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फेमस होने के चक्कर में मां ने नाबालिग बेटे के साथ जो किया वो अब बच्चे को ताउम्र सताएगा

सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से कुछ वीडियो काफी वायरल हो रहे हैं. जिनमें एक महिला एक छोटे बच्चे के साथ डांस करते नज़र आ रही है. साथ ही कुछ वीडियो में दोनों मिलकर साथ में किसी फिल्मों के डायलॉग्स बोलते भी दिख रहे हैं. ये वीडियो वायरल इसलिए हुए, क्योंकि इन पर बहुत से लोगों ने आपत्ति जताई थी. अब मामले में अपडेट ये है कि दिल्ली महिला आयोग ने इस पर एक्शन लिया है. पुलिस को नोटिस भेजकर महिला के खिलाफ FIR दर्ज करने को कहा है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, दो इंस्टाग्राम अकाउंट्स हैं. एक अकाउंट महिला का है, और दूसरा उस बच्चे का है जिसके साथ वो वीडियो बनाती है. दोनों इंस्टाग्राम अकाउंट देखने पर पता चलता है कि वो बच्चा उस महिला का ही बेटा है. दोनों अकाउंट्स में कई सारे रील्स पोस्टेड हैं. किसी में महिला अकेले दिखती है, तो किसी में बच्चे के साथ. जिसमें वो बच्चे के साथ दिखती है, उसमें से ज्यादातर रील में दोनों फिल्मों के गानों पर एक्शन्स करते दिखते हैं. बच्चा हीरो के रोल में और महिला हीरोइन के रोल में. इन रील्स में से कुछ में बच्चा डांस की स्टेप करते हुए महिला की कमर को छूता दिखता है, तो किसी में महिला को किस करते नज़र आता है. हालांकि सभी रील्स इस तरह के नहीं हैं, लेकिन कई सारे ऐसे ही हैं. इन्हीं पर लोगों ने विरोध जताया है.

इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट दीपिका नारायण भारद्वाज ने 15 जुलाई को ट्वीट किया था, और इन वायरल वीडियोज़ में से कुछ वीडियो पोस्ट किए थे. लिखा था-

“मुझे समझ नहीं आ रहा कि मांओं के साथ क्या गड़बड़ है, जो अपने ही बच्चों को इस तरह के सेक्शुअल ओवरटोन्स यानी यौन मकसद का सब्जेक्ट बना रही हैं. कृपया इस बच्चे और मां दोनों के हैंडल्स को देखिए. कृपया उन्हें सलाह दें. ये बच्चे के लिए हेल्दी नहीं है.”

इस ट्वीट के साथ दीपिका ने महिला और बच्चे के कई सारे वीडियो पोस्ट किए. साथ ही नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स यानी NCPCR को भी टैग किया. और NCPCR के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो को भी टैग किया.

Mother And Son Videos (2)
ये ट्वीट दीपिका ने किए थे, ट्वीट में वीडियो शामिल है, इसलिए उसका लिंक नहीं लगाया गया.

दीपिका ने अगले ट्वीट में लिखा-

“इस महिला के सभी रील्स डबल मीनिंग गानों और सेक्शुअल डायलॉग्स से भरे हुए हैं, जो इसने इस बच्चे के साथ इनेक्ट किए हैं. ज़ाहिर है ये बच्चा इतना परिपक्व नहीं है, कि उसे समझ आए कि उससे क्या करवाया जा रहा है. ये चाइल्ड अब्यूज़ है. प्लीज़ इसे रोका जाए.”

दीपिका के अलावा बहुत से लोगों ने इस पर आपत्ति जताई. कई लोगों ने तो ये तक सवाल किया कि उन्हें नहीं लगता कि ये दोनों मां और बेटे हैं. कुछ ने इसे बीमार मानसिकता बताया.

