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फिरोज़ाबाद: डॉक्टरों की लापरवाही के चलते महिला ने सड़क के किनारे बच्चे को जन्म दिया!

फिरोज़ाबाद. उत्तर प्रदेश का जिला. यहां के शिकोहाबाद कस्बे में एक महिला ने सड़क किनारे बच्चे को जन्म दिया. पास की महिलाओं ने डिलीवरी में मदद की. परिवारवालों का कहना है कि वह 7 मई को अस्पताल तो गए थे, पर उन्हें वहां से दवा देकर वापस भेज दिया गया. कहा गया कि अभी डिलीवरी होने में वक्त है, इसलिए वो लोग घर जाएं. लेकिन डिलीवरी दूसरे दिन 8 मई को ही हो गई.

पूरा मामला जानने के लिए हमने इंडिया टुडे से जुड़े सुधीर शर्मा से बात की. उन्होंने बताया कि महिला के घरवाले उसे पहले अस्पताल ले गए थे. वहां से उसे दवा देकर लौटा दिया गया था. इसके बाद रात में दर्द होने के बाद उसे अल्ट्रासाउंड के लिए पास के एक क्लीनिक ले जाया गया. लेकिन क्लिनिक बंद थी. महिला को लेबर पेन इतना ज्यादा हो रहा था कि उसकी डिलीवरी उसी क्लीनिक के बाहर हो गई.

इन्हीं महिलाओं ने किरन की डिलीवरी में मदद की थी. (फोटो- सुधीर शर्मा)
इन्हीं महिलाओं ने किरन की डिलीवरी में मदद की थी. (फोटो- सुधीर शर्मा)

महिला के भतीजे सुनील यादव ने हमें बताया कि उनकी चाची किरन देख नहीं सकती हैं. 42 साल की हैं थाना मक्खनपुर इलाके के गांव नगला बाजदार में रहती हैं. दो बच्चे हुए थे, पर सात-आठ महीने में डिलीवरी होने के कारण उनकी मौत हो गई थी. ये बच्चा भी आंठवे महीने में हुआ है. उन्होंने कहा,

7 मई को चाची के पेट में तेज दर्द हो रहा था. उन्हें पास के जिला अस्पताल लेकर गए. वहां से उन्हें शिकोहाबाद के अस्पताल में ले जाने के लिए बोल दिया गया. फिर उन्हें शिकोहाबाद लेकर गए. जहां डॉक्टर ने बोला कि अभी डिलीवरी में वक्त है. और दर्द की दवा देकर घर ले जाने के लिए कहा. घर ले आए, चाची ने दवा भी खा ली. लेकिन रात में फिर दर्द होने लगा. बच्चे को कोई तकलीफ तो नहीं, ये सोचकर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए 8 मई की सुबह क्लीनिक गए. वहां क्लीनिक बंद थी. दर्द इतना तेज़ था कि डिलीवरी वहीं हो गई. आस-पास की औरतों ने चाची की डिलीवरी में मदद की. 

महिला को गोद में उठाकर एंबुलेंस में लिटायाजा रहा है. स्ट्रेचर की कोई सुविधा नहीं.
महिला को गोद में उठाकर एंबुलेंस में लिटाया गया. स्ट्रेचर की कोई सुविधा नहीं मिली.

महिला की डिलीवरी होने के बाद SDM नरेंद्र कुमार मौके पर पहुंचे. उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी. इसके अलावा मौके पर पहुंची एंबुलेंस में स्ट्रेचर की सुविधा नहीं थी. लोगों ने महिला को गोद में उठाकर एंबुलेंस में लिटाया और शिकोहाबाद के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करवाया. 9 मई की सुबह 11 बजे दोनों को वहां से डिस्चार्ज करके घर भेज दिया गया है. फिलहाल दोनों स्वस्थ हैं.


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