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महिला डॉक्टर ने शादी से मना किया तो प्रपोज़ल रखने वाले आदमी ने घटियापन की सारी हदें पार कर दीं

सोशल मीडिया. बड़ा, गहरा, फैला हुआ समंदर है. कुछ न कुछ इसमें हर रोज़ बहता रहता है, माने वायरल होता है. आज सुबह जब मैं ट्विटर चेक कर रही थी, तब एक पोस्ट पर मेरी नज़र अटक गई. दरअसल, उस पोस्ट में कुछ मैसेजेस के स्क्रीनशॉट शामिल थे, जिनमें एक व्यक्ति ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ टर्म का सहारा लेते हुए एक महिला को ताने कस रहा था. उस महिला को, जिसने उस व्यक्ति से शादी करने से मना कर दिया था. क्या है ये पूरा मामला? और ये ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ आखिर कौन-सी घड़ी है, जिसे लेकर यदा-कदा हमारी लड़कियों को टॉन्ट किया जाता है. सब पर बात होगी, तसल्ली से.

क्या है पूरा मामला?

डॉक्टर दीपा शर्मा आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं. दस साल से इस प्रोफेशन में हैं. ट्विटर पर काफी एक्टिव हैं. करीब साढ़े पंद्रह हज़ार फॉलोअर्स हैं उनके. अभी शादी के लिए लड़का खोज रही हैं. इसी वजह से हाल ही में एक लड़के से उनकी बात हुई, शादी को लेकर. लड़के को दीपा पसंद थीं, उसने शादी के लिए हां बोल दिया. लेकिन जैसा कि ये सामान्य सी बात है कि ज़रूरी नहीं कि आप जिसे पसंद करें, वो भी आपको पसंद करे. हर किसी की अपनी चॉइस होती है. दीपा को लड़का पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने शादी के लिए मना कर दिया. ऐसे में उस लड़के ने दीपा को वॉट्सऐप पर मैसेज किया. लिखा-

“‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ लगातार चल रही है. टिक-टॉक, टिक-टॉक, टिक-टॉक. अच्छा हुआ कि हमारी ये बातचीत हो गई. काफी कुछ क्लीयर हो गया.”

इस पर दीपा ने जवाब दिया-

“देखिए महाशय, आप मेरे से तीन साल बड़े हैं, पहले अपने बारे में सोचिए. मेरी बायोलॉजिकल क्लॉक की फिक्र मत कीजिए.”

Deepa (2)
दीपा ने ये स्क्रीनशॉट शेयर किए थे.

इस बातचीत का स्क्रीनशॉट दीपा ने खुद ट्विटर पर पोस्ट किया. इसके साथ ही एक और मैसेज का स्क्रीनशॉट उन्होंने डाला. ये मैसेज भी उसी लड़के ने दीपा को भेजा था, सीधे SMS के ज़रिए. इसमें लड़के ने लिखा-

“आदमियों पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ता. हमारे ऊपर प्रेगनेंट होने का कोई प्रेशर नहीं होता. आप खुद एक डॉक्टर हैं. आपको ये जानना चाहिए.”

Deepa (3)
ये वाला मैसेज दीपा को टेक्स्ट आया था.

इन दोनों स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए दीपा ने ट्विटर पर लिखा-

“ये बहुत सारे आदमियों का असली चेहरा है. ये उस आदमी के साथ मेरी बातचीत है, जो मुझसे शादी करना चाह रहा था. जब उसने मुझसे क्रूर तरीके से बात की, मैंने लिखा कि मैं आपसे आगे बात नहीं करना चाहती, इसलिए फिर वो मेरी उम्र के बारे में उल्टा-सीधा लिखने लगा. ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’, ‘प्रेग्नेंसी प्रेशर’. ‘आदमी तो हमेशा जवान रहते हैं’. जब मैंने उसे वॉट्सऐप पर ब्लॉक किया, तो उसने मुझे टेक्स्ट मैसेज भेजे, अपनी मर्दानगी दिखाने के लिए. सोसायटी पहले औरतों पर ‘किसी भी आदमी’ से शादी करने का दबाव डालती है, फिर प्रेग्नेंसी प्रेशर होता है, लेकिन वो अपने बेटों को इस तरह से बड़ा करते हैं कि वो बड़े होकर ऐसी बातें कर सकें”

‘ऑडनारी टीम’ ने डॉक्टर दीपा से बात की. वो कहती हैं कि ये सच है कि वो पिछले कुछ साल से शादी के लिए लड़का खोज रही हैं, लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि वो ‘किसी से भी’ शादी कर लें. दीपा कहती हैं-

