.

हालांकि, आंकड़े कुछ और ही कहते हैं. लैंगिक वेतन असमानता के मामले में दक्षिण कोरिया विकसित देशों की श्रेणी में शीर्ष में शामिल है. द इकॉनमिस्ट ग्लास सीलिंग रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया में एक ही काम के लिए महिला कर्मचारी को पुरुष कर्मचारी के मुकाबले 37 प्रतिशत कम वेतन मिलता है. यही रिपोर्ट बताती है कि एक कामकाजी महिला होने के लिहाज से दक्षिण कोरिया सबसे खराब विकसित देश है.

दक्षिण कोरिया की महिलाओं ने पिछले एक दशक में लगातार आवाज उठाई है और अपने लिए कई अधिकार हासिल किए हैं. इनमें सबसे अहम अबॉर्शन पर लगे बैन को खत्म करना. (फोटो: ट्विवटर)
दक्षिण कोरिया की महिलाओं ने पिछले एक दशक में लगातार आवाज उठाई है और अपने लिए कई अधिकार हासिल किए हैं. इनमें सबसे अहम अबॉर्शन पर लगे बैन को खत्म करना. (फोटो: ट्विवटर)

हालांकि, फेमनिज्म का विरोध करने वाले इन आंकड़ों को नकार देते हैं. दूसरी तरफ, दक्षिण कोरिया की महिलाएं भी अपने अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठा रही हैं. पिछले एक दशक में उन्होंने अपने लिए बहुत कुछ हासिल किया है. उन्हें उम्मीद है उनका कारवां आगे ही बढ़ता रहेगा.

कपड़ों के जरिए विरोध प्रदर्शन

कपड़ों और हेयर स्टाइल के जरिए किसी प्रोटेस्ट का हिस्सा बनना नई बात नहीं है. पिछले साल थाईलैंड में विरोध प्रदर्शनकारियों, खासकर महिला प्रदर्शनकारियों ने क्रॉप टॉप पहनकर वहां के राजा का विरोध किया था. इन प्रदर्शनकारियों ने लेसे मेजेस्टे कानून को खत्म करने की मांग की थी. जिसके तहत राजशाही का विरोध करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है. दरअसल, इन विरोध प्रदर्शनों से पहले यूरोपीय अखबारों में थाईलैंड के राजा की एक फोट छपी थी. जिसमें उन्हें क्रॉप टॉप पहने हुए दिखाया गया था. प्रदर्शनकारियों ने इसी फोटो को अपने विरोध प्रदर्शन का आधार बना लिया.

वहीं टोक्यो ओलंपिक में ही जर्मनी महिला हॉकी टीम की कैप्टन नाइक लॉरेंज ने LGBT कम्युनिटी को सपोर्ट करने के लिए सतरंगी मोजे पहने. हालांकि, पहले यह तय नहीं था कि वो ऐसा कर पाएंगी या नहीं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी का रूल 50 कहता है कि ओलंपिक खेलों के दौरान किसी भी तरह का राजनीतिक, धार्मिक और नस्लीय प्रचार-प्रसार नहीं किया जा सकता है. हालांकि, नाइक लॉरेंज के लिए इस नियम में ढील दी गई.


 

वीडियो- लंदन ओलंपिक्स में भारत की तरफ से मशाल उठाने वाली पिंकी कर्माकर मजदूरी कर रही हैं!

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्राइम

यूपी: नाबालिग ने 28 पर किया गैंगरेप का केस, FIR में सपा-बसपा के जिलाध्यक्षों के भी नाम

यूपी: नाबालिग ने 28 पर किया गैंगरेप का केस, FIR में सपा-बसपा के जिलाध्यक्षों के भी नाम

पिता के अलावा ताऊ, चाचा पर भी लगाए गंभीर आरोप.

कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद बेटी ने आतंकियों को 'कुरान का संदेश' दे दिया!

कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद बेटी ने आतंकियों को 'कुरान का संदेश' दे दिया!

श्रद्धा बिंद्रू ने आतंकियों को किस बात के लिए ललकारा है?

बिहार: महिला चिल्लाती रही, लोग बदन पर हाथ डालते रहे; वीडियो भी वायरल किया

बिहार: महिला चिल्लाती रही, लोग बदन पर हाथ डालते रहे; वीडियो भी वायरल किया

बिहार की पुलिस ने क्या एक्शन लिया?

महिला अफसर के यौन उत्पीड़न का ये मामला है क्या जिसके छींटे वायु सेना पर भी पड़े हैं?

महिला अफसर के यौन उत्पीड़न का ये मामला है क्या जिसके छींटे वायु सेना पर भी पड़े हैं?

आरोपी अफसर पर बलात्कार से जुड़ी धारा 376 लगी है.

परिवार ने पूरे गांव के सामने पति-पत्नी की हत्या कर दी, 18 साल बाद फैसला आया है

परिवार ने पूरे गांव के सामने पति-पत्नी की हत्या कर दी, 18 साल बाद फैसला आया है

कोर्ट ने एक को फांसी और 12 लोगों को उम्रकैद की सज़ा दी है.

असम से नाबालिग को किडनैप कर राजस्थान में बेचा, जबरन शादी और फिर रोज रेप की कहानी

असम से नाबालिग को किडनैप कर राजस्थान में बेचा, जबरन शादी और फिर रोज रेप की कहानी

नाबालिग 15 साल की है और एक बच्चे की मां बन चुकी है.

डोंबिवली रेप केसः 15 साल की लड़की का नौ महीने तक 29 लोग बलात्कार करते रहे

डोंबिवली रेप केसः 15 साल की लड़की का नौ महीने तक 29 लोग बलात्कार करते रहे

नौ महीने के अंतराल में एक वीडियो के सहारे बच्ची का रेप करते रहे आरोपी.

यौन शोषण की शिकायत पर पार्टी से निकाला, अब मुस्लिम समाज में सुधार के लिए लड़ेंगी फातिमा तहीलिया

यौन शोषण की शिकायत पर पार्टी से निकाला, अब मुस्लिम समाज में सुधार के लिए लड़ेंगी फातिमा तहीलिया

रूढ़िवादी परिवार से ताल्लुक रखने वाली फातिमा पेशे से वकील हैं.

रेप की कोशिश का आरोपी ज़मानत लेने पहुंचा, कोर्ट ने कहा- 2000 औरतों के कपड़े धोने पड़ेंगे

रेप की कोशिश का आरोपी ज़मानत लेने पहुंचा, कोर्ट ने कहा- 2000 औरतों के कपड़े धोने पड़ेंगे

कपड़े धोने के बाद प्रेस भी करनी होगी. डिटर्जेंट का इंतजाम आरोपी को खुद करना होगा.

स्टैंड अप कॉमेडियन संजय राजौरा पर यौन शोषण के गंभीर आरोप, उनका जवाब भी आया

स्टैंड अप कॉमेडियन संजय राजौरा पर यौन शोषण के गंभीर आरोप, उनका जवाब भी आया

इस मामले पर विक्टिम और संजय राजौरा की पूरी बात यहां पढ़ें.