दिल्ली महिला आयोग ने लिया एक्शन

दिल्ली महिला आयोग यानी DCW की चीफ स्वाति मालीवाल ने आखिरकार 19 जुलाई को इस मुद्दे पर ट्वीट किया. जानकारी दी कि पुलिस को नोटिस भेजकर महिला के खिलाफ FIR दर्ज करने कहा गया है. स्वाति मालीवाल ने लिखा-

“ये महिला अपने ही छोटे बच्चे के साथ सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए अश्लील वीडियो बना मां-बेटे के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर रही है. इस उम्र में अगर बच्चे को ऐसी गलत सीख मिलेगी तो आगे उसका महिलाओं के प्रति व्यवहार कैसा होगा. महिला पर FIR करने के लिए हमने पुलिस को नोटिस भेजा है.”

क्या लिखा है महिला आयोग के नोटिस में?

आयोग ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया है. महिला और बच्चे के वीडियो को अश्लील बताया है. पुलिस को भेजे नोटिस में लिखा-

“वीडियोज़ में महिला 10-12 साल के बच्चे के साथ प्रोवोकेटिव तरीके से डांस करते दिख रही है, दावा किया जा रहा है कि बच्चा महिला का ही बेटा है. ये वीडियोज़ अश्लील हैं. महिला जो एक्टिविटी वीडियो में करते दिख रही है वो नाबालिग बच्चे के साथ सेक्शुअल एक्टिविटीज़ कही जा सकती हैं. बच्चे को अनुचित तरीके से डांस करवाया जा रहा है, वो महिला को पकड़ रहा है, सेक्शुअल जेस्चर बना रहा है. महिला का जो बर्ताव है वो एक बच्चे के साथ वयस्क व्यक्ति के बर्ताव के मान से सही नहीं है, वो भी बच्चा उसका खुद का बेटा है. महिला की ये हरकतें न केवल बच्चे के मेंटल स्टेटस पर असर डालेंगी, लेकिन उन लोगों पर भी निगेटिव असर डालेंगी जो ये वीडियो देख रहे हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं. इन वीडियो में बच्चे को इतनी कम उम्र में सेक्शुअलाइज़्ड किया जा रहा है, उसे अपनी ही मां को ऑब्जेक्टिफाई करते देखा जा रहा है, अगर इस पर अभी ध्यान नहीं दिया तो हो सकता है कि आगे चलकर बच्चा दूसरी औरतों को भी ऑब्जेक्टिफाई करे या क्रिमिनल मेंटलिटी डेवलप हो जाए. इस बात की जांच की ज़रूरत है कि सेक्शुअल अब्यूज़ के दूसरे फॉर्म्स का शिकार तो बच्चा नहीं हो रहा. साफ है कि महिला की हरकतें पॉक्सो एक्ट, IPC और IT एक्ट के तहत अपराध हैं.”

इसके अलावा आयोग ने पुलिस से FIR की कॉपी, CWC की रिपोर्ट जहां बच्चे को पेश किया जाएगा, साथ ही उसके रिहेबिलिटेशन की रिपोर्ट मांगी है. इसके अलावा ये भी कहा गया है कि इन वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से ब्लॉक कराया जाए और इसकी जानकारी दी जाए. ये सारी जानकारी आयोग ने पुलिस से 23 जुलाई तक मांगी है.

इस मुद्दे पर ‘आज तक’ के पत्रकार सुशांत मेहरा ने भी स्वाति मालीवाल से बात की. उन्होंने कहा कि महिला के खिलाफ FIR होने के साथ-साथ बच्चे का पुनर्वास भी होना चाहिए और उसकी काउंसलिंग भी होनी चाहिए. हालांकि इस मामले में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल की तरफ से क्या एक्शन लिया गया है, इसकी कोई जानकारी हमारे पास नहीं है. लेकिन अब दोनों ही इंस्टाग्राम अकाउंट डिएक्टिवेट हो चुके हैं.

क्या होता है चाइल्ड अब्यूज़?