“मेरे लिए शादी वो रिश्ता है जो कम्पेटिबिलिटी से चलता है. मैं उसी व्यक्ति से शादी करना चाहूंगी, जिसके साथ मेरी सोच मिले, हम एक-दूसरे को समझें. ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ के प्रेशर में आकर मैं किसी से भी शादी नहीं कर सकती. क्योंकि ये ज़िंदगी भर का सवाल है. यहां मुद्दा ये नहीं है कि मैं जल्दी शादी कर लूं, ताकि सही समय पर प्रेगनेंट हो जाऊं और इसमें मुझे कोई दिक्कत न हो. यहां मुद्दा सोसायटी की सोच का है. हमारे यहां शादी का मतलब ही बच्चे को जन्म देना समझा जाता है. कई सारे प्रेशर औरतों के ऊपर होते हैं. पहले शादी का, फिर प्रेग्नेंसी का. लेकिन इन सभी प्रेशर्स की वजह से मैं क्यों किसी से भी शादी करूं. मैंने मना कर दिया, तो लड़के के ईगो पर बन आई. उसने मेरी उम्र पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. इससे उस आदमी की ही सोच और असली चेहरा सामने आया.”

दीपा कहती हैं कि वो खुद एक डॉक्टर हैं, इसलिए शरीर के अंदर कब क्या होता है, वो बखूबी समझती हैं. वो कहती हैं कि मेडिकल साइंस ने इतनी प्रोग्रेस कर ली है कि हर दिक्कत का हल है. IVF ट्रीटमेंट है, एग फ्रीज़ करने का ऑप्शन है और सेरोगेसी का भी ऑप्शन है. इसलिए प्रेग्नेंसी को ईशू बनाकर लड़कियों के ऊपर प्रेशर नहीं डाला जाना चाहिए.

ये ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ आखिर है क्या?

इस पूरे डिस्कशन में हमारे सामने एक टर्म जो कई बार सामने आया, वो है बायोलॉजिकल क्लॉक. केवल दीपा ही नहीं, बहुत सी लड़कियों को इस टिक-टिक करती क्लॉक का नाम लेकर 30 से पहले शादी और बच्चे करने का सुझाव दिया जाता है. आप अगर महिला हैं, तो ज़ाहिर है आपने भी कभी न कभी अपने बड़े-बुज़ुर्गों या दूसरे किसी व्यक्ति की ज़ुबानी ये सुना ही होगा कि “25-27 के पहले शादी कर लो, और 30 के पहले बच्चा कर लो, नहीं तो 30 के बाद शरीर साथ नहीं देगा. प्रेगनेंट होने में दिक्कत आएगी.” अगर आप पुरुष हैं, तो आपने अपनी बहन या किसी दोस्त के लिए किसी न किसी को ये कहते तो सुना ही होगा. सवाल उठता है कि क्या है बायोलॉजिकल क्लॉक? इसका जवाब जानने के लिए हमारे साथी नीरज ने बात की डॉक्टर नयना एच पटेल से. ये एक सेरोगेसी और इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट हैं. वो कहती हैं-

“बायोलॉजिकल क्लॉक माने एजिंग. जो एजिंग हम बोलते हैं, वो शरीर पर तो दिखता है, लेकिन अंदर के ऑर्गन्स पर भी इसका असर होता है. खासतौर पर ओवरीज़ पर. जो फीमेल्स के अंडपिंड होते हैं, उसके अंदर भी एजिंग हो जाती है. जब आपकी उम्र बढ़ती है, आपकी ओवरी पर भी इसका असर होता है. ओवरीज़ में जो एग्स होते हैं वो कम हो जाते हैं, खराब हो जाते हैं. इसको हम बायोलॉजिकल क्लॉक या बायोलॉजिकल एजिंग कहते हैं. महिला भले ही दिखती हो 16 साल की, लेकिन अगर उसकी उम्र 35 साल है तो उसकी ओवरी तो 35 साल की हो ही गई. यही फीमेल की बायोलॉजिकल क्लॉक है.”

