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शाहरुख की बेटी का दर्द छलका, कैसे सांवली होने पर लोग 'बदसूरत' कहा करते थे

हाथरस के कथित गैंगरेप मामले में पुलिस पर गंभीर आरोप.

मर्दों से ज्यादा घर के काम का बोझ उठाती हैं औरतें, सरकार ने भी कह दिया 

औरतों के लिए ‘एंथम’ लिखने वाली फेमस सिंगर नहीं रहीं.

इन सबके बारे में जानेंगे ऑडनारी के स्पेशल न्यूज बुलेटिन WIN, यानी विमेन इन न्यूज में. जहां हम बात करते हैं महिलाओं की, उनसे जुड़ी खबरों की, और ख़बरों में महिलाओं की. बढ़ते हैं पहली खबर की ओर.

# हाथरस केस में पीएम मोदी और सीएम योगी क्या कुछ बोले

हाथरस में 19 बरस की पीड़ित लड़की के साथ बर्बरता हुई. परिवार वाले गैंगरेप का आरोप लगा रहे हैं. पुलिस इनकार कर रही हैं. दो हफ्ते तक इलाज के बाद लड़की ने 29 सितंबर को दिल्ली में दम तोड़ दिया. शाम को ही उसके शव को गांव ले जाया गया. पुलिस ने रात में ही शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया. घरवालों का आरोप है कि वो एक बार डेडबॉडी को घर लाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं करने दिया.

‘इंडिया टुडे’ की तनुश्री पांडे, जो पूरी रात लड़की के गांव में मौजूद थी, उनकी रिपोर्ट के मुताबिक, परिवारवालों का कहना है कि वो रीति-रिवाज़ के साथ बेटी को आखिरी विदाई देना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने खुद ही अंतिम संस्कार कर दिया. इससे पहले लड़की की मां ने कहा था,

“हम चाहते हैं कि बेटी को घर तक लेकर जाएं. हम अपनी बेटी को हल्दी लगाकर आखिरी विदाई देना चाहते हैं क्योंकि वो लौटकर तो दोबारा नहीं आएगी. हम अपनी बच्ची की अपने घर के दरवाज़े से ही विदाई देना चाहते हैं.”

लड़की के चाचा ने कहा,

“अंतिम संस्कार हमारे परिवार वालों ने नहीं किया. जो किया, पुलिस ने ही किया. जब शवदाह हो रहा था तो हम दो-चार लोग देखने गए थे. लेकिन हमें नहीं पता था कि वहां लोग जबरदस्ती हमारी फोटो ले लेंगे. हमने तो अंतिम संस्कार के लिए बस पांच कंडे डाले थे. वहां से निकल रहे थे तो पुलिसवालों ने कहा- रुको-रुको. फिर हमारा वीडियो बना लिया.”

Hathras
हाथरस में जिस जगह पर दाह संस्कार हुआ, वहां की तस्वीर.

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, हाथरस के डीएम ने कहा,

“ये आरोप कि अंतिम संस्कार परिवार की मर्ज़ी के बिना कर दिया गया, गलत है. पिता और भाई ने हामी भर दी थी, दाह संस्कार रात में करने के लिए. परिवार वाले भी खुद अंतिम संस्कार में मौजूद थे.”

हाथरस पुलिस ने भी ऐसी ही बात कही.

‘इंडिया टुडे’ के न्यूज़ डायरेक्टर राहुल कंवल ने भी यूपी एडीजी प्रशांत कुमार से बात की. उन्होंने कहा,

“लोकल एरिया के जॉइंट मैजिस्ट्रेट ने खुद बताया कि परिवार की परमिशन और मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया है. परिवार और गांववालों ने ही फैसला लिया था. जॉइंट मैजिस्ट्रेट ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इसे ट्वीट भी किया है. हाथरस मामले की जांच अब SIT कर रही है, अगर कोई खामी जांच के दौरान नज़र आती है तो एक्शन लिया जाएगा.”

इस मामले पर सीएम और पीएम क्या बोले?