मामला वाकई बेहद गंभीर है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर एक बच्चे का इस्तेमाल किया गया है. उस बच्चे का जिसे अभी सही और गलत ही पहचान ही ठीक से नहीं है. महिला आयोग ने इसे सीधे तौर पर चाइल्ड अब्यूज़ करार दिया है. WHO के मुताबिक, चाइल्ड अब्यूज़ वो दुर्व्यवहार और उपेक्षा है, जो 18 साल से कम के बच्चों के साथ होता है. इसमें सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक दुर्व्यवहार, सेक्शुअल अब्यूज़, उपेक्षा, लापरवाही और कमर्शियल या अन्य एक्सप्लोइटेशन शामिल हैं. जिनके नतीजतन बच्चे की हेल्थ, अस्तित्व, विकास या सम्मान को वास्तविक नुकसान या संभावित नुकसान हो सकता है. आसान भाषा में कहें तो बच्चे के साथ किसी भी तरह का गलत व्यवहार चाइल्ड अब्यूज़ या बाल शोषण की कैटेगिरी में आएगा. अब जो वायरल वीडियो का मुद्दा है, क्या इसमें बच्चा वाकई चाइल्ड अब्यूज़ का शिकार हुआ है या नहीं. इसके बारे में डिटेल में जानने के लिए हमारे साथी नीरज ने बात की कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन्स फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक (ट्रेनिंग) ज्योति माथुर से. वो कहती हैं-

“अपने घर के अंदर वो अपने ही बच्चे से अब्यूज़ का काम करा रही है. ये निश्चित तौर पर अब्यूज़ है. क्योंकि अगर हम कानूनी परिभाषा में देखें तो कोई भी व्यक्ति या तो बच्चे के किसी प्राइवेट पार्ट को टच करता है या बच्चे से अपने प्राइवेट पार्ट्स टच कराता है, उसमें स्किन टू स्किन टच इतना इम्पॉर्टेंट नहीं है. लेकिन अगर इस तरह की कोई भी सेक्शुअल इनअप्रोप्रिएट बिहेवियर करता है तो वो कानून के अंदर्गत एक अपराध है. और वो जो कानून है उसका नाम है प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेस, जिसे हम POCSO के नाम से जानते हैं. क्योंकि ये वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर हुए हैं, तो ये मामला IT एक्ट के अंदर भी कवर होता है. IT एक्ट के सेक्शन 67बी के तहत. लेकिन सबसे अहम पॉक्सो है, क्योंकि पॉक्सो बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बना स्पेशल कानून है, जिसमें सज़ा भी ज्यादा है और अब्यूज़र के लिए बचना भी आसान नहीं है.”

Jyoti Mathur

एक आम जनता के नाते हम ऐसे वीडियो अगर कहीं वायरल होते देखें, या ऐसी घटनाएं अपने आस-पास होते देखें, तो हमें क्या करना चाहिए. इस सवाल का जवाब हमें दिया चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY) फाउंडेशन के जनरल मैनेजर कुमार निलेंदू ने. उन्होंने इस वायरल वीडियो के बारे में और हमारे सवाल के जवाब में कहा-

“अब्यूज़ का मतलब होता है फिज़िकल, मेंटल और इमोशनल. तो मानसिक तौर पर, शारीरिक तौर पर और इमोशन्स को भी अगर आप हर्ट करते हो, तो वो अब्यूज़ माना जाएगा. इस केस में तो मुझे लग रहा है कि करीब-करीब तीनों चीज़ उस बच्चे के साथ हुई है. तो अब्यूज़ तो डेफिनेटली है. मान लीजिए आपके घर के आस-पास कुछ हो रहा है और आपको इस बात की जानकारी है, तो आप पहला ये काम कर सकते हैं कि आप पुलिस के पास जा सकते हैं. दूसरा आप किशोर न्याय अधिनियम के तहत बाल कल्याण समिति के पास जा सकते हैं, एक नागरिक के तौर पर जानकारी दे सकते हैं. तीसरा काम आप ये कर सकते हैं कि आप चाइल्ड लाइन नंबर 1098 पर कॉल करके जानकारी दे सकते हैं. किसी भी अपने देश के आम नागरिक को ये तीन स्टेप तुरंत लेने चाहिए.”

