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पति को माओवादियों से छुड़ाने के लिए चार दिन तक जंगल में भटकती रही महिला

संतोष कट्टम बीजापुर के भोपालपटनम पुलिस थाने में कांस्टेबल हैं. छुट्टी लेकर घर आए थे. लॉकडाउन के कारण वापस नहीं गए. 4 मई की शाम को घर से निकले. लेकिन लौटे नहीं. खबर आई कि माओवादी उग्रवादियों ने उन्हें किडनैप कर लिया है.

इसके बाद संतोष की पत्नी सुनीता और 10 साल की बेटी ने उनके बारे में पता करना शुरू किया. माओवादियों से गुहार लगाई. पूरी जानकारी के लिए हमने बात की विकास तिवारी से. ये बस्तर में एक स्थानीय न्यूज़ चैनल के सीनियर रिपोर्टर हैं. इन्होंने बताया,

‘माओवादियों की स्मॉल एक्शन टीम को जब पता चला कि संतोष पुलिस में हैं, तो उनका अपहरण कर लिया. और अपने बड़े लीडर्स के पास ले गए. इस दौरान उनके साथ मारपीट नहीं की गई. हफ्ते भर उनकी आंखों पर पट्टी बांध कर रखा गया.’

सुनीता को परेशान देख गांव वाले मदद के लिए सामने आए. कुछ लोगों ने मध्यस्थता की. और माओवादियों से गुजारिश की कि उसके पति को छोड़ दिया जाए. गांववालों की मदद से वह मोटरसाइकिल के सहारे पैदल चलकर उस जगह तक पहुंची जहां माओवादियों ने उसके पति को रखा था. इसके बाद जनअदालत लगी. गांववालों ने संतोष के पक्ष में बात रखी. इसके बाद माओवादियों ने संतोष को छोड़ा, लेकिन शर्त रखी कि संतोष को पुलिस की नौकरी छोड़नी पड़ेगी.

NDTV में छपी रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस भी संतोष कट्टम को ढूंढने में लगी हुई थी. लेकिन कोई ऑपरेशन शुरू नहीं किया गया था. ताकि उनकी सुरक्षा बनी रहे, और माओवादी उन्हें चोट न पहुंचाएं. बस्तर रेंज के IG सुंदरराज पी ने बताया कि 11 मई को संतोष वापस बीजापुर वापस लौटे तब उनकी मेडिकल जांच भी की गई, और उनका स्टेटमेंट लिया गया है.


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