परिवार की कथित गैरमौजूदगी में अंतिम संस्कार को लेकर पुलिस और प्रशासन पर ढेरों सवाल उठ रहे हैं. जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीएम योगी से बात की. योगी आदित्यनाथ के ट्विटर हैंडल से लिखा गया-

इससे पहले ही, हाथरस की घटना की जांच के लिए सीएम योगी ने एसआईटी का गठन कर दिया था. योगी के ट्विटर हैंडल से इसकी जानकारी देते हुए कहा गया-

हाथरस में बच्ची के साथ हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के दोषी कतई नहीं बचेंगे।

इस घटना में पहले आरोप लगा था कि लड़की की रीढ़ की हड्डी भी टूटी है, हालांकि पुलिस ने इस बात को खारिज कर दिया था.

# इस सरकारी रिपोर्ट ने बता दिया कि आज भी औरतों को लेकर समाज क्या सोचता है

भारत सरकार का सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय. ये आंकड़ों को लेकर काम करता है. सर्वे वगैरह करवाता है. इसके नेशनल स्टेटिस्टिक्स ऑफिस यानी NSO ने 29 सितंबर को एक रिपोर्ट जारी की. नाम है- ‘भारत में समय का उपयोग-2019’. इस रिपोर्ट में बताया गया कि आज भी हमारे देश में घर के काम का ज्यादा भार औरतों के कंधों पर ही है. वैसे तो ये जमाने से सब जानते हैं, लेकिन पहली बार सरकार के स्तर पर बाकायदा सर्वे कराकर इसके आंकड़े बताए गए हैं.

NSO के सर्वे में सामने आया-

– ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक खाना बनाना, साफ-सफाई जैसे घरेलू कामों में करीब 81.2 फीसद औरतें हिस्सा लेती हैं. वहीं केवल 26.1 फीसद आदमी ही ये काम करते हैं. यानी औरतों की संख्या आदमियों के मुकाबले तीन गुना से भी ज्यादा है. जहां औरतें दिन के 299 मिनट यानी करीब 5 घंटे औसतन ये काम करती हैं. तो आदमी केवल 97 मिनट, यानी करीब डेढ़ घंटे में ही टाटा-बाय बाय कह देते हैं.

– अब घर के बुजुर्गों और बच्चों की देखरेख की बात. इस काम के पैसे नहीं मिलते. इसमें भी औरतें औसतन दिन के 2 घंटे 14 मिनट का समय देती हैं. आदमी केवल 1 घंटे 16 मिनट ही ये काम करते हैं. इस अनपेड काम में भी औरतें आदमियों की तुलना में दोगुना समय दे रही हैं.

– अगर पेड कामकाज की बात करें, यानी ऐसे काम जिन्हें करने पर पैसे मिलते हैं, तो 57.3 फीसद आदमी ऐसे कामों का हिस्सा हैं. वहीं औरतों की संख्या केवल 18.4 फीसद है. और ये सबकुछ है आज़ादी के 73 बरस बाद.

Nso Report
NSO की रिपोर्ट में कई पहलुओं पर सर्वे करके जानकारी दी गई है.

औरतें आदमियों की तुलना में कहीं ज्यादा अनपेड काम करती हैं, लेकिन उन्हें इसके लिए कभी कोई तारीफ नहीं मिलती. ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, IIT में इकॉनमिक्स की प्रोफेसर रीतिका खेरा कहती हैं,

“सभी जानते हैं कि हमेशा से भारतीय औरतें काफी ज्यादा घरेलू काम करती हैं, और उसका उन्हें कोई पैसा भी नहीं मिलता. ये सर्वे महिलाओं के ऊपर पड़ने वाले इसी असंगत भार को सामने रखता है. हां, ये महिलाओं के काम की सराहना और मान्यता की दिशा में उठाया जाने वाला अहम कदम है.”

NSO का ये सर्वे जनवरी 2019 से दिसंबर 2019 के बीच किया गया. देश के करीब एक लाख 38 हज़ार परिवारों की राय के आधार पर ये नतीजा निकाला गया है.