हमारा अगला सवाल था- क्या वाकई उम्र बढ़ने के साथ प्रेग्नेंसी में दिक्कत होती है? फर्टिलिटी कम होती है? इसके जवाब में डॉक्टर नयना ने कहा-

“पुरुषों के अंदर जो स्पर्म्स हैं, वो हर दो महीने में नए बनते हैं. लेकिन फीमेल्स में जो एग्स हैं, वो जन्म के साथ होते हैं. ऐसे में जितनी वो उम्र में बढ़ती हैं, उतनी ही उम्र एग्स की बढ़ जाती है. हमारे शरीर में कोई भी सेल, जितना पुराना हो, उतना उसमें खराबी आने लगती है. तो नए एग्स नहीं बनते हैं, इसकी वजह से. जब लड़की की उम्र बढ़ती है तो उसके एग्स कम भी हो जाते हैं और खराब भी. भारतीय औरतों में तो 32 के बाद गारंटी है कि एग्स कम होने लगते हैं. क्योंकि जन्म के समय अंडपिंड में कई सारे एग्स होते हैं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ वो खराब होने लगते हैं. ऐसे में महिला की पूरी रिप्रोडक्टिव लाइफ में 500 अंडे ही निकलते हैं, ट्रीटमेंट करो तो ज्यादा. 34-35 के बाद 60 फीसद एग्स फीमेल्स के अबनॉर्मल हो जाते हैं. क्योंकि वो पुराने हो जाते हैं. इस वजह से कई बारी प्रेग्नेंसी भी नहीं रुकती और अगर रुकती है तो मिसकैरेज की संभावना बढ़ जाती है.”

Dr Nayana
डॉक्टर नयना एच.पटेल, सेरोगेसी एंड इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट

हमने डॉक्टर नयना से अगला सवाल किया कि क्या फर्टिलिटी घटने की वजह केवल उम्र है या फिर लाइफ स्टाइल से भी फर्क पड़ता है? क्योंकि लाइफ स्टाइल से अगर फर्क पड़ता है, तो पुरुषों की फर्टिलिटी पर भी इसका असर होता होगा. इस पर डॉक्टर नयना ने कहा-

“उम्र के अलावा लाइफ स्टाइल की वजह से भी फर्टिलिटी घटती है. और लाइफ स्टाइल का असर पुरुषों की फर्टिलिटी पर भी होता है. उनका स्पर्म काउंट कम हो रहा है. WHO का साल 2010 के पहले तक पुरुषों के लिए स्पर्म काउंट का क्राइटेरिया 60 मिलियन था, अब 15 मिलियन हो गया है. स्पर्म की क्वालिटी भी खराब होती जा रही है. पुरुषों में भी स्पर्म्स काफी खराब हो रहे हैं. इसलिए कई बार ये सोचना पड़ता है कि क्या 100-200 साल बाद इंसान खत्म हो जाएंगे? क्योंकि स्पर्म्स ही नहीं रहेंगे. माने इतनी तेज़ी से कम होता जा रहा है. और इसका कारण तो 100 फीसद लाइफ स्टाइल है. जैसे कि स्मोकिंग, तंबाकू, अल्कोहॉल, ड्रग्स, फास्ट लाइफ, रात को जागना, दिन में सोना, इलेक्ट्रॉनिक फोन, गैजेट्स, लैपटॉप वगैरह से भी फर्क पड़ता है. जो लोग बहुत एथलीट टाइप होते हैं, जो प्रोटीन्स ज्यादा अमाउंट में लेते हैं, तो उनको भी असर हो सकता है. लाइफ स्टाइल ने तो पुरुषों का स्पर्म्स बहुत खराब कर दिया है.”

डॉक्टर नयना ने बताया कि हां उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की फर्टिलिटी कम होने लगती है और 30 से 35 साल के बाद दिक्कत थोड़ी ज्यादा होने लगती है. लेकिन आज के टाइम पर औरतें भी आगे बढ़ रही हैं, पढ़ रही हैं और करियर में कुछ अच्छा भी करना चाहती हैं, ऐसे में 30 के पहले ही सबकुछ हो जाए, ये हर किसी के लिए मुमकिन नहीं है. ऐसे में 30 के बाद भी फर्टिलिटी ठीक रहे उसके लिए क्या उपाय किए जाएं, उसकी जानकारी भी हमें दी डॉक्टर ने. डॉक्टर नयना कहती हैं-

“कुछ ऐसा ट्रीटमेंट नहीं है कि अंडे अच्छे बने रहें. हां लाइफ स्टाइल अच्छी रखो. रेगुलर एक्सरसाइज़ करो. खाना-पीना सही रखो. हेल्दी खाना खाओ. हरी सब्ज़ियां, ड्राई फ्रूट्स अच्छे से लो. हाई कार्बोहाइड्रेट डायट कम कर दें. लाइफ स्टाइल रेगुलर रखें. पर उसके बाद भी जेनेटिकली अगर अंडे कम हैं, तो वो कम होते ही जाएंगे. इसलिए सलाह ये है कि जिन लड़कियों को करियर बनाना है. शादी लेट करनी है या बच्चा लेट करना है, तो उन्हें अपनी फर्टिलिटी चेक करवाना चाहिए. उसका पीरियड रेगुलर रहना चाहिए, जल्दी नहीं आना चाहिए, लेट नहीं आना चाहिए. रेगुलर चेकअप करवाएं. अगर डॉक्टर बोले कि आपकी फर्टिलिटी डेंजर में है, तो बेहतर है कि वो अपना अंडा फ्रीज़ करवा दें. शादीशुदा है तो एम्ब्रियो फ्रीज़ करवा दें.”

