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लड़की ने अपने अबॉर्शन की कहानी शेयर की, लोगों ने गंद फैला दी

सोशल मीडिया पर एक पेज है. ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे. ये लोगों की कहानियां शेयर करते हैं. मशहूर पेज ‘ह्यूमंस ऑफ न्यूयॉर्क’ की तर्ज पर चलने वाले इस पेज पर कई बार ऐसी कहानियां भी आती हैं, जो काफी वायरल होती हैं. ऐसी ही एक कहानी पर बहस जारी है.

कहानी है एक लड़की की, जो एक्सिडेंटली प्रेग्नेंट हो गई. इसके बाद उसने अबॉर्शन कराया. अपनी कहानी बताते हुए लड़की ने लिखा-

‘मैं बुरी तरह टूट गई थी. रोज रोती थी और सुबह उठने से डरती थी. मेरे अंदर जीने की इच्छा नहीं थी, और मेरी भूख मर गई थी. सबसे बुरी बात तो ये थी कि मेरे दोस्त, जिनके लिए मैंने सोचा था कि वो मेरा साथ देंगे, उन्होंने भी मुझसे दूरी बना ली.’

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वो पोस्ट जिस पर पूरी बहस हुई. (तस्वीर: फेसबुक)

पोस्ट में आगे वो बताती हैं कि किस तरह उन्होंने एक नए व्यक्ति से बात करनी शुरू की और उसने काफी मदद की उनकी. लेकिन कमेन्ट सेक्शन में लोग बावले हो गए. उन्होंने लड़की की चॉइस और कैरेक्टर पर सवाल उठाने शुरू कर दिए.

एक कमेन्ट में लिखा गया,

एक महिला को कभी एक बेबी अबोर्ट नहीं कराना चाहिए. क्योंकि उसके बाद आप जिंदगी भर मानसिक परेशानियों से जूझते रहते हो. इससे बेहतर है बच्चे को एडॉप्शन के लिए दे दो.

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(तस्वीर: फेसबुक)

दूसरे कमेन्ट में लिखा गया,

गर्भपात पूरी तरह से अमानवीय है. आप तो रिलेशनशिप में मजे के लिए जाते हो, लेकिन उस अजन्मे बच्चे ने कौन-सा पाप किया है? आप लोग प्रोटेक्शन क्यों नहीं यूज कर सकते? ये बेहद क्रूर है. किसी को भी अबॉर्शन को प्रमोट नहीं करना चाहिए. गर्भपात तभी कराया जाना चाहिए, जब भ्रूण में कोई खराबी हो.

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(तस्वीर: फेसबुक)

एक और कमेन्ट में लिखा गया,

मुझे इसका मतलब समझ नहीं आता. आप खुद को किसी ऐसे व्यक्ति के सामने कैसे समर्पित कर सकते हो, जिसके बारे में आप श्योर नहीं?

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(तस्वीर: फेसबुक)

एक और यूजर ने कमेन्ट किया,

ये कितनी हास्यास्पद बात है किसी एक के साथ बेबी करना और फिर किसी दूसरे लड़के के साथ अफेयर करना. ये हमारा कल्चर नहीं है. ये महिलाओं की आज़ादी नहीं है. ये भारतीय कल्चर के खिलाफ है.

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(तस्वीर: फेसबुक)

इतने कमेंट्स के बीच कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने लड़की की तरफदारी की और इन ट्रोल वाले कमेंट्स को काउंटर किया.

एक यूजर ने लिखा,

इस पेज पर आने वाले कमेंट्स मुझे हमेशा अचंभित कर देते हैं. हम अभी भी ये डिस्कस कर रहे हैं कि कोई महिला कितनी ‘आसान’ है, क्योंकि वो किसी व्यक्ति के साथ गलती से प्रेग्नेंट हो गई और अब वो उसके साथ नहीं, किसी और के साथ है? ये उसे ‘तेज़ तर्रार’ बना देता है. अगर ये एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी किसी शादीशुदा महिला के साथ हुई होती, तो कोई पलकें तक न झंपकाता. हां, अपनी रीप्रोडक्टिव हेल्थ को लेकर लापरवाह होना हेल्दी नहीं है, लेकिन ये बहस मुबाहिसे उस बारे में तो बिलकुल नहीं हैं.

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(तस्वीर: फेसबुक)

आगे इसी कमेन्ट में लिखा गया,

हमें एक ऐसी जगह पर पहुंचना है, जहां अविवाहित महिलाएं भी अपने अबॉर्शन की चॉइस पर दुख जता सकें. अबॉर्शन अपने आप में एक विवादित विषय है, लेकिन खुलकर बातचीत कर सकने के अभाव में सुरक्षित अबॉर्शन प्रैक्टिस तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है. भारत इसे नॉर्मलाइज भले न करे, लेकिन इसे परदे के पीछे छुपा देने की तो बिलकुल ज़रूरत नहीं है.

कुछ और कमेंट्स आए:

मैं तुम्हारा दर्द  समझती हूं. मुझे ख़ुशी है कि तुम्हें अपना सच्चा प्यार मिला.

ये एक प्यारी स्टोरी है. अबॉर्शन को लेकर बनाया गया टैबू कम किया जाना चाहिए.

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(तस्वीर: फेसबुक)

एक यूजर ने लिखा,

इस कमेन्ट सेक्शन में मौजूद कई महिलाओं से मैं बेहद निराश हूं. ये दिखाता है कि आखिर इस तरह की कहानियां क्यों ज़रूरी हैं. हमें ज्यादा से ज्यादा बात करके अबॉर्शन के इर्द-गिर्द गढ़ी गई गलतफहमियों को दूर करना चाहिए.

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(तस्वीर: फेसबुक)

भारत में अबॉर्शन

भारत में अबॉर्शन यानी ‘मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी’ के लिए इस वक़्त MTP एक्ट 1971 लागू है. लेकिन इसमें संशोधन प्रस्तावित किए गए थे. इसे मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (अमेंडमेंट) बिल कहा गया. 1971 के गर्भपात कानून में गर्भपात की अवधि थी 12 हफ़्तों की. ख़ास केसों में बढ़ाकर इसे 20 हफ्ते तक किया जा सकता था. ये प्रावधान था कि शादीशुदा महिलाएं ही गर्भपात करवा सकती थीं. अगर गर्भ निरोध फेल हो गया हो, तो. लेकिन संशोधन में इसे बदलकर ‘महिला और उसका पार्टनर’ कर दिया गया है. गर्भपात करवाने की ऊपरी लिमिट भी 20 हफ्ते से बढ़ाकर 24 हफ्ते कर दी गई है इस संशोधन में. कुछ नियमों के साथ.

संशोधन में ये भी कहा गया है कि जिन मामलों में गर्भपात बिल्कुल ज़रूरी है और उसे टाला नहीं जा सकता, ऐसे मामलों में ऊपरी लिमिट हटा दी जाएगी. इनको जांचने-परखने के लिए एक मेडिकल बोर्ड बनाया जाएगा, हर राज्य में. ये बिल मार्च, 2020 में पेश हुआ था. लोकसभा में पास हो चुका है. राज्यसभा में पेंडिंग है.


वीडियो: MTP Act 1971 क्या है जिस पर सरकार SC को जवाब देकर घिर गई है

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