# सुहाना खान ने बताया कि त्वचा के रंग की वजह से लोग उन्हें ‘बदसूरत’ कहते थे

सुहाना खान. बॉलीवुड के बड़े एक्टर शाहरुख खान की बेटी. सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. हाल में इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट करके बताया कि उनके सांवले रंग की वजह से लोग उन्हें क्या कहते थे. सुहाना ने लिखा,

“अभी यहां पर बहुत कुछ चल रहा है और ये एक ऐसा मुद्दा है, जिसे फिक्स करना ज़रूरी है. ये केवल मेरे अकेले के बारे में नहीं है. ये हर उस लड़की या लड़के के बारे में है, जो बिना किसी वजह के हीन भावना से ग्रसित हुआ. जब मैं 12 साल की थी, तब कई लोगों ने मुझसे कहा कि मैं अपनी त्वचा के रंग की वजह से ‘बदसूरत’ दिखती हूं. ऐसा कहने वालों में आदमी और औरत दोनों थे. बालिग थे.

इस बात से मुझे दुख होता है. भारतीय होने के कारण हम अपने-आप सांवले होते हैं. हममें हर शेड्स मिल जाएंगे. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप अपना सांवलापन दूर करने की कितनी कोशिश करते है. अक्सर ऐसा हो नहीं पाता. लेकिन अपने ही लोगों से नफरत मिलने का मतलब यही है कि आप बुरी तरह असुरक्षित हैं.

मैं माफी चाहती हूं कि अगर सोशल मीडिया ने, मैचमेकिंग वालों ने या फिर आपके अपने ही परिवारवालों ने आपको ये विश्वास दिलाया हो कि अगर आप 5 फुट 7 इंच के नहीं हैं, गोरे नहीं हैं तो आप सुंदर नहीं हैं. मैं 5 फुट 3 इंच की हूं. ब्राउन हूं. इसे लेकर बहुत खुश भी हूं. और मुझे खुश होना भी चाहिए.”

Suhana Khan
सुहाना ने इंस्टाग्राम पोस्ट में अपने दिल की बात लिखी है.

सुहाना ने कुछ कमेंट्स के स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए, जिनमें उन्हें काली और बदसूरत कहा गया था। सुहाना ने आखिर में #endcolourism भी लिखा, जिसका मतलब है कि ‘रंगवाद खत्म करें’. सुहाना के इस पोस्ट को लेकर लोग उनकी काफी तारीफ कर रहे हैं. हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे लेकर सुहाना के पिता शाहरुख खान को ट्रोल करना शुरु कर दिया. एक यूजर ने लिखा,

“सुहाना, आपने खूब कहा कि डार्क स्किन होना कोई शर्मिंदगी की बात नहीं, बल्कि एक खूबसूरत चीज है। लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि एक ऐसा ही नोट आपको अपने पिता के लिए लिखना चाहिए? वही तो हैं, जो गोरा बनाने का दावा करने वाले उत्पादों को प्रमोट करते हैं.”

# ‘बिग-बॉस’ में हो सकती है ऐसी एंट्री, जो सिर चकरा दे

‘बिग-बॉस’ का 14वां सीज़न आने वाला है. 3 अक्टूबर यानी शनिवार की रात ग्रैंड प्रीमियर है. कंटेस्टेंट के नामों का ऐलान हो रहा है. इन सबके बीच एक नाम काफी फुटेज खा रहा है. वो है ‘राधे मां’. दरअसल, ‘कलर्स’ चैनल ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो डाला. और लिखा, ‘बरसेगी किसकी कृपा, इस शनिवार बिग-बॉस के घर में?’ राधे मां का नाम नहीं लिखा, न ही पूरा चेहरा दिखाया. लेकिन जो थोड़ी बहुत झलकियां दिखाईं, उससे जानने वाले जान गए कि बात राधे मां की हो रही है.

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अब ये कन्फर्म नहीं है कि राधे मां कंटेस्टेंट के तौर पर बिग-बॉस के घर जा रही हैं या फिर केवल प्रीमियर के लिए. लेकिन उनके नाम का बज़ बहुत है. राधे मां स्वयंभू यानी खुद को आध्यात्मिक गुरू बताती हैं. इन्हें मानने वाले भी बहुत हैं. अक्सर खबरों में रहती हैं. इन पर सोशल मीडिया वाले मीम भी खूब मज़े लेकर बनाते हैं.