शादी में क्या ज़रूरी है?

हम इस बात को खारिज नहीं कर रहे हैं कि उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की फर्टिलिटी कम होती है. ये सच है कि उम्र का इस पर असर पड़ता है. लेकिन हमारा सवाल ये है कि क्या एक औरत की पहचान बच्चे और शादी से ही तय होती है? वो अपने करियर में क्या कर रही है, क्या हासिल किया है उसने या वो क्या करना चाहती है? क्या ये सारे फैक्टर्स उसकी पहचान को डिफाइन नहीं करते. अक्सर ये देखा गया है कि कितनी ही सफल औरत क्यों न हो, उससे कहा जाता है कि ये सब तो ठीक है, ये बताओ कि आगे की क्या प्लानिंग है? शादी कब कर रही हो? बच्चे कब करोगी? उससे ये नहीं पूछा जाता कि वो शादी करना भी चाहती है या नहीं. या बच्चे को जन्म देना भी चाहती है या नहीं.

शादी में ये भी ज़रूरी है कि लड़का-लड़की एक-दूसरे को पसंद करें. लेकिन कई दफा ये भी नहीं देखा जाता कि लड़की को लड़का पसंद है या नहीं, बस बायोलॉजिकल क्लॉक टिक-टिक कर रही है, इसलिए शादी करवा दी जाती है. ये सच है कि आज भी कई लड़कियां अपने परिवार वालों का विरोध नहीं कर पातीं, इसलिए कई दफा प्रेशर में आकर उन्हें शादी करनी पड़ती है. सवाल ये भी उठता है कि प्रेग्नेंसी किसी औरत की पहचान का इतना बड़ा हिस्सा क्यों है? कई दफा ये हिस्सा इतना ज्यादा बड़ा हो जाता है कि औरतें भी पैनिक में आकर अपनी मर्ज़ी के बगैर ही जल्दी शादी और बच्चे कर लेती हैं. क्योंकि उन्हें लगता है कि अभी नहीं हुआ तो कभी नहीं हो पाएगा. हम फिर रिपीट कर रहे हैं कि हां बढ़ती उम्र का फर्टिलिटी पर असर पड़ता है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आप किसी महिला पर दबाव डालकर उसकी ज़बरन शादी या बच्चे करवा दें. और रही बात 30 के बाद प्रेग्नेंसी में आने वाली दिक्कतों की, तो हमारे मेडिकल साइंस के पास हर सवाल का जवाब है.

हम मेडिकली काफी प्रोग्रेस कर चुके हैं. अगर आपको कंसीव करने में दिक्कत आती है, तो अच्छा ट्रीटमेंट उपलब्ध है. अगर आप नैचुरली प्रेगनेंट नहीं हो पा रहीं, तो भी कई रास्ते आपके सामने खुले हैं. इन रास्तों के बारे में डिटेल में जानने के लिए हमारे साथी नीरज ने बात की डॉक्टर अर्चना शुक्ला से. वो सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्स्टट्रिशन एंड गायनेकोलॉजिस्ट हैं. वो कहती हैं-

“लड़कियां आजकल काफी करियर ओरिएंटेड होती हैं. जिन्हें ये पता है कि 35-37 के बाद ही बच्चा पैदा कर पाएंगी, वो अपने ओवम प्रिज़र्व करा लेती हैं. ये सोचकर कि आज हमने अपने ओवम प्रिज़र्व करा दिए हैं, फिर हमें 37-38 में शादी करनी है और बाद में बच्चा करना है. सरकार के कानून के हिसाब से पांच साल का प्रिज़र्व करा सकते हैं. फिर उसके आगे परमिशन लगती है. तो कन्फर्म अगर कर लिया कि पांच साल में बच्चा नहीं करना है, ऐसे में प्रिज़र्व करा सकती हैं. फिर बाद में IVF के द्वारा प्रेगनेंट हो सकती हैं. जिन महिलाओं की ज्यादा उम्र हो गई और वो प्रेगनेंट नहीं हो पा रहीं, तो उनके पास IVF का ऑप्शन है, लेकिन उनके खुद के अंडे अगर नहीं काम कर रहे या क्वालिटी अच्छी नहीं है, तो इस केस में डोनर ओवम लिया जाता है. मतलब किसी यंग फीमेल का ओवम लेकर पति के वीर्य के बीज लेकर यूट्रस में इम्प्लांट किया जाता है. मतलब एक तरह से वो बच्चा मदर का नहीं है, लेकिन चूंकि उसकी गोद में पला है तो उसे संतुष्टि होती है कि नौ महीने इस बच्चे को मैंने खून से पोषित किया है. उसे अलग संतुष्टि मिलती है.”

