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किसान आंदोलनः टिकरी बॉर्डर पर युवती से रेप का आरोप, कोरोना से मौत के 9 दिन बाद FIR हुई

टिकरी बॉर्डर. दिल्ली और हरियाणा के बीच की सीमा. यहां नवंबर, 2020 से ही किसान जुटे हुए हैं. नए किसान कानूनों के विरोध में. इस प्रोटेस्ट में शामिल रही एक लड़की की 30 अप्रैल को मौत हो गई. Covid 19 से. अब सामने आया है कि उसके साथ यौन शोषण किया गया था. किसान आंदोलन (Farmer Agitation) में शामिल 6 लोगों के खिलाफ यौन शोषण के मामले में FIR दर्ज की गई है, आरोपियों में 2 महिलाएं भी शामिल हैं.

मौत के 9 दिन बाद पिता ने दर्ज करवाई FIR

पीड़ित के पिता ने हरियाणा के बहादुरगढ़ पुलिस थाने में आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है. FIR के मुताबिक, पीड़ित आर्टिस्ट और डिज़ाइनर थी. वह किसानों के आंदोलन का समर्थन करती थी. आरोपी 1 अप्रैल को बंगाल पहुंचे थे. इनमें से चार अनिल मलिक, अनूप सिंह चनौट, अंकुश सांगवान और कविता आर्या खुद को किसान सोशल आर्मी के सदस्य बता रहे थे. जगदीश बराड़ ने खुद को कुश्ती किसान यूनियन का सदस्य बताया और योगिता सुहाग ने खुद को इंडिपेंडेंट एक्टिविस्ट बताया था. ये सभी संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले पब्लिक मीटिंग आयोजत कर रहे थे.

FIR में लिखा है,

मैं और मेरी बेटी 4 अप्रैल को इन आरोपियों से श्रीसमपुर और चंदननगर में मिले. मेरी बेटी इन लोगों से प्रभावित हुई और उनके साथ प्रोटेस्ट में शामिल होने की इच्छा उसने जताई. वो पहले भी अलग-अलग प्रोटेस्ट में शामिल हो चुकी थी. इस बार उसने इस ग्रुप के साथ दिल्ली जाने की बात कही. वो 5 लोगों के साथ हावड़ा स्टेशन से दिल्ली के लिए रवाना हुई. अनिल ग्रुप का सबसे सीनियर था, तो मैंने उससे गुज़ारिश की कि मेरी बेटी का ख्याल रखे. उसकी मां ने कविता से कहा कि वो बेटी के साथ ही रहे.

ट्रेन में रात के वक्त जब सब सो गए थे तब अनिल मेरी बेटी की बर्थ के पास आया. वो उसका हाथ पकड़कर उसे किस करने लगा. मेरी बेटी ने उसे दूर हटाया और दोबारा ऐसा न करने की चेतावनी दी. 11 अप्रैल को दिल्ली पहुंचने के बाद टिकरी बॉर्डर पर उसे अनिल मलिक, अनूप सिंह और अंकुर सांगवान के साथ टेंट शेयर करना पड़ा. उसने 14 अप्रैल को फोन पर मुझे ट्रेन वाली पूरी घटना बताई. उसने बताया कि अनिल और अनूप अच्छे लोग नहीं है, उस पर दबाव बना रहे हैं, उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं.

Sugarcane Sap Up Farmer
सांकेतिक फोटो. PTI

पीड़ित के पिता ने उसे प्रोटेस्ट में शामिल किसी महिला से बात करने की सलाह दी. और स्थानीय कमेटी से कॉन्टैक्ट करने को कहा. लेकिन वो वहां नई थी. उसे नहीं पता था कि किससे बात करे. वो घबराई हुई भी थी, क्योंकि आरोपी लगातार उसे परेशान कर रहे थे. 16 अप्रैल को विक्टिम ने अपने पिता को बताया कि उसने पूरी बात योगिता और जगदीश को बताई है. जगदीश के सामने उसने एक वीडियो स्टेटमेंट भी रिकॉर्ड किया था. योगिता की मदद से पीड़ित को दूसरे टेंट में भी शिफ्ट कर दिया गया था. उसने ये भी बताया था कि उसे यूरीन के साथ खून पास हो रहा है.

FIR के मुताबिक, 18 अप्रैल को विक्टिम (पीड़ित लड़की) से कुछ वकीलों ने मुलाकात की थी. ये भी तय हुआ कि यौन शोषण का मामला संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के सामने लाया जाएगा. कुछ दिन बाद विक्टिम ने अपने पिता को बताया कि उसे पीरियड्स हो गए हैं और अब वो रिलैक्स्ड है. इससे उसके पिता को शक हुआ कि विक्टिम के साथ कुछ गंभीर हुआ है.