Nilendu

इस मुद्दे पर हमारे साथी नीरज ने एडवोकेट नेहा रस्तोगी से भी बात की. उनसे हमने जानना चाहा कि मौजूदा केस किस तरह से चाइल्ड अब्यूज़ की कैटेगिरी में आएगा और अगर आता है तो आरोपी पर, माने इस केस में मां पर, किस तरह की कानूनी कार्रवाई हो सकती है. एडवोकेट ने कहा-

“ये घटना बिल्कुल अब्यूज़ के दायरे में आती है. आप इसमें तुरंत FIR दर्ज करा सकते हैं. पॉक्सो एक्ट के अंदर दर्ज करा सकते हैं. साथ में IPC के अंदर भी दर्ज करा सकते हैं. IT एक्ट के अंदर भी करा सकते हैं. क्योंकि वो रफ्तार में इंस्टाग्राम पर वीडियो पब्लिश कर रही हैं. आपको तुरंत ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे ये अकाउंट ब्लॉक हो जाए. FIR दर्ज होते ही तुरंत वो अकाउंट डिएक्टिवेट हो जाएगा. बाकी लोगों को ये मैसेज न जाए, क्योंकि ये बहुत ही चीप हरकत है. ये देखना होगा पहले कि वो बच्चा उसी का है न. अगर वो उसका नहीं होगा तो चाइल्ड ट्रेफिकिंग का मामला और एड ऑन हो जाएगा. अगर वो उसका ही बच्चा है, ये साबित होता है तो ये बहुत ही शर्म वाली चीज़ है कि अपने ही बच्चे के साथ आप ऐसी हरकत कर रहे हैं. बच्चे को रिहेबिलिटेशन सेंटर भेजा जाना चाहिए.”

Neha

बच्चे के दिमाग पर क्या असर हो सकता है?

इस पूरी बहस में एक सबसे अहम एंगल है बच्चे के दिमाग पर पड़ने वाला असर. चूंकि मौजूदा केस में बच्चा बहुत छोटा है, शायद उसे इस बात की समझ ही नहीं होगी कि किस तरह उसे सेक्शुअलाइज़्ड किया जा रहा है. ऐसे में किस तरह से उसकी मेंटल हेल्थ पर इसका असर पड़ सकता है, ये जानने के लिए हमारे साथी नीरज ने बात की न्यूरो सायकोलॉजिस्ट डॉक्टर नितनेम सिंह सोढ़ी से. उन्होंने कहा-

“बच्चे के दिमाग पर ये असर हो सकता है कि उसके अंदर सही और गलत की पहचान डेवलप नहीं होगी. दूसरा असर ये है कि बच्चे को अगर बाद में पता चले कि जो कुछ भी उसके साथ हो रहा था, वो असलियत में क्या था. तो उसके अंदर डिप्रेशन और एंग्ज़ायटी आने की बहुत संभावना है. दो चीज़ों में से एक होने की संभावना हम कह सकते हैं कि 80 फीसद से ज्यादा है. या तो ये फ्यूचर में जब बच्चे को पता चलेगा कि उसकी मां ने उसके साथ क्या किया, कैसे वीडियो बनाकर डाले, अगर उसे समझ आया कभी तो डिप्रेशन-एंग्ज़ायटी हो सकती है. इन वीडियो को देखकर तो ये लग रहा है कि बच्चे को कुछ अंदाज़ा नहीं है कि उसके साथ क्या हो रहा है, वो खाली वो काम कर रहा है जो उसकी मां उससे करवा रही है.”

Dr Sodhi

डॉक्टर सोढ़ी ने आगे बताया कि जो बच्चे बचपन में सेक्शुअलाइज़्ड होते हैं, उन्हें लेकर 25 फीसद ये संभावना होती है कि वो आगे चलकर क्रिमिनल नेचर के बने, वहीं 75 फीसद संभावना इस बात की होती है कि वो बच्चे डिप्रेशन या एंग्ज़ायटी का शिकार हो सकते हैं, क्योंकि बहुत से बच्चों को पता ही नहीं होता है कि उनके साथ आखिर हो क्या रहा है, जब उन्हें सब समझ आता है, तब डिप्रेशन की दिक्कत होने लगती है. कई बार बच्चे बड़े होकर खुद से ही नफरत करने लगते हैं, अपने शरीर से ही उन्हें नफरत हो जाती है. लेकिन जिन्हें पहले से ही इस बात का पता हो कि उनके साथ क्या हो रहा है, वो क्रिमिनल टेंडेंसी वाले हो सकते हैं आगे चलकर, क्योंकि उन्हें पता नहीं होता है कि सही और गलत क्या है, मर्यादा क्या है. हमने डॉक्टर से ये भी जानना चाहा कि क्या महिला केवल पॉपुलर होने के लिए ऐसा कर रही थी, या फिर कोई और दिक्कत भी उसे हो सकती है. इस पर डॉक्टर सोढ़ी कहते हैं-