Dr Archana
डॉक्टर अर्चना शुक्ला, सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्स्टट्रिशन एंड गायनेकोलॉजिस्ट

ऐसा भी नहीं है कि जल्दी शादी करने वाली सभी औरतें आसानी से प्रेगनेंट हो जाती हैं. कई बार इन औरतों को भी नैचुरल प्रेग्नेंसी में दिक्कत आती है. भले ही उम्र उनकी कम रहती है. ऐसा क्यों होता है? इसके जवाब में डॉक्टर अर्चना कहती हैं-

“ये बहुत बड़ा विषय है अपने आप में कि क्यों दिक्कत आ रही है. 30 से कम में दिक्कत आने के कई कारण हो सकते हैं. हो सकता है कि ओवरी में PCOD हो, ओवरी में अंडा ही नहीं बन रहा हो, उसके यूट्रस में कोई बड़ा भारी ट्यूमर हो, तो जगह ही न हो. कभी हो सकता है कि उसे कोई पुराना इन्फेक्शन रहा हो, तो यूट्रस के अंदर की सतह चिपकी हो या दोनों तरफ के ट्यूब्स ब्लॉक हों. तो पूरी जांच होती है. 30 के नीचे क्या, कोई भी महिला अगर आती है, जिनके बच्चे नहीं रुक रहे, तो बहुत सारे कारण हो सकते हैं.”

‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ के अलावा एक और टर्म है, जो हमने कई बार सुना है. वो है जेरीऐट्रिक प्रेग्नेंसी. Geriatric शब्द का सीधा अर्थ होता है वृद्धावस्था. जेरीऐट्रिक प्रेग्नेंसी उस प्रेग्नेंसी को कहते हैं जो 35 साल के बाद होती है. माने अगर कोई महिला 35 साल की है, और प्रेगनेंट है, तो उसकी प्रेग्नेंसी वृद्धावस्था वाली प्रेग्नेंसी कहला जाएगी. इसी वजह से लोग जब-तब इस टर्म को लेकर ऑब्जेक्शन जताते आए हैं. करीब चार महीने पहले पीनट ऐप पर एक विदेशी महिला ने अपना एक्सपीरियंस शेयर किया था. कहा था-

“मेरे डॉक्टर ने मुझे कहा कि चूंकि मैं 35 साल की हो गई हूं, तो मैं जेरीऐट्रिक मॉम कहलाऊंगी. और अगर मैं प्रेगनेंट होती हूं तो मुझे कई सारे कॉम्प्लिकेशन्स हो सकते हैं. इस वक्त मुझे बहुत गिल्ट फील हो रहा है कि महिला होने के नाते मेरे अंदर एक कमी है, क्योंकि मैंने उन चीज़ों को फॉलो किया जिनसे मैं प्यार करती थी और मैंने अपना करियर बनाने पर फोकस किया. ये बहुत दुर्भाग्य की बात है कि ‘जेरीऐट्रिक मॉम’ टर्म की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है. एक महिला की मेंटल हेल्थ भी उसकी फिज़िकल हेल्थ की तरह ज़रूरी है.”

इस वीडियो को अमेरिकन मॉडल क्रिसी टाइगन, जिन्हें क्रिसी टीगन भी कहते हैं, उन्होंने अपने ट्विटर पर शेयर किया. और सवाल उठाया कि “2021 में भी हम ‘जेरीऐट्रिक’ मॉम शब्द का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं? बहुत सारे ऐसे शब्द हैं जो अपमानजनक तो हैं ही, साथ ही महिलाओं को नजरअंदाज करते हैं.”

हम आखिर में फिर कहेंगे कि किसी ‘क्लॉक’ की आड़ में औरतों पर उनकी ज़िंदगी के फैसले थोपे नहीं, उन पर किसी तरह का प्रेशर न डालें, उन्हें टॉन्ट न मारें, उन्हें आज़ादी दें अपने हिसाब से, अपने मन मुताबिक फैसले लेने की. क्योंकि औरत की पहचान उसकी शादी और बच्चे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इससे कहीं ज्यादा है.


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