21 अप्रैल को विक्टिम को हल्का बुखार आया. इसके बाद उसे उल्टियां और लूज़ मोशंस होने लगे. 24 अप्रैल तक उसकी हालत और बिगड़ गई. विक्टिम के पिता ने जय किसान आंदोलन से जुड़े अविक साहा से संपर्क किया. साहा ने डॉक्टर अमित वत्स से उनकी बात कराई. डॉक्टर अमित ने योगेंद्र यादव को इस बारे में बताया. योगेंद्र यादव ने फोन पर विक्टिम से बात भी की.

Farmer's Protest At Singhu Border
दिल्ली की सीमाओं पर नवंबर 2020 से ही किसानों का आंदोलन जारी है. किसान नए किसान कानूनों का विरोध कर रहे हैं. आंदोलन में बड़ी संख्या में महिला किसानों ने भी हिस्सा लिया है. फाइल फोटो

विक्टिम के अपहरण की कोशिश, योगेंद्र यादव ने बचाया

दूसरी तरफ जब अनिल और अनूप को इस बात की जानकारी हुई कि विक्टिम SKM के नेताओं के संपर्क में है. तो उन्होंने उसे टिकरी बॉर्डर से हटाने का प्लान बनाया. विक्टिम के नंबर से उसके पिता को फोन किया गया कि वो विक्टिम को बंगाल वापस भेजने की परमिशन चाहते हैं. उन्होंने इनकार कर दिया और डॉक्टर अमित वत्स को फोन करके मदद मांगी.

डॉक्टर अमित वत्स ने योगेंद्र यादव को इस बारे में बताया. योगेंद्र यादव ने आरोपियों से बात की तो उन लोगों ने कहा कि विक्टिम के पिता की रिक्वेस्ट पर उसे वापस बंगाल लेकर जा रहे हैं. कहा कि वो लोग आगरा के करीब हैं. इसके बाद देवेंद्र यादव ने विक्टिम से उसकी वॉट्सऐप लोकेशन मांगी. लोकेशन के मुताबिक, वो हरियाणा के हांसी में कहीं पर थी. योगेंद्र यादव ने अनिल को फोन किया और विक्टिम को वापस लाने को कहा. ये भी कहा कि कि अगर उसे सही सलामत वापस नहीं लाया गया तो अनिल और उसके साथियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जाएगी.

Yogendra Yadav Swaraj India
FIR के मुताबिक, किसान नेता योगेंद्र यादव के दखल के बाद विक्टिम के किडनैप की कोशिश फेल हुई. फोटो- PTI

अस्पताल में नहीं मिला बेड

विक्टिम को 25 अप्रैल की रात को टिकरी बॉर्डर वापस लाया गया. 26 तारीख को उसे PGI रोहतक भेजा गया, पर वहां बेड खाली नहीं थे. उसे बहादुरगढ़ के शिवम अस्पताल में भर्ती कराया गया. वो कोविड 19 पॉज़िटिव थी. इलाज के बाद भी विक्टिम की हालत में कोई सुधार नहीं था, उनके पिता अस्पताल पहुंचे. यहां विक्टिम ने उन्हें बताया कि ट्रेन में और टेंट में अनिल ने उसका यौन शोषण किया और अनूप सिंह ने उसकी मदद की. विक्टिम के पिता के मुताबिक, उसने कहा ‘हमारे साथ खराब काम हुआ है’

पिता पर दबाव बनाया- बेटी का शव चाहिए तो स्टेटमेंट दो कि वो कोरोना से मरी

विक्टिम के पिता के मुताबिक, 30 अप्रैल की सुबह विक्टिम ने उनसे कहा था कि अनिल और अनूप को सज़ा दिलवाई जाए. साथ ही ये सुनिश्चित करने को कहा कि इससे किसानों का मूवमेंट प्रभावित न हो. FIR में विक्टिम के पिता ने लिखा,

बेटी की मौत के बाद, मुझ पर दबाव बनाया गया कि अगर मुझे उसकी बॉडी चाहिए तो ये स्टेटमेंट देना होगा कि उसकी मौत कोविड-19 से हुई थी. मैं इमोशनली टूटा हुआ था. चाहता था कि बेटी का शव मुझे मिल जाए. इसलिए पुलिस में बयान दिया कि मेरी बेटी की मौत कोविड 19 से हुई.