“हम कह सकते हैं कि इस मां को कोई न कोई सायकोलॉजिकल डिसॉर्डर हो सकता है. वो केवल फेमस होने के लिए ऐसा कर रही है. उसे भी ये समझ नहीं है कि सही क्या है, गलत क्या है. मतलब मेरे हिसाब से अगर कोई सायकोलॉजिस्ट होगा, तो वो इसे स्किज़ोफ्रिनिया कह सकता है. हो सकता है कि महिला को स्किज़ोफ्रिनिया हो, क्योंकि उसे सही और गलत की पहचान नहीं है. वो खुद के बच्चे के साथ ऐसा कर रही है, खाली फेमस होने के लिए. अगर हम उस औरत का मनोविज्ञान समझने की कोशिश करें, तो उसके लिए न बच्चे की अहमियत है और न किसी अन्य चीज़ की अहमियत है, फेमस होने के अलावा. और फेमस होने के लिए वो किसी भी हद तक जा सकती है. जब उसने ये वीडियो अपलोड किए होंगे, तब शायद उसे पता होगा कि आगे क्या होने वाला है.”

आंकड़े क्या कहते हैं?

अगर आंकड़ों की बात करें, तो जनवरी 2020 में NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने कुछ आंकड़े जारी किए थे. जिससे पता चला था कि भारत में साल 2018 में पॉक्सो एक्ट के तहत सेक्शुअल अब्यूज़ के करीब 39,827 मामले दर्ज हुए थे, औसत निकालें तो हर दिन 109 बच्चे सेक्शुअली अब्यूज़ हुए थे. वहीं साल 2017 की बात करें तो ये आंकड़ा 32,608 था. बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की बात करें, तो साल 2018 में ऐसे करीब 1,41,764 आपराधिक मामले रिकॉर्ड किए गए थे, वहीं दस साल पहले यानी 2008 में इन मामलों की संख्या 22,500 थी. चाइल्ड पोर्नोग्राफी के 781 मामले साल 2018 में सामने आए थे, जबकि ये आंकड़ा 2017 में 331 था. ये तो वो मामले हो गए, जो सामने आए, ऐसे कितने केस ऐसे होंगे, जो कहीं दबे होंगे और आज तक हमारे सामने नहीं आए होंगे.

मौजूदा जो मामला है, वो ऐसा है जिसमें ज्यादातर लोगों ने ये सवाल किया है कि हो सकता है कि कैमरे के पीछे वो बच्चा और भी बुरी तरह से अब्यूज़ होता हो, सेक्शुअल अब्यूज़ के दूसरे तरीकों का शिकार होता हो. इसी की जांच की मांग दिल्ली महिला आयोग ने भी की है. एक बच्चे का सबसे पहला टीचर उसके पैरेंट्स होते हैं. वो शुरुआती दिनों में जो भी सीखता है अपने पैरेंट्स से सीखता है. इसलिए जो मौजूदा केस सामने आया है, वो चीख-चीख कर ये सवाल पूछ रहा है कि इस बच्चे ने क्या सीखा होगा? वो जिस तरह के डांस अपनी मां के साथ करता है, जैसा बर्ताव वो रील्स में अपनी मां के साथ करता दिखता है, वो कहीं न कहीं हमारे दिमाग में ये आशंका जगाते हैं कि वो बच्चा आगे चलकर शायद रिश्तों के दायरों को नहीं समझ पाएगा. शायद वो ये भी न समझ पाए कि किसी लड़की के साथ किस तरह से बर्ताव करना सही होगा. इस मामले में भले ही FIR महिल के खिलाफ हो, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान अगर किसी का होगा, तो वो बच्चे का होगा.


वीडियो देखें: परिवार का आरोप- अस्पताल ने भर्ती नहीं किया और सीढ़ी पर ही हो गई महिला की डिलीवरी

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