# औरतों का फेमस ‘एंथम’ गाने वाली सिंगर का निधन हो गया

हेलेन रेड्डी. वर्ल्ड फेमस ऑस्ट्रेलियन सिंगर थीं. 29 सितंबर के दिन लॉस ऐंजिलिस में आखिरी सांस ली. वो 78 बरस की थीं. एडिसन्स और डिमेंशिया बीमारी से जूझ रही थीं. एडिसन्स बीमारी में इंसान के हॉर्मोन्स ठीक से नहीं बनते. डिमेंशिया में याददाश्त कमज़ोर पड़ने लगती है. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, हेलेन के जाने पर उनके परिवार वालों ने कहा,

“हमारा दिल टूट गया है. लेकिन ये जानकर कि उनकी आवाज़ हमेशा ज़िंदा रहेगी, हमें तसल्ली है.”

Helen Reddy

हेलेन अपने गाने I am Woman के लिए ज़ाहिर तौर पर हमेशा याद रहेंगी. ये गाना जो फेमिनिस्ट एंथम कहलाता है, 70 के दशक में बेहद पॉपुलर हुआ था. आज भी है. 1972 में हेलेन ने ये गाना गाया था. इसकी वजह से हेलेन दो साल तक बिगेस्ट-सेलिंग फीमेल आर्टिस्ट बनी रहीं. 1973 में उन्हें बेस्ट फीमेल वोकलिस्ट के लिए ग्रैमी अवॉर्ड भी मिला.

# आज की ऑडनारी

जिसमें हम आपको मिलवाते हैं एक ऐसी आम महिला या लड़की से, जो कोई सिलेब्रिटी नहीं होती. लेकिन उससे देश की सभी महिलाएं प्रेरणा ले सकती हैं.

‘आज की ऑडनारी’ हैं ‘डांसर दादी’ के नाम से फेमस रवि बाला शर्मा. मूल रूप से यूपी के मुरादाबाद से हैं. लेकिन अभी मुंबई में रहती हैं. रिटायर्ड म्यूज़िक टीचर हैं. 62 बरस की हैं. ज़ोरदार डांस करती हैं. इंस्टाग्राम चैनल भी है इनका. उस पर अक्सर अपनी डांसिंग के वीडियो डालती हैं. सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ के भी एक गाने पर रवि बाला ने अपना डांसिंग वीडियो डाला, तो दिलजीत ने भी उसे अपने पेज पर शेयर किया.

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डांसिंग रवि बाला का जुनून है. उनके पिता ने बचपन में उन्हें कथक सिखाया था. वो कहती हैं,

“मेरी लाइफ का तीसरा चरण चल रहा है. मैं सारी ज़िम्मेदारियों से आज़ाद हो गई हूं. बेटी की शादी हो गई है. बेटे के साथ रहती हूं. अब लाइफ के इस स्टेज पर मैं अपने शौक को इन्जॉय कर रही हूं. पहले मैं अपने काम और ज़िम्मेदारियों में बिज़ी थी, लेकिन अब मेरे पास खुद के लिए वक्त है.”

हमारी डांसर दादी बॉलीवुड के फेमस कॉरियोग्राफर टेरेंस लुईस से डांस भी सीख रही हैं. रवि बाला ने बताया कि इंस्टाग्राम पर टेरेंस ने उनका डांस देखा. और अपनी ऑनलाइन क्लासेज में बिना फीस के बॉलीवुड के दो डांस फॉर्म्स सीखने का ऑफर दे डाला. तो अब डांसर दादी रोज़ाना शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक टेरेंस की ऑनलाइन क्लासेज के ज़रिए डांस के नए फॉर्म सीख रही हैं. वो अपने जैसे सभी रिटायर्ड लोगों को ये मैसेज देना चाहती हैं कि बीते समय में नहीं जीना चाहिए, मौजूदा समय को इन्जॉय करना चाहिए.

तो ये थीं आज की ख़बरें. कल फिर मिलेंगे विमेन इन न्यूज़ में. अगर आप भी जानते हैं ऐसी महिलाओं को, जो दूसरों के लिए मिसाल हैं, तो हमें उनके बारे में बताइए. मेल करिए lallantopwomeninnews@gmail.com पर.


वीडियो देखें: हाथरस मामले में सोशल मीडिया पर चल रही ख़बरों के बीच पुलिस ने क्या कहा है?

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