FIR में विक्टिम के पिता ने लिखा है कि योगेंद्र यादव और संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से उन्हें पूरी मदद का आश्वासन दिया गया है.

Women Farmers At Tikri
Tikri Border पर प्रोटेस्ट में शामिल हुईं महिलाएं. फाइल फोटो

पुलिस ने क्या ऐक्शन लिया?

इस मामले में पुलिस ने 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं. इनके खिलाफ IPC की धारा 365, 342, 354, 376 D और 120 बी के तहत गैंगरेप, अपहरण, ब्लैकमेलिंग और बंधक बनाकर रखने का मामला दर्ज किया है.

संयुक्त किसान मोर्चा ने इस पूरे मामले पर क्या कहा?

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने कहा कि वो विक्टिम के साथ खड़ा है. मामला सामने आने के बाद मोर्चा की टिकरी कमेटी ने फैसला किया और 5 मई को ही किसान सोशल आर्मी के टेंट और बैनर हटवा दिए गए हैं. आरोपियों को आंदोलन से बहिष्कृत करने और उनके सामाजिक बहिष्कार की घोषणा भी की गई है. संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि वो बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी और उनका नेतृत्व इस किसान आंदोलन की एक अनूठी ताकत है. SKM ने कहा,

“हम हर महिला किसान और महिला संगठनों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि किसी भी महिला की स्वतंत्रता पर कोई आंच नहीं आएगी और उनके साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार या हिंसा बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. आंदोलन में औरतों की खुली और पूरी भागीदारी हो सके इसका माहौल बनाना इस आंदोलन के नेतृत्व की जिम्मेदारी है.”

महिला किसान संगठनों ने इस मामले पर क्या कहा है?

भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां की महिला अध्यक्ष हरिंदर कौर बिंदु ने टाइम्स ऑफ इंडिया से इस मुद्दे पर बात की. उन्होंने कहा,

संयुक्त किसान मोर्चा के ज्यादातर नेता इस घटना के बारे में जानते थे. यह आश्चर्यजनक है कि वो लोग क्यों इस पर चुप्पी साधे रहे. और हमें विक्टिम के पिता से क्यों नहीं मिलने दिया गया. अगर किसी नेता की इस मामले में कोई गलती है तो उनसे सवाल किया जाना चाहिए कि एक्शन लेने में इतनी देरी क्यों हुई.

वहीं, इस मामले में 24 महिला किसान संगठनों द्वारा संयुक्त बयान जारी किया गया है. बयान में कहा गया है कि कोई अन्य परिचय नहीं होने की वजह से विक्टिम को 11 से 16 अप्रैल के बीच आरोपी अनिल मलिक और अन्य के साथ टेंट शेयर करना पड़ा. जहां आरोपी लगातार उसका यौन शोषण करता रहा. 16 अप्रैल को विक्टिम ने इस बारे में कुछ लोगों को जानकारी दी, जिसके बाद उसे दूसरे टेंट में शिफ्ट किया गया. संगठन ने कहा,

दुर्भाग्यपूर्ण बात ये है कि ये इस प्रकार की पहली घटना नहीं है. कई महिलाओं ने अलग-अलग वेबसाइट्स और अखबारों को अपनी आपबीती सुनाई है. कानूनी मामले दर्ज होना ज़रूरी है. ये विक्टिम को न्याय दिलाने की ओर पहला कदम है.

महिला संगठन ने मांग की कि इस तरह के मामलों के निवारण के लिए एक सिस्टम बनाना ज़रूरी है. इस तरह किसी एक मामले में एक्शन लेकर इस दिक्कत को खत्म नहीं किया जा सकता है. जेंडर सेंसिटाइजेशन और यौन उत्पीड़न को कम करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की ज़रूरत है.

हालांकि, सवाल उठ रहा है कि जब किसान नेताओं की जानकारी में ये मामला पहले से था, तो उन लोगों ने समय रहते आरोपियों के खिलाफ एक्शन क्यों नहीं लिया. पुलिस को मामले की जानकारी क्यों नहीं दी? क्यों वो अपने स्तर पर मामले की निपटारे की कोशिश करते रहे? जब 25 अप्रैल को आरोपियों ने विक्टिम को किडनैप करने की कोशिश की तब ही क्यों नहीं उनका बहिष्कार किया गया और उनके टेंट-बैनर उखाड़े गए. 5 मई यानी 10 दिन बाद ये कार्रवाई क्यों